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भगवान किस प्रकार के भाव को स्वीकार करते हैं?

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पूज्य महाराज जी का एक संक्षिप्त वचन — पूरा सुनने के लिए ऊपर वीडियो देखें।

पूरा प्रवचन

बिहारी जी के जो डलिया लगाते हैं ना इनसे रात्रि में फूल मांगते जाकर के तो दो-दो फूल दे देते और वही जाकर रोते हुए कि हम गरीब भिक्षुक प्रभु हम आपके लिए क्या सैया लगावे तो ऐसे ऐसे तोड़ के फूल दो चार और ऐसे करके और जब श्री जी को सहन कराते तो ऐसा हृदय में लगता साक्षात श्री जी सहन कर रहे क्योंकि एक दन्य भाव था एक पैसा पास नहीं मांग कर फूल लाए तो जो भाव बनता था ना कि मुझ गरीब की प्रभु सेवा स्वीकार करो तो भाव भाव अगर आप चार गुलाब के फूल लिए और चार पंखुड़ी ऐसे डाल दिए और भावना की कि प्रिया प्रीतम की मैंने सैया लगाई तो प्रभु सैया को स्वीकार करते हैं।

गर्मी का समय था। ठाकुर जी की सेवा करके शयन करा के जयमल जी गए तो ऊपर छत पर गए बंगले पर अपने राजा थे। तो हवा आ रही शीतलता उनके मन में आया यार ठाकुर जी को नीचे शयन करा के हम ऊपर से हवा ले रहे हैं। ये तो ठीक नहीं। तो ठाकुर जी के लिए अलग महल बनवाया। और ऊपर जैसा अपना बंगला वैसे सब खिड़की से हवा आ रही। सब ऐसे पूरा राज दरबार की तरह जाली पड़ी हुई और गद्दा लगा हुआ शयन कक्ष पूरा शीतल कक्ष बनवाया। शीतल और रोज शाम के जाकर के प्रिया प्रीतम का शयन कराते जो श्री विग्रह था चरण दबाते और शयन करा के आते और सीढ़ी हटा देते कि कोई वहां पहुंच ना पावे उनकी पत्नी ने विचार किया ये क्या चक्कर है?

रोज सीढ़ी लगाकर ऊपर जाते अलग महल से पूछ सकती नहीं भयवश। उनका कुछ ना कुछ तो गड़बड़ है। जब वो सो गए तो सीढ़ी लगाया ऊपर गए तो उन्हें मूर्ति नहीं दिखाई दी। साक्षात प्रिया प्रीतम सोते हुए दिखाई दिए।

यह पाठ वीडियो के स्वचालित (auto-generated) उपशीर्षकों से लिया गया है — इसमें शब्दों की त्रुटियाँ हो सकती हैं। प्रामाणिक वचन के लिए वीडियो अवश्य सुनें।

मूल वीडियो: Bhajan Marg (YouTube)

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