श्री हित स्फुट वाणी — पद 11
आंनद आजु नंद के द्वार।
दास अनन्य भजन-रस कारन,
प्रगटे लाल मनोहर ग्वार।।
चंदन सकल धेनु तन मंडित कुसुम दाम रंजित आगार।
पूरन कुंभ बने तोरन पर बीच रुचिर पीपर की डार।।
युवति-यूथ मिलि गोप विराजत,बाजत पणव मृदङ्ग सुतार।
(जै श्री ) हित हरिवंश अजिर वन वीथिनु,
दधि मधि दूध हरद के खार ।।11।।
अर्थ / व्याख्या
इस पद में श्रीहिताचार्य जी ने नन्द नन्दन के जन्म का कारण व जन्मोत्सव रस का वर्णन किया है।
व्याख्या: आज संसार का सम्पूर्ण आनन्द चल कर श्री नन्दराय जी के दरवाजे पर पहुंच गया है।अपने अनन्य दासों के भजन – रस से प्रसन्न हो श्री लाल जी मनोहर ग्वाल के रूप में प्रगट हुए है।। इस जन्मोत्सव पर ,नन्दगाँव की सभी गायों के शरीर पर चन्दन का लेप किया गया है और गांव के सभी मन्दिर -घरों को फूलों की बन्दनवार से सजाया गया है। जल से पूर्ण भरे कलश और उनके बीच मे पीपल की डाल को प्रत्येक घर के द्वार पर सजाया गया है।।
नन्दगाँव के लोग-लुगाई व गोपगण सभी मिलकर इक्कठे बैठे है और वे सभी ढोल,मृदङ्ग सुन्दर ताल के साथ बजा रहे है।जय जय श्रीहित हरिवंश जी कहते है — गांव के आंगन व गलियों में हल्दी मिला दूध इस बह रहा है कि वहां सभी गड्ढे भर गये है।।11।।