॥ श्री राधावल्लभो जयति ॥ श्री हित हरिवंश चन्द्रो जयति ॥
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प्रेम की पीर — पद 93

स्फुट-लीला

कब बाट हेरिहौं तेरे आवन की।
सोचत करुणाधाम किशोरी, ललित-ललित गति घावन की।
फहरत अंचल अंग झलकिबौ, मुख पर छवि मुसिकावन की॥
हँसि-हँसि करुणा कोर हेरिबौ, मधुर-मधुर बतरावन की।
भोरी हिय अकुलात किशोरी, हौंसन हियौ सिरावन की॥