श्री हित स्फुट वाणी — पद 27
चतुर्थ दोहा
रसना कटौ जो अनरटो, निरिख अनफुटो नैन।
श्रवण फुटौ जो अनसुनो, बिन राधा यश बैन।।
अर्थ / व्याख्या
व्याख्या: इस श्री धरा पर या श्री धाम वृन्दावन में वास करते हुए अगर श्री राधा के यश का गान किये बिना समय निकले तो वह व्यर्थ है,अगर श्रवण (कानों) में श्रीराधा नाम सुनने में ना आये और नेत्रो से श्री राधा जी के दर्शन ना हो तो उनका फूट (टूट) जाना ही उचित है।उस बोली का भी ना होना उचित है जिसने श्री राधा नाम का रटन(भजन) नही किया।