मृत्यु का विचार आ गया था, लेकिन आपके सत्संग ने बचा लिया।
पूज्य महाराज जी का एक संक्षिप्त वचन — पूरा सुनने के लिए ऊपर वीडियो देखें।
पूरा प्रवचन
महाराज जी जीवन इतना थक चुका था कि मृत्यु को वर्ण कर लूं या घर त्याग दूं ये इच्छाएं प्रबल होने लगी थी परंतु तभी आपके सानिध्य ने बताया कि आपके जीवन के छोटे से छोटे और बड़े से बड़े दुख आपके पूर्व जन्म का कारण जो सुख और दुख रूप में आया है उसको सहते हुए निकल जाओ महाराज जी ये कह रहे हैं कि हे अर्जुन उठाओ और युद्ध करो बार-बार ये अंदर से आपके सत्संग थोड़ी उठा ना रे पास गाडी है क्या अपने विवेक रूपी धनुष पर ज्ञान रूपी बाण चढ़ा के लक्ष्य को भेद ज्ञानी बनो अज्ञान में क्यों परेशान होते हो महाराज जी कई लोग ऐसे जुड़ जाते हैं जो अंशिता उनकी षडयंत्र करने की होती है बाद में लगता है कि पता चलता है कि षडयंत्र के अनुसार हमसे जुड़ा है फिर वृद्धि ऐसी आती है कि ये आपको ऐसा समझ रहा है कि आप कुछ भी नहीं कर सकते इच्छा थोड़ी सी ऐसी होती है कि इसके साथ कुछ करा जाए फिर अंदर से आता है कि नहीं क्या पता ये तेरे कर्म है हा यही बुद्धिमान यही बुद्धिमानी है व हमारे कर्म का मार्जन करने आता है व षडयंत्र के द्वारा कुछ नहीं
बिगाड़ सकता उतने बिगड़ेगा जितना हमारा बिगड़ना चाहिए तो बिगड़ता या कोई बिगड़ता तो बिगड़ नहीं था तो यही तो हम कह रहे उठा अर्थात विवेक और ज्ञान का लक्ष्य देखो ज्ञान चढ़ाया तो परास्त हो गया वो तुम्ह नहीं परास्त कर पाया और नहीं तुम लड़ जाते या मार पीट देते तो आप परास्त हो जाते 15 साल पहले मांच तो नहीं अंडा करता था लेकिन अंदर से आवाज आ की किसी की हत्या करके अगर तुमने कुछ प्राप्त करा तो वो नहीं उसे त्यागा फिर मित्रता कुछ अभी क्या छोड़ना अभी महाराज जी कभी कभी उन चीजों में जाते हैं पर तड़पता बहुत आत्मा बहुत ती है तो आज होली यहां वृंदावन की शुरू हो गई आज से आज होली में सहा कर दो मैं व छोड़ता हूं कभी नहीं करूंगा ठीक है बढ़िया अच्छे आदमी बन जा
यह पाठ वीडियो के स्वचालित (auto-generated) उपशीर्षकों से लिया गया है — इसमें शब्दों की त्रुटियाँ हो सकती हैं। प्रामाणिक वचन के लिए वीडियो अवश्य सुनें।
मूल वीडियो: Bhajan Marg (YouTube)
संबंधित
- चंदन की तरह बनो, कुसंग का विष मत अपनाओ! — अगर तुम्हें सत्संग मिलता है तो कुसंग भी अपना प्रभाव दिखाने की कोशिश करेगा। आपकी निष्ठा, आपकी भावना इतनी सुरक्षित होनी चाहिए कि किसी का भी कुसंग का प्रभाव हमारे मन पर ना पड़े। जो…
- अन्न का ऐसा गहरा प्रभाव कि संत से भी हो गई चोरी! — एक परमहंस जी जंगल में रहते थे। राजा गए। बहुत दिन पीछे पड़े। निमंत्रण दिया चलो महाराज महल में गए। प्रसाद पाया। अब वो राज वैभव का प्रसाद जंगल में आए तो उनको गुलहरी पिपरी ये सब…
- जिससे प्रेम होता है, उसकी हर चीज़ प्यारी लगती है — जब हम किसी को अपना मानते हैं तो बार-बार उसकी चर्चा करने में, बार-बार उसकी चर्चा सुनने में और वह गली भी प्यारी लगती है जिसमें अपना प्यारा रहता है और उसके पड़ोसी भी प्यारे लगते…
- भगवान कब मिलते हैं? हर साधक को जानना चाहिए | Shri Hit Premanand Govind Sharan Ji Maharaj — एक बार नारद जी महाराज भ्रमण करते हुए जा रहे थे तो कुछ समीप पे एक बट वृक्ष के नीचे महात्मा भजन कर रहे थे एक पीपल के नीचे भजन कर रहे थे तो नारद जी को प्रणाम करके बट वृक्ष वाले…
- मौका बार-बार नहीं मिलता.. कहीं देर न हो जाए! — यह जितनी भी गंदी बातें हैं मदिरापान करना, मांस खाना, जुआ खेलना, व्यभचार करना यह सब महापाप है। बुद्धि को भ्रष्ट कराकर ऐसे जीव को नष्ट हो जाता। यह समझ में नहीं आता। मनुष्य शरीर…
- माँगी हुई हर चीज़ क्यों नहीं मिलती, क्या वजह है? — मां के पास गए हमें इतने रुपए दीजिए नहीं हमें चाहिए इतने नहीं देंगे नहीं देंगे नहीं देंगे तो बदमाश बर्बाद करेगा तो यह बात मां से ही हो सकती है दूसरे से नहीं हो सकती आप दूसरे से…