सुधि आवत मान मनैबे की।
चंचल दृग थिर किये किशोरी, अवनी ओर चितैबे की॥
कर दै विमल कपोलन प्यारी, भृकुटी कुटिल लचैबे की।
कंज बदन मूंदे करुणानिधि, सुन्दर ग्रीव झुकबे की॥
परि-परि पाँव मनावन हू की, कर सों ठेलि हटैबे की।
भोरी हौंसन मरत किशोरी, कहि रस बैन हँसैबे की॥