मुझे मरने से डर लगता है ! यह डर कैसे खत्म होगा ?
पूज्य महाराज जी का एक संक्षिप्त वचन — पूरा सुनने के लिए ऊपर वीडियो देखें।
पूरा प्रवचन
मरने का डर कैसे खत्म हो कृपया करके आप हमें बताइए आप तो मरने वाले नहीं है और शरीर बचेगा नहीं ये जब दो बातें समझ में आ जाती है तो निर्भयता आ जाती है यह निश्चित मरेगा शरीर ये विनाशी है और आप अविनाशी हो तुम्हें मृत्यु मार नहीं सकती नैनम छिंदंति शस्त्राणि नैनम ति पाव का न चैन क्लेन तप न शोष मार्का अब क्या है अपने स्वरूप को भूलकर हम शरीर पर राग कर बैठे हैं और हम है अविनाशी और यह है मरण धर्मा और यह मरेगा और ये मैं हूं ऐसा भ्रम हो गया इसलिए मुझे डर लग रहा है तो डर क्यों लगता है क्योंकि हम शरीर को मैं मान लिए और शरीर से भोग भोग रहे हैं तो हमें लग रहा है शरीर छूटा तो मैं मरा शरीर छूटा तो मेरा सारा सुख गया ये अज्ञान के कारण इसी अज्ञान को मिटाने के लिए अध्यात्म गरज रहा है मरने का डर तो अज्ञान है बच्चा मरना तो है ही नहीं क और कुछ नहीं मरता बच्चा शरीर भी नहीं मरता ये अपने अपने तत्व में लीन हो जाता है जैसे जल तत्व जल में अग्नि तत्व अग्नि में वायु तत्व वायु में आकाश तत्व आकाश में पृथ्वी तत्व पृथ्वी
में और अविनाशी आत्मा उसको तो मरना मरना क्या है एक रूप परिवर्तन उसी को हम मृत्यु कहते हैं एक शरीर को छूटना और उस शरीर को अपने-अपने तत्त्वों में मिल जाना इसी को मृत्यु कहते हैं कोई मृत्यु नहीं है
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मूल वीडियो: Bhajan Marg (YouTube)
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