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हम नहीं चाहते कि पाप करें लेकिन अपने आप हो जाते हैं ऐसा क्यों ?

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पूज्य महाराज जी का एक संक्षिप्त वचन — पूरा सुनने के लिए ऊपर वीडियो देखें।

पूरा प्रवचन

जैसे जंगली घोड़ा लाओ ना तो उसको चाबुक भी चाहिए थोड़ा भयभीत रहे और उसको हाथ फेरो दुलार करो खवा हो पियाओ जिससे वो अनुकूलता को हमारी पहचाने और जब प्रतिकूल हो तब चाबुक तो दोनों से उसको अधीन किया जाता है ऐसे इस समय जंगली घोड़ा मन समझ लो जिधर चाहता उधर रौंद के फेंक देता है हमें देख लो सब देख लो ना बोले हम नहीं चाहते कि ये खाए हम नहीं चाहते ये पिए हम नहीं चाहते पाप कर्म करें पर होता है ना क्योंकि सिस्टम उल्टा हो चुका है इसको सीधा करना पड़ेगा अब इसको सीधा करने के दो उपाय हैं एक से नहीं चलेगा अब आप इसको दुलार करना है और इससे शासन भी दुलार यदि वो धर्म पूर्वक भोग भोगने के लिए कहता है तो मान जाओ उसकी बात अब यह कहता है कि हमें गंदी बात देखना है बहुत जन्म हो गए नष्ट करते हुए नहीं अब इसके दो के लिए हमें बल चाहिए नहीं नहीं के लिए और यह विवेक चाहिए कि है यह करना ठीक है और यह करना ठीक नहीं इसके लिए सत्संग और नाम जप ये दो साधन है

यह पाठ वीडियो के स्वचालित (auto-generated) उपशीर्षकों से लिया गया है — इसमें शब्दों की त्रुटियाँ हो सकती हैं। प्रामाणिक वचन के लिए वीडियो अवश्य सुनें।

मूल वीडियो: Bhajan Marg (YouTube)

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