तौर्थयात्रा के दौरान मासिक धर्म आ जाए तो क्या दर्शन कर सकते हैं?
पूज्य महाराज जी का एक संक्षिप्त वचन — पूरा सुनने के लिए ऊपर वीडियो देखें।
पूरा प्रवचन
महाराज जी जैसे हम लोग यात्राओं में जाते हैं तो बहुत सारी महिलाएं जो आती है हमारे पास फिर वो मासिक धर्म वगैरह हो जाता है तो उस अवस्था में वो लोग क्या करें कि वो दर्शन करें या ना करें दर्शन करने का सौभाग्य तो नहीं छोड़ना चाहिए क्योंकि मासिक धर्म एक सारी शरीर की प्रक्रिया है जो प्रत्येक माताओं बहनों के शरीर में स्वाभाविक आती है महीने में एक बार आती है अब वो अचानक ऐसी स्थिति आ गई है और बार-बार आना जाना हो नहीं सकता तो हमें लगता है कि स्नान करके और भगवत प्रसाद चंदन जला आदि छिड़ करके भगवत दर्शन कर लेना चाहिए दूर से ना कोई सेवा सामग्री देनी चाहिए और ना वहां स्पर्श करना चाहिए दूर से दर्शन तो कर ही लेना चाहिए पता नहीं जिंदगी में दोबारा आना हो कि ना आना हो और ये मासिक धर्म कोई ऐसा नहीं कि बहुत निंदनीय बात हो बहुत वंदनीय बात है माताओं ने देवराज इंद्र की ब्रह्म हत्या को अपने ऊपर लिया है देवराज इंद्र त्रिभुवन पति है और उनके द्वारा ब्रह्म हत्या बनी वृता असुर के मारने की तो उस ब्रह्म हत्या को ब्रह्म
ऋषियों ने विभाजित किया पहले नदी को दिया जो फेन बुदबुदा के रूप में ऊपर होता है दूसरा वृक्षों को दिया जो गोंद के रूप में होता है तीसरा भूमि को दिया जो उर भूमि के रूप में होता है चौथा माताओं बहनों को दिया जो मासिक धर्म के रूप में होता है तो ये इनकी वंदना है कि इन्होंने त्रिभुवन पति ब्रह्म ऋषियों की हत्या को इन्होंने अपने ऊपर लिया है इन्होंने थोड़ा अपराध किया है नहीं हम इस बात में स्वीकृति क्योंकि इतनी मेहनत करके किसी भी धाम में कोई कोई अर्थ की बहुत समस्या से जूझ करके जाता है कोई शरीर की समस्या से जूझ के अब वह इस बात से केवल वंचित कर दिया जाए कि हां तो इसलिए हमें लगता है कि उनको यह सौभाग्य मिलना चाहिए
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मूल वीडियो: Bhajan Marg (YouTube)
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