जब भगवान बने भक्त के नौकर !
पूज्य महाराज जी का एक संक्षिप्त वचन — पूरा सुनने के लिए ऊपर वीडियो देखें।
पूरा प्रवचन
एक श्रीराम नाम के भक्त हुए हैं। वह मुगल बादशाह के खजानची थे। पर बड़े दयालु थे और भगवान का निरंतर नाम जप करते रहते थे। उनसे जैसे कोई कहता मेरी बेटी का ब्याह है तो बादशाह तो आदेश करेगा नहीं। वो चुपचाप खजाने से दे देते। आधा खजाना खाली हो गया। काजियों ने जब यह पता पाया तो बादशाह से शिकायत की और कहा तुमने अपराध किया? बोले हां अगर प्रजा से ही कर्ज लिया जाता है और अगर उन्हीं को जरूरत पड़ गई तो उनको देने में अगर अपराध मानते हैं तो मैंने अपराधी किया है। तो काजियों से पूछा इनको क्या सजा मिलनी चाहिए?
तो उनका फांसी की सजा मिलनी चाहिए। उन्होंने कहा तुम्हारी अंतिम इच्छा क्या है? उन्होंने कहा एक बार दर्शन करा दीजिए विट्ठल भगवान के। तो सामने गए और कहा आप राजी हो? अगर आप राजी हो तो हम राजी हैं। इधर यह विट्ठल भगवान के दर्शन करने गए उधर विट्ठल भगवान पहुंच गए। बादशाह के आगे ऐसे रत्न फेंके और कहा देख तेरे पूरे खजाने की कीमत एक रत्न में नहीं होगी। रख ले अपने खजाने में। उनका कहा हो कौन? उनका कहा मैं नौकर हूं श्रीराम का। बोले तुम्हारा नाम क्या है? बोले बिट्ठू विट्ठल भगवान थे और बोले तुरंत हुकुम कर कि मेरे मालिक को फांसी से मुक्त किया जाए।
तुरंत घोड़े दौड़ाए और वो उधर आदेश देने लगे। इधर भगवान अंतर्ध्यान हो। अब वो रूप माधुरी, वो बोलने की कला उसका तो हृदय छीन गया था। जब श्री राम को सामने बुलाया तो उनका एक बार अपने नौकर से मिला दो। उन्होंने कहा हम तो आपके नौकर हमारा कौन नौकर है? उनका नहीं वो कह रहा था बिट्ठू नाम है और श्याम रंग का था। बस उनके आंसू आने लगे कि अरे यह मेरे प्रभु की लीला
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मूल वीडियो: Bhajan Marg (YouTube)
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