किस रूप में करें भगवान का ध्यान?
पूज्य महाराज जी का एक संक्षिप्त वचन — पूरा सुनने के लिए ऊपर वीडियो देखें।
पूरा प्रवचन
ये मोदी जी के भाई हैं। इनको दर्शन की बहुत अभिलाश है। बहुत क्योंकि मां के साथ रहने का मुझे सौभाग्य प्राप्त हुआ था। हां और दो साल पहले शरीर छोड़ देना था। जी नहीं बहुत सुंदर और नाम जप करते रहिएगा। नाम जप कर खूब नाम जप कीजिएगा। भगवत आराधना ही जीवन का परम लाभ है। हम अलग-अलग मंदिर में जाते हैं तो भगवान का स्वरूप अलग-अलग होता है। तो ध्यान भजन करते हैं तो कंफ्यूजन होता है। इसको समाधान इसमें क्या है कि आचार्य परंपरा से जब हम जुड़ते हैं तो जैसे अब हम हैं तो हम जाए कहीं भी लेकिन हम ध्यान करेंगे राधा वल्लभ जी का क्योंकि हरिवंश महाप्रभु के हम शिष्य हैं और राधा वल्लभ जी हमारे इष्ट हैं।
तो अब जैसे कोई स्वामी हरिदास जी का है तो बाकी भी हरि का ध्यान करेगा। अब जैसे आप नहीं जुड़े हैं तो आपको मान लेना चाहिए कि मेरे बांके बिहारी जी तो दर्शन सब जगह करो लेकिन ध्यान बिहारी जी का करो ऐसे चला जाता है भगवान के मार्ग में एक जगह कहीं अपनी निष्ठा कर ली जाती है और फिर सतार्ग में चला जाता
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मूल वीडियो: Bhajan Marg (YouTube)
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