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जो कहते है हमे प्यार है !!

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पूज्य महाराज जी का एक संक्षिप्त वचन — पूरा सुनने के लिए ऊपर वीडियो देखें।

पूरा प्रवचन

प्राय हम प्यार शरीर से ही करते हैं पर जो शरीर के अंदर बैठा तत्व है जो अंतर ध्यान हो गया तो हम स्वयं लेकर उसे शरीर को नष्ट कर देते हैं जल देते हैं और प्यार शेयर से किया था अब भी याद तुम्हें शरीर की ही आई है वो पैदा कहानी ढांचा अलग हुआ था संयुक्त आपका कुछ वर्षों का था वो अंदर जिसके लिए तुम तड़प रहे वो प्रभु ही था जो बहुत प्यार करता है शरीर से जब उसके अंदर से भगवान चले जैन तो वो रहेगा अब वो नहीं रहे तो तुमने प्यार किस किया था जानते हो तुम तो जिसको जानते हो तो सामने अब करो ना प्यार बोले नहीं अब वो नहीं रहा इसलिए इसको हटा दो मतलब तुम अनजाने में भी भगवान से प्यार कर रहे थे सब के अंदर बिजली जो है ना भगवान ये जो चैतन्य है ना आसन खेलने बोलना प्यार दुलार ये भगवान है अंदर उन्हें का पावर है और वो अंतर ध्यान हो गए तो कितना भी सुंदर प्यार शरीर हो आज लगा दी जाति है परमात्मा के लिए नहीं रो रहे हो क्योंकि उसके लिए रोटी तो प्रश्न खत्म हो जाता निहाल हो जाते ऐसा प्यार प्रभु से हो जाए तो अभी जीवन कृतार्थ हो

जाए महात्मा बन जो मुझे लगता है थोड़ी दिशा गलत है उसको सही कर लो तो आनंदित हो जाओगे

यह पाठ वीडियो के स्वचालित (auto-generated) उपशीर्षकों से लिया गया है — इसमें शब्दों की त्रुटियाँ हो सकती हैं। प्रामाणिक वचन के लिए वीडियो अवश्य सुनें।

मूल वीडियो: Bhajan Marg (YouTube)

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