॥ एकांतिक वार्तालाप ॥
Ekantik Vartalaap · 4161
- अगर एक नाम का इतना बड़ा फल है, तो निरंतर नाम क्यों जपें? — निखिल जी मुंबई से राधा वल्लभ श्री हरिव श्री हरिवंश महाराज जी महाराज जी एक नाम का फल पूरा त्रिभुवन से भी बड़ा है तो फिर निरंतर नाम जप क्यों कहा जाता है क्योंकि एक नाम जिसको कहा…
- जिसका लक्ष्य भगवत् प्राप्ति होता है उसके क्या लक्षण होते हैं? — रस शेखरी शरण जी वृंदावन से महाराज जी जिसका दृढ़ लक्ष्य भगवत प्राप्ति हो गया है उस साधक के क्या लक्षण है नारायण हरि भजन में पांचो न सुहात विषय भोग निद्रा हंसी जगत प्रीत बहु बात ये…
- एकांतिक वार्तालाप एवं दर्शन #1398 — अजय मिश्रा जी पुणे महाराष्ट्र से राधे-राधे राधे-राधे महाराज जी गुरुदेव मैं सभी देवताओं की पूजा करता हूं परंतु मेरी श्री राम जी में श्रद्धा है। मैं श्री राम जी के प्रति एकनिष्ठ…
- पूज्य महाराज जी ने भगवत् गीता पढ़ने के लिए क्या उपदेश दिए? — पुनीत जी, करौली राजस्थान से। राधे-राधे महाराज जी, आपके चरणों में कोटि-कोटि नमन। महाराज जी, मैं अपनी मनोदशा, आध्यात्मिक विकास तथा मानसिक शांति के लिए अह श्रीमद्भगवत गीता को पढ़ना…
- मुझे हर किसी में भगवान दिखते हैं बहुत डर लगता है, क्या करूं? — राधे-राधे महाराज जी आपके चरणों में कोटि-कोटि दंडवत प्रणाम। भगवन मुझे यह जानना है कि मुझे हर किसी में भगवान स्वरूप दिखाई देता है। आप में भी भगवान नजर आते हैं। चींटी में भी हर जगह…
- एकांतिक वार्तालाप एवं दर्शन #1397 — विजय कुमार जी राजस्थान से राधा श्री हरिवंश श्री हरिवंश महाराज जी महाराज जी आपके बल से दिनचर्या नित निरंतर अच्छे से चल रही है वो श्री जी साथ होने का समय-समय पर अनुभव भी कराती हैं…
- चार-पाँच आदमी देखते ही वहीं बैठकर चुगली आदि करने लगता हूँ, यह आदत कैसे छोड़ूं? — भारत भूषण जी हरियाणा से गुरुदेव आपके चरणों में कोटि-कोटि प्रणाम। गुरुदेव मेरी एक बहुत बुरी आदत है कि मैं जहां भी चार पांच आदमी बैठे देखता हूं वहां ही बैठ जाता हूं। इधर-उधर की…
- एकांतिक वार्तालाप एवं दर्शन #1396 — पुनीता जी चंडीगढ़ से राधा वल्लभ श्री हरिवंश श्री हरिवंश महाराज जी महाराज जी आपके चरणों में कोटि-कोटि प्रणाम महाराज जी मैं ऐसा क्या करूं कि नाम जप में दिन प्रतिदिन ध्यान और गहरा…
- भक्त-वेश देखकर लोग हमारी तुलना भक्तों से करने लगें, तो क्या करें? — सोनाली जी चंडीगढ़ से राधे-राधे महाराज जी महाराज जी मेरा प्रश्न यह है कि अक्सर वैष्णव वेश देखकर परिवार वाले बड़े-बड़े भक्तों से कंपेयर करने लगते हैं बड़े-बड़े भक्तों से तुलना करने…
- परिवार में रहते हुए साधक की दिनचर्या एक जैसी कैसे होगी? — शालिनी शुक्ला जी कानपुर से गुरुदेव आपके चरणों में कोटि-कोटि प्रणाम। गुरुदेव आपने कहा कि साधक की दिनचर्या एक सी होनी चाहिए। परंतु महाराज जी प्रभु मैं परिवार जन की सेवाओं के चलते…
- एकांतिक वार्तालाप एवं दर्शन #1395 — मीनाक्षी संदीप जी ऑस्ट्रेलिया से श्री हरिवंश श्री हरिवंश महाराज जी आपके चरणों में कोटि-कोटि नमन महाराज जी पुराने समय में संत महात्मा गृहस्थ जीवन का भी पालन करते थे और मोक्ष…
- दैन्य पर ही कृपा बरसती है तो हमारे अंदर दैन्यता कैसे आए? — हरि ओम कश्यप जी कन्नौज राधा वल्लभ श्री राधे-राधे महाराज जी आपके चरणों में कोटि-कोटि दंडवत प्रणाम। महाराज जी ब्रिज के रसिक संतों ने मुखारविंद से हमने सुना है कि हमेशा श्री जी की…
- क्या सिर्फ भारत में ही जन्म लेने से भगवान मिलते हैं? — वृंदा जी इंग्लैंड से राधे-राधे महाराज जी राधे-राधे महाराज जी महाराज जी इंग्लैंड में रहते हैं ये कह रहे हैं कि पिछले 20 साल से साधन पथ में हैं और पिछले 2 साल से आपको सुन रहे हैं…
- एकांतिक वार्तालाप एवं दर्शन #1394 — डॉक्टर हर्ष तिवारी जी फिरोजाबाद से राधे-राधे महाराज जी महाराज जी इंद्रियों को वश में रखना सुख का मार्ग कहा गया है महाराज जी लेकिन जीवन शैली आजकल खानपान कुछ ऐसा हो गया है कि लोग…
- भगवान की माया, भगवान के शरणागत को भी क्यों परेशान करती है? — नितिन गुप्ता जी राधे-राधे महाराज राधे-राधे महाराज जी महाराज जी मेरा प्रश्न है कि भगवान की माया जो उनके चरणों की शरणागति ले चुके हैं उनको क्यों परेशान करती है सांसारिक व्यक्ति को…
- जब सब ठुकरा दें, तो समझ लेना कुछ बड़ा होने वाला है। — भाई जी महाराज हनुमान प्रसाद पोतदार जी अद्भुत वचन भगवान जिसे अपनाना चाहते हैं उसे सब जगत ठुकराने लगता है। पकड़ो ये जो रोना धोना शुरू कर देते हो कि अब तो हमसे कोई बात नहीं करता। अब…
- एकांतिक वार्तालाप एवं दर्शन #1393 — राधे-राधे महाराज जी महाराज जी मेरी राधा कृष्ण जी में पूर्ण आस्था है। उनमें मैं सखी भाव रखती हूं। महाराज जी नाम जब भी यथासंभव करती हूं। महाराज जी मुझ में घमंड या ईगो नाम जैसी कोई…
- मन विरक्ति की ओर जा रहा है पर पारिवारिक मोह के कारण छोड़ भी नहीं सकता क्या करूँ? — अभिषेक शर्मा जी गाजियाबाद से राधे-राधे राधे-राधे महाराज जी महाराज जी बार-बार मन सांसारिक जीवन से विरक्त होने की तरफ दौड़ रहा है बट पारिवारिक मोह के कारण छोड़ भी नहीं पा रहा और…
- भगवान और देवता में क्या अंतर है? — राजीव जी दिल्ली से राधे-राधे महाराज जी महाराज जी आपके चरणों में कोटि-कोटि प्रणाम महाराज जी भगवान एवं देवता जी में क्या फर्क है? कोई फर्क नहीं एक ही परमात्मा सब रूपों में विराजमान…
- एकांतिक वार्तालाप एवं दर्शन #1392 — राधे-राधे महाराज जी महाराज जी मैं परेशानी मेरी परेशानी से बचने के लिए मैं कई बार झूठ बोलता हूं पर वही झूठ मुझे और बड़ी मुसीबत में फंसा देता है। मेरी इस आदत से मेरी पत्नी मुझ पर…
- प्रेम में कैसे भगवान भक्त के हाथों बिक जाते हैं? — सतीश शर्मा जी श्री हरिवंश महाराज जी महाराज जी वैसे तो संपूर्ण रामायण जी रामचरितमानस एक संपूर्ण आनंददायक अमृत सरोवर है महाराज जी इसमें आप कह रहे हैं कि आपको राम भरत मिलाप और लंका…
- जानिए संत का संग मिला है या सिर्फ भीड़ में बैठे हो? — सत्संग क्या है? जिन भोगों से हमारा अंतःकरण मलिन हुआ, दुष्ट विचार हमारे हृदय में आते थे, उससे हमारा अंतःकरण मलिन हुआ। सत्संग की पहचान है कि तुम्हारा मलिन करने वाला अंतःकरण के जो…
- एकांतिक वार्तालाप एवं दर्शन #1391 — रोहित जी राधे-राधे महाराज जी राधे-राधे महाराज जी महाराज जी आपको इतनी हिम्मत कहां से मिलती है? मैं बात बात पर हार मान जाता हूं। क्या कुछ समझ नहीं आता महाराज जी? माया के द्वारा जब…
- निरंतर प्रयासों के बाद भी सफलता प्राप्त न हो तो क्या करें? — वैभव जी नई दिल्ली से राधे-राधे राधे-राधे महाराज जी महाराज जी निरंतर प्रयासों के बाद भी जब असफलता मिलती रहे तो स्वयं को मोटिव क्या प्रयास करते हो लौकिक ही प्रयास तो करते हो ना…
- अगर की हुई कामना पूरी हो जाए, तो क्या हमारे पुण्य नष्ट होते हैं? — विशाल द्विवेदी जी कानपुर से राधा वल्लभ श्री हरिवंश राधा वल्लभ श्री हरिवंश महाराज जी आपके चरणों में कोटि-कोटि दंडवत प्रणाम गुरुदेव क्या कामना की पूर्ति होने पर पुण्य नष्ट होते हैं…
- एकांतिक वार्तालाप एवं दर्शन #1390 — श्री कुमार जी अमेरिका से राधेधे राधे-राधे महाराज जी महाराज जी देह भाव त्यागने के लिए विधि क्या है और जिसने त्याग दिया है देह भाग उसका लक्षण क्या है बाहरी लक्षण से नहीं समझ सकते…
- पैसे की कोई कमी नहीं है, पर मन बहुत अशांत है और जीवन में उथल-पुथल बनी रहती है। — डॉक्टर प्रमोद कुमार जी राधे-राधे राधे-राधे महाराज जी महाराज जी मैं एक मल्टीीनेशनल कंपनी में सीईओ हूं महाराज जी आर्थिक रूप से कोई भी परेशानी नहीं है लेकिन मन बहुत अशांत रहता है…
- महाराज जी ने बताई भगवान की सबसे बड़ी कमजोरी का रहस्य — कलयुग की चाल से बचने के लिए जिते विनायक शुभ शुभ विघ्न करे नहीं कोई विघ्न करे नहीं कोई डरे कलिकाल कष्ट भय हरे सकल संताप हरस हरि नाम जपत जय विजय को प्राप्त होता है भगवान नाम जापक…
- एकांतिक वार्तालाप एवं दर्शन #1389 — विराली जी सूरत से महाराज जी आपके चरणों में कोटि-कोटि प्रणाम महाराज जी भक्ति का मतलब है स्वीकृति और समर्पण मतलब जो परिस्थिति आए उसे स्वीकार करना और ठाकुर जी श्री जी की शरण में…
- "नाम जप करना कठिन, करके बचाना कठिन और बचा के पचाना कठिन" इसका अभिप्राय क्या है? — कर्मवीर जी चंडीगढ़ से राधा वल्लभ श्री हरिवंश राधा वल्लभ श्री हरिवंश महाराज जी महाराज जी नाम जप करना कठिन नाम जप बचाना कठिन नाम जप पचाना कठिन महाराज जी इसका अभिप्राय समझना चाह रहे…
- जब पूरा संसार ही स्वप्न है तो नींद में कौन है और स्वप्न कौन देखता है? — अमोल पवार जी महाराष्ट्र से राधे-राधे राधे-राधे महाराज श्री जय श्री हरि विट्ठल भगवान महाराज जी आपके चरणों में कोटि-कोटि प्रणाम महाराज जी मैं अज्ञानी यह समझ नहीं पा रहा हूं कि जब…
- एकांतिक वार्तालाप एवं दर्शन #1388 — प्रतीक जी महाराष्ट्र से श्री हरिवंश गुरु जी श्री हरिवंश महाराज जी महाराज जी जैसे कि आपने काफी बार बताया है कि हमारे संचित पुण्य और पाप के अनुसार हमारे वर्तमान में सुख और दुख का…
- सेवा का कार्य करते हुए क्रोध भी करना पड़ता है, यह कितना उचित है? — कविता अग्रवाल जी राधावल्लभ श्री हरिवंश महाराज जी महाराज जी आपका कहना है कि आप बहुत सारी संस्थाओं में जुड़े हैं जहां सेवा कार्य इनको करना पड़ता है। फिर जब इनको सेवा कार्य मिलता है…
- नाम जप से हृदय जलता है, तो पाप नष्ट होते हैं। पर मुझे तो बिल्कुल जलन नहीं हो रही। — मनीषा कौशिक जी चेन्नई से राधे-राधे महाराज जी महाराज जी आपके चरणों में कोटि-कोटि प्रणाम महाराज जी आपके श्री मुख से सुना है कि नाम जप करने से हृदय जलता है तो पाप नष्ट होते हैं…
- एकांतिक वार्तालाप एवं दर्शन #1387 — मयंक गोयल जी राधे राधे गुरु जी महाराज जी आपके चरणों में दंडवत प्रणाम महाराज जी क्या ये अनिवार्य है कि जब श्री कृष्ण किसी से अधिक प्रेम करते हैं तो वह उस व्यक्ति के एक-एक करके…
- "भक्त को अपनी सारी इच्छाएँ खत्म कर देनी चाहिए", इसका सही अर्थ क्या है? — नितीश कुमार दुबे जी बेंगलुरु से राधे-राधे महाराज राधे-राधे महाराज जी महाराज जी एक बार आपने अपने प्रवचन में बताया था कि भक्त को अपनी सारी इच्छा समाप्त कर देनी चाहिए भक्त को जाना…
- हर 5 मिनट में यह करो, जीवन बदल जाएगा — जब साधक हृदय से भगवान को पुकारता है, भगवान का नाम जप करता है, तो उसके हृदय में बैठे ही भगवान सुन रहे हैं। सर्वतः श्रुतिमन लोके दसों दिशाओं में भगवान के कान है। कहीं भी पुकारो वे…
- एकांतिक वार्तालाप एवं दर्शन #1386 — राधे-राधे राधे-राधे महाराज जी महाराज जी लगभग पिछले 37 वर्षों से पूज्य गुरुदेव द्वारा मार्गदर्शन में साक्षी व स्वयं साधना में अभ्यास रत हूं। कभी विचार दशा में व कभी भाव दशा में की…
- क्या मैं अपना नाम जप आपको दे सकता हूँ जिससे आपका स्वास्थ्य ठीक हो जाए? — दिनेश जी, हैदराबाद से श्री हरिवंश महाराज आपके चरणों में कोटि-कोटि नम गुरुदेव आपने कहा था कि हम जो नाम जप करते हैं वह हम किसी को भी दे सकते हैं। तो क्या मैं वो नाम जप के महाराज जी…
- भगवान ने कहा है कि वो सबके हृदय में रहते हैं, तो यह हृदय कहाँ पर होता है? — राजेश मिश्र जी जी पूज्य महाराज जी राधे-राधे महाराज श्री भगवत गीता में श्री कृष्ण भगवान जी ने कहा है कि मैं स्वयं सभी प्राणियों के हृदय में विद्यमान हूं या हृदय शरीर के अंग के लिए…