श्री हित स्फुट वाणी — पद 24
प्रथम दोहा
सबसों हित निष्काम मत,श्री वृन्दावन विश्राम।
श्री राधावल्लभ लाल कौ,ह्रदय ध्यान मुख नाम।।1।।
अर्थ / व्याख्या
व्याख्या: निकुञ्ज में श्री ललिताजी,विशाखाजी,चित्रलेखाजी,इंदुलेखाजी आदि सखियों का सर्वोपरि हित श्री श्यामाश्याम में ही है।उनका यह प्रेम निष्काम है, यह हमें निष्काम भाव को लक्ष्य बताता है,अतः हमे भी धरती पर निवास करते हुए अपनी मति में सबका हित निष्काम भाव से अभ्यास करना चाहिए । तथा श्री वृन्दावन धाम में निवास की यदि चाहत रखते है तो ,हमेशा ह्रदय में श्री राधावल्लभ का निरन्तर ध्यान रहे साथ ही मुख (वाणी) से भी पहला शब्द श्री राधावल्लभ लाल हो।
यह करने से हम श्री वृन्दावन धाम में रहते हुए निकुंज सेवा का अभ्यास कर लेंगे ,जो की आगामी भविष्य में काम आने वाली है।