दिक्षा के लिए प्याज छोड़ दिया है, पर याद आती है।
पूज्य महाराज जी का एक संक्षिप्त वचन — पूरा सुनने के लिए ऊपर वीडियो देखें।
पूरा प्रवचन
साधक आए थे वो गृहस्थ में रहते थे कह रहे लहसुन प्याज क्योंकि वैष्णव पद्धति में भोग नहीं लगाया जाता तो कह रहे लहसुन प्याज छोड़ तो दिया एक साल में बट जो प्याज की याद आती है ना मतलब वो मतलब वो क्रिच क्रिच वो सलाद में जैसा होता था भगवान की याद नहीं आती प्याज की मतलब वो वो जात भूलती नहीं है यार अगर प्याज य काटा जाए तो दुर्गंध हो जाएगी ल हो जाए कहते हैं कि क्या बात है मतलब छोड़ तो दिया बट वो जब उसकी याद आती है ना मतलब सारा बिरह बिरह स तो अगर ज्ञान हो जाए बच्चा तो इन इंद्रियों पर फिर काबू करने में सरलता हो जाए अज्ञान मिटाने के लिए सत्संग सुनो नाम जप करो और दूसरों की सेवा की भावना रखो तो अपने आप अपनी आसक्ति खत्म हो जाएगी आपको सच्ची बताएं कोई इच्छा नहीं ना जीने की ना मरने की ना खाने की ना पीने की कोई मतलब जैसे होता है ना कि कुछ तो कुछ शून्य अंदर
यह पाठ वीडियो के स्वचालित (auto-generated) उपशीर्षकों से लिया गया है — इसमें शब्दों की त्रुटियाँ हो सकती हैं। प्रामाणिक वचन के लिए वीडियो अवश्य सुनें।
मूल वीडियो: Bhajan Marg (YouTube)
संबंधित
- चंदन की तरह बनो, कुसंग का विष मत अपनाओ! — अगर तुम्हें सत्संग मिलता है तो कुसंग भी अपना प्रभाव दिखाने की कोशिश करेगा। आपकी निष्ठा, आपकी भावना इतनी सुरक्षित होनी चाहिए कि किसी का भी कुसंग का प्रभाव हमारे मन पर ना पड़े। जो…
- अन्न का ऐसा गहरा प्रभाव कि संत से भी हो गई चोरी! — एक परमहंस जी जंगल में रहते थे। राजा गए। बहुत दिन पीछे पड़े। निमंत्रण दिया चलो महाराज महल में गए। प्रसाद पाया। अब वो राज वैभव का प्रसाद जंगल में आए तो उनको गुलहरी पिपरी ये सब…
- जिससे प्रेम होता है, उसकी हर चीज़ प्यारी लगती है — जब हम किसी को अपना मानते हैं तो बार-बार उसकी चर्चा करने में, बार-बार उसकी चर्चा सुनने में और वह गली भी प्यारी लगती है जिसमें अपना प्यारा रहता है और उसके पड़ोसी भी प्यारे लगते…
- भगवान कब मिलते हैं? हर साधक को जानना चाहिए | Shri Hit Premanand Govind Sharan Ji Maharaj — एक बार नारद जी महाराज भ्रमण करते हुए जा रहे थे तो कुछ समीप पे एक बट वृक्ष के नीचे महात्मा भजन कर रहे थे एक पीपल के नीचे भजन कर रहे थे तो नारद जी को प्रणाम करके बट वृक्ष वाले…
- मौका बार-बार नहीं मिलता.. कहीं देर न हो जाए! — यह जितनी भी गंदी बातें हैं मदिरापान करना, मांस खाना, जुआ खेलना, व्यभचार करना यह सब महापाप है। बुद्धि को भ्रष्ट कराकर ऐसे जीव को नष्ट हो जाता। यह समझ में नहीं आता। मनुष्य शरीर…
- माँगी हुई हर चीज़ क्यों नहीं मिलती, क्या वजह है? — मां के पास गए हमें इतने रुपए दीजिए नहीं हमें चाहिए इतने नहीं देंगे नहीं देंगे नहीं देंगे तो बदमाश बर्बाद करेगा तो यह बात मां से ही हो सकती है दूसरे से नहीं हो सकती आप दूसरे से…