॥ श्री राधावल्लभो जयति ॥ श्री हित हरिवंश चन्द्रो जयति ॥
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जो बच्चे अपने माता-पिता को बुरा-भला और मार-पीट करते हैं वो जरा ध्यान से सुनना !

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श्री हित राधा केलि कुंज, वृन्दावन में पूज्य श्री हित प्रेमानंद गोविंद शरण जी महाराज के साथ एकांतिक वार्तालाप। साधक अपने जीवन और साधना के प्रश्न रखते हैं और महाराज जी उनका समाधान करते हैं।

पूरा प्रवचन

जो बूढ़े माता-पिता का अपमान कर रहे हैं बूढ़े माता-पिता को कष्ट दे रहे खोपड़ी के बल खड़े होकर तपस्या करो फिर भी नरक जाओगे पक्की बात समझ लेना उसकी कोख में तुम पले हो दूध पिलाया है व तुम्हारी सौत फेकी है वो मां है व पिता बुढ़ापा में बुद्धि खराब हो जाती है बूढ़े लोग कुछ भी बोलते रहते हैं चाहे जितना आप अच्छा भोजन दो सबसे निंदा करेंगे कि लड़का य बहू हमको बहुत कष्ट देते वो तुम्हें सहना होगा बूढ़े माता-पिता की दुर्दशा देख करके ऐसा लगता है आज हमारी समाज को क्या हो रहा है अरे ऐसे मार रहे जैसे जानवर को मार रहे हो बूढ़े माता-पिता को आप लोग तो इस विषय को देखते होंगे जानते होंगे हमें बहुत इस समय तरस आता है जब बूढ़े बूढ़े लोग परेशान घूमते हैं कि हमारे बच्चे ने निकाल दिया या उनको पीट दे यह आज हम सत्संग में भी इसीलिए बोले और यहां भी बोले और हमारी सबसे प्रार्थना है अपने बूढ़े माता-पिता की सेवा करो जो बूढ़े माता-पिता का अपमान कर रहे हैं बूढ़े माता-पिता को कष्ट दे रहे हैं खोपड़ी के बल खड़े होकर तपस्या करो

फिर भी नरक जाओगे पक्की बात समझ लेना आज का जो समय वातावरण जो बढ़ रहा बहुत ही निंदनीय बात है कि जिन माता-पिता ने हमको इतना बड़ा किया उन पर हम हाथ उठावे आज हम सत्संग में भी बोले हैं कि देखो कैसे बूढ़ी माई को मार रहा है जवान लड़का लातों से देखो कैसे माता-पिता को बहू और बेटा मिलकर के मार रहे हैं दरवाजा बंद करके अरे या उसकी कोख में तुम पले हो दूध पिलाया है व तुम्हारी सौत फेंकी है वोह मां है व पिता बुढ़ापा में बुद्धि खराब हो जाती है बूढ़े लोग कुछ भी बोलते रहते हैं चाहे जितना आप अच्छा भोजन दो सबसे निंदा करेंगे कि लड़का य बहू हमको बहुत कष्ट देते वो तुम्हें सहना होगा चुपचाप सहकर उनकी सेवा करो तो भगवान की कृपा हो जाएगी इस समय सबसे ज्यादा हमें आवश्यकता है अपने घर गृहस्थ के धर्म का निर्वाह करने की जो गृहस्थ में वो अच्छे से समझे यह जो आज का वातावरण चल रहा है गृहस्थी का सत्यानाश करने वाला चल गया है देखो गृहस्थ में ही तो हम लोग पैदा हुए हैं गृहस्थ में हमारा पोषण हो रहा है गृहस्थ में बड़े-बड़े परमहंस

भिक्षा मांगते हैं आपका गृहस्थ धर्म बेकार तो सब कुछ बेकार हो जाएगा क्योंकि आपसे ही सब धर्म चल रहे हैं सारे धर्म आपसे चल रहे हैं गृहस्थ धर्म से ही सब चल रहे हैं क्योंकि हम लोग परमंस संत जन पैदा भी तो ग्रस्तों के यहां होते हैं और पलते भी तो ग्रस्तों से ही है अगर आप भ्रष्ट तो हमारी बुद्धि कहां से भ्रष्ट नहीं हो जाएगी हमारी बुद्धि भी भ्रष्ट हो जाएगी इसलिए हमें सबसे बड़ी चिंता हो रही है कि आज हमारी समाज बिगड़ती चली जा रही सुंदर पति है स्वस्थ पति है और दूसरे पुरुष से रा कर रही सुंदर स्त्री है प्यार करती है वह दूसरी लड़की से प्यार कर रहा है अब वो गृहस्ती चल पाएगी जिस दिन यह सब भेद खुलेंगे उस दिन नरक हो जाएगा घर नहीं हो जाएगा अच्छा अब वो इतनी आधुनिकता में है बह कि उसको सास की सोच फेंकने की कहीं भावना नहीं है लड़का इतना अक्त है बह पर वह जो बोल दे वही परमार्थ बुद्धि वही परमात्मा बुद्धि अब दोनों मिलकर के व बूढ़े माता-पिता कुमार हम ये नहीं कहते कि माता-पिता गलत नहीं लेकिन उनकी बुद्धि खराब हो गई है

वृद्धा उस्ता तुम तो जवान हो जैसे तुम छोटे थे तो तुम्हारी बुद्धि खराब थी कहीं सोच कर दिया कहीं लघु शंका कर दिया कभी मां ने तुमको डांटा तुम्हारी सोच फेंकी लघु शंका अब उनकी अवस्था है बालव अवस्था वृद्ध जनों की होती है वो गाली दे सकते हैं उनकी सेवा करो सबसे बड़ा उपदेश यही है नशा मत करो अगर नशा करके जाओगे तो तुम ऐसे अपराध करोगे घर में आतंक मचाओ ग ये गंदा भोजन मत करो नहीं बुद्धि भ्रष्ट हो जाएगी और हाथ जोड़कर प्रार्थना है सबसे बड़े भगवान मंदिर जाओ या ना जाओ अपने माता-पिता की सेवा कर लो भगवान प्रसन्न हो जाएंगे बूढ़े माता-पिता की दुर्दशा देख कर के ऐसा लगता है आज हमारी समाज को क्या हो रहा है अरे ऐसे मार रहे जैसे जानवर को मार रहे हो बूढ़े माता-पिता को आप लोग तो इस विषय को देखते होंगे जानते होंगे तो अब बताओ हम कौन सा ज्ञान तुम्हें दे दे जिससे तुम्हारे को आत्म शांति हो जाएगी जब माता-पिता भगवान के रूप है उनका अपमान किया जा रहा है और मंदिर में जाकर तुम जल चढ़ाओ आरती करो या तुम भोग लगाओ भगवान लेंगे वहां

बैठे भूखे भगवान बैठे हैं वहां तुम्हारा इंतजार कर रहे हैं कि मेरा बेटा और बेटा उनके साथ बर्ताव ऐसा कर रहा है सबसे ज्यादा समय समाज के सुधार में चरित्र का है आज हमारा नया समाज चरित्रहीन होता चला जा रहा है और यह समझ में नहीं आ रहा इसे आधुनिकता समझा जाता है अरे पुराने जमाने की बातें हैं तो आज के जमाने में क्या करोगे फिर यह बे विचार करोगे तो तुम्हें परस्पर प्रेम रहेगा क्या तुम्हारे सामने पत्नी किसी और और तुम कि कहीं और तो संतान फिर परिवार फिर प्रीति फिर धर्म फिर मर्यादा कुछ नहीं के भीतर पोल क्या गृहस्थी धर्म रहेगा क्या भागवत धर्म रहेगा क्या मर्यादा रहेगी यह बहुत गलत चल पड़ा है कैसे भगवान संभाले कलयुग का बहुत बड़ा विचित्र रूप ये नाटक फैल गया ये जो गर्लफ्रेंड बॉयफ्रेंड लेव लेशन क्या क्या कहते हैं दलित दुरा है यह बहुत बुरी हो गई देखो पहले हमने देखा जब तक ब्याह नहीं होता था बच्चे ब्रह्मचर्य रहते जानते ही नहीं थे संसारी अब वो मोबाइल चल गया ना सब जाने और जब ब्याह हुआ तो आजीवन एक दूसरे की गलतियों

को सहते हुए वो एक ही घर में रहते तलाक शब्द हमने कभी नहीं सुना संबंध विक्षेद कभी शब्द नहीं सुना हमने क् एक दूसरे से सम नहीं ऐसा कभी नहीं सुना गांव में तो कभी नहीं सुना आजीवन निर्वाह करते थे हां थोड़ी उद्दंडता होती पड़ोस वाले संभाल देते थे भाई मारपीट मत करो लड़ाई झगड़ा मत करो थोड़ी बड़ी बातों में आपस में लेकिन यह चरित्र हीनता कि स्वस्थ पति है स्वस्थ परिवार है आप उसका त्याग कर किसी और पुरुष से या स्वस्थ पत्नी है सुंदर पत्नी आप उसका त्याग कर किसी अब उस परिवार की हालत क्या होगी बड़े पढ़े लिखे हो बड़े बुद्धिमान हो लेकिन चरित्रहीन हो क्या है हमारी यही बात समझ में तो फिर तुम माता-पिता की सेवा करोगे अपने तुम्हारे अंदर तो उद्दंडता सवार रहेगी तो आज का समय जो है सत्संग सुनो हम कह रहे भगवान की भक्ति से ज्यादा अपने परिवार की भक्ति कर लो अगर परिवार की सही भक्ति कर लोगे तो भगवान की भक्ति हो जाएगी क्योंकि परिवार में भगवान ही विराजमान है पत्नी में भगवान है पति में भगवान है पुत्र में भगवान है माता-पिता में

एक गृहस्थी अगर सम्यक रूप से सुखी नहीं है तो तुम क्या कर सकते हो रुपया से केवल सुख मिलता है क्या आचरण पवित्रता और व्यवहार यह तीन चीजें सुख प्रदान करती हैं आपका व्यवहार सत्य है निश्छल है कपट रहित है धर्म पूर्वक है आप पवित्र आचरण वाले हैं आप बहुत सुंदर गृहस्थ रहेंगे लेकिन आज हम देख रहे हैं कि गृहस्ती की हालत खराब होती चली जा पति-पत्नी में विश्वास नहीं रह गया है मां बेटे में विश्वास नहीं रह गया भाई भाई में प्यार नहीं रह गया क्या होता चला जा रहा है समाज का थोड़े से धन के लोभ में थोड़े सी जमीन के लोभ में सगा भाई अपने भाई की हत्या कर देता है सगा बेटा अपने माता-पिता को कष्ट दे रहा है तो इसलिए हमें लगता है सबसे ज्यादा इस समय आवश्यकता है अपने परिवार की प्रेम रस्सी को मजबूत करना एक परिवार एक गृहस्थ में पांच लोग हो वही प्रेम से जीना सीख जाओ तो बहुत बड़ी आराधना हो जाएगी बूढ़ी मां है चल नहीं पा रही उसे लात से मार रहे हो डंडे से मार रहे हो यार नरक का भी तो होश रखो कि तुम्हें तुम्हारी दुर्दशा क्या हो

जाए फिर ऐसे ही लोग जब गाड़ी में बैठ के चलते हैं ना तो ऊपर से पूरा ट्रक पलट है उनके ऊपर कि सांस भी ना ले पाओ वहीं पिचक जाओ फिर य आग लग जाती उसी गाड़ी में जल जाते हैं कर्म ना बिगड़ने पाए हम बार-बार सबसे प्रार्थना करते हैं कोई किसी का सुख दुख देने वाला नहीं किसी का आशीर्वाद काम नहीं करेगा तुम्हारे आचरण तुम्हारे कर्म ही तुमको सुख दुख देंगे इसलिए भाई अच्छे कर्म करो अपने बुजुर्गों के कर्मों की तरफ मत देखो वो बूढ़े हो गए जैसे बच्चा ऐसे बूढ़ा हो जाता है बूढ़े की सेवा भगवान की सेवा है हमें बहुत इस समय तरस आता है जब बूढ़े बूढ़े लोग परेशान घूमते हैं कि हमारे बच्चे ने निकाल दिया या उनको पीटते ये आज हम सत्संग में भी इसीलिए बोले और यहां भी बोले यह बहुत जरूरी है वो बूढ़े शरीर में सच्चिदानंद भगवान मार्ग के रूप में है ऐसा मत करो कोई अपने माता पिता के साथ आपको स्वस्थ किया है आप लेवरी करके कमाओ दो रोटी उनको पवा दो मारो मत डंडा मत चलाओ नहीं तो फिर जब भगवान का डंडा उठेगा तब तुम किसी काम के नहीं रह जाओगे बात

ध्यान रखना बहुत सावधानी से जी लो ये मनुष्य जीवन भगवान की कृपा प्राप्त करने के लिए यदि भगवत प्राप्ति ना कर पाए तो अन्य योनियों में जाना पड़ेगा बहुत दुर्दशा अन्य योनियों की देखो जंगल में कांटा लग गया अगर किसी पशु को को पक रहा है अब वो दवाई तो नहीं हो सकती ना अच्छा कोई मांस खाने वाले जीव जैसे किसी जीव को पकड़ लिए अब वो खा रहे हैं जब तक वो मरेगा नहीं तब तक जिंदा नोच नोच वो हम ही तुम है यह सब मन में सोचा करो पाप कर्म बन गए ऐसे जीव बन गए ऐसे कष्ट भोगना

पड़ेगा हमको य अवसर मिला है कि हम सारे कर्म नष्ट करके भगवान की प्राप्ति कर सकते हैं इसलिए अच्छे आचरण करो नाम जप करो कोई नशा मत करो और बड़े बूढ़ों की सेवा करो अगर अड़ोस पड़ोस में कोई ऐसा बड़ा बूढ़ा हो कि उसकी सेवा करने वाला ना हो तो थोड़ा समय दे दे अपने पास पैसे हो तो उनको खानपान की सामग्री अर्पित कर दे वृद्धों की सेवा से भगवान बहुत प्रसन्न होते हैं बीमार है वृद्ध है ऐसों की जरूर सेवा करें हम कह रहे और दान पुण्य कई मत करो आस पड़ोस में कोई बूढ़ा हो ना उसको कपड़े उसके भोजन उसकी देखरेख कर लो और अगर कोई मर रहा हो तो उसके पास जाकर राधा राधा चिल्ला दो हे उसका कल्याण हो जाएगा तो तुम्हारा कल्याण हो जाएगा एक का कल्याण कर दिया तो काम बन जाएगा मरते समय नारायण बोला ना उस अजामिल ने तो भगवान के प्रसाद आ ग ना तो ऐसे तुम सुना दो जाकर जैसे कोई मर रहा है वहां गए दो मिनट राधा राधा राधा राधा राधा राधा चले आओ अगर उसके कान में पड़ गया है तो उसका मंगल हो जाएगा उसका मंगल होगा तो उसका आपको पुण्य मिलेगा आपका मंगल

हो जाएगा मनुष्य जीवन में एक दूसरे का हित करने के लिए हमको पर हित सरिस धर्म नहीं भाई इससे बड़ा कोई धर्म नहीं हम अपनी भावना में आज इस बात से दुखी होकर के चर्चा करें कि आज हमारे नौजवान लोग माता-पिता का आदर नहीं करते वृद्धों का आदर नहीं करते हो वही धर्म है इसीलिए तो तुम्हें जवान किया हर माता-पिता चाहता कि मेरे एक बच्चा हो जाए बच्ची हो जाए किसलिए कि बुढ़ापे की लकड़ी हो जाएगा वो बुढ़ापे में भोजन दे देगा और धिक्कार उन पुत्रों को जो जवान पट्ठा हुए और घोसा चला रहे माता-पिता पे और उनको निकाल रहे हैं घर से बाहर उनको डरना चाहिए कि कहीं भगवान का डंडा ना उठ जाए नहीं तो किसी काम के नहीं रहोगे व्यर्थ में व्यर्थ में मनुष्य जीवन नष्ट हो जाता है इसलिए बहुत सावधान मनुष्य जीवन का लाभ आप सत्संग में आए आप अपने आचरण सुधार लीजिए आप आचरण सुधार ले यही आशीर्वाद है अगर आचरण ना सुधरा तो चाहे जितना तुम दे ले बाहर कोई आशीर्वाद दे कुछ नहीं होने वाला हमारी बात समझ लेना तुम्हारे कर्म ही तुमको सुख देंगे तुम्हारे कर्म ही

तुमको द जैसे तुम यहां आए तुम्हारे अच्छे कर्म हुए ना अब इसका परिणाम मिलेगा अब जो सुन रहे हो अगर इसको आचरण में उतारो तो इसका और लाभ मिलेगा जैसे यहां आए हो आपका काम बन गया तो आपके कर्म ने बनाया आप संत समागम के लिए आए आप घंटों खड़े रहे आप वहां से चिंतन कि कि मैं जा रहा हूं संत दर्शन के लिए वह सब कर्म बना वह आपका लाभ देगा आपको मंगल देगा उसमें हमारा आशीर्वाद कुछ नहीं आपका कर्म है अच्छा आप यहीं आओ आप निंदा करने लगो आप गलत भावना कर लो तो अभी आपकी हानि शुरू हो जाएगी क्या हुआ आपका कर्म बन गया आप ही अपने कर्म से अपना कल्याण कर सकते हैं आप ही अपने कर्म से अपना नाश कर सकते हैं बस बात इतनी समझनी किसी के आशीर्वाद की जरूरत नहीं आशीर्वाद इसी बात का कि हमसे अच्छे कर्म बन जाए हमारे से दूसरों का हित हो जाए हमें भगवान का चिंतन बन जाए यही आशीर्वाद सबसे बढ़िया

यह पाठ वीडियो के स्वचालित (auto-generated) उपशीर्षकों से लिया गया है — इसमें शब्दों की त्रुटियाँ हो सकती हैं। प्रामाणिक वचन के लिए वीडियो अवश्य सुनें।

मूल वीडियो: Bhajan Marg (YouTube)

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