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कर्म प्रधान जीवन में भगवान की भूमिका क्या है?

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पूज्य महाराज जी का एक संक्षिप्त वचन — पूरा सुनने के लिए ऊपर वीडियो देखें।

पूरा प्रवचन

महाराज जी अगर हमारा जीवन कर्मों से बना है तो उसमें भगवान की क्या भूमिका है? हम कहते हैं सब कुछ भगवान की कृपा से होता है। उनकी कृपा के बिना पत्ता भी नहीं हिलता। हमारी अच्छी सोच भी उनसे आती है। तो फिर हमारे तो सबसे पहले आपको किसने कर्म ने उत्पन्न किया या भगवान ने? भगवान ने। ठीक है। कर्मों का विधान किसने बनाया? भगवान ने। ठीक है। आपको मनुष्य जन्म किसने दिया? भगवान ने। कर्म से नहीं कह सकती। क्योंकि भैंस बनकर, कुत्ता बनकर, सूअर बनकर हमने ऐसे कर्म नहीं किए कि सर्वोत्तम मनुष्य देह प्राप्त किए।

इसके लिए आता है शास्त्र में कबहु का करुणा नर देह देत इस बिन हेत सनेह। कभी कृपा करके भगवान मनुष्य शरीर देते हैं। संस्कृति माज बरियाई के पायो मानुष देह वथाकत डारत संस्कृति के चक्र को रोक कर बीच से निकाल लिया और भगवान ने कृपा कर मुझे मनुष्य जन्म दिया अब अपना उद्धार कर लो आप यहां वृंदावन आई अपने कर्म से नहीं श्री राधिका कृपा बिनु सबके मनन अगम किशोरी जी की कृपा से आई आप साधु संग प्राप्त किए अपने कर्म से नहीं अब मोह भाव भरोस हनुमंता बिनु हरि कृपा सब कुछ ये जो भागवतिक मिल मिल रहा है।

यह भगवान की कृपा से मिल रहा है। इसमें हमारे कर्म नहीं।

यह पाठ वीडियो के स्वचालित (auto-generated) उपशीर्षकों से लिया गया है — इसमें शब्दों की त्रुटियाँ हो सकती हैं। प्रामाणिक वचन के लिए वीडियो अवश्य सुनें।

मूल वीडियो: Bhajan Marg (YouTube)

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