क्या Movies देखना पापकर्म माना जाता है?
पूज्य महाराज जी का एक संक्षिप्त वचन — पूरा सुनने के लिए ऊपर वीडियो देखें।
पूरा प्रवचन
नाम जप करते समय अब जैसे कि डेली आपसे जब से जुड़े तब नाम जब जुड़ा है तो महाराज जी कोई मूवी या कुछ देखने में भी आजकल डर लगता है कि कोई इसी से कोई पाप तो ना हो जाए। कभी मूवी देख भी लेते तो ऑटोमेटिक अंदर से नाम जप चलना शुरू हो जाता है। हां बिल्कुल ये बहुत कृपा है। महाराज जी कभी अगर गृहस्ती जीवन में कोई चीज देख भी ले कोई मूवी हो गया कोई फिल्म हो गया कोई पाप तो नहीं नहीं नहीं कोई पाप नहीं है। पर काहे को मन को हम गंदा करें? बस यह चीज समझना है। मन में ऑटोमेटिक डर लग जैसे मूवी में कोई चीज हमको पसंद आ गई कोई गंदी बात तो मन पकड़ लेगा।
अब जब आप भजन में बैठोगे तो गंदी बात फेंकेगा। तो हमको चाहिए कि अपने मन को अच्छी बातें पकड़ावे। गंदी बातों से बचावे। कोई बोलता है मूवी देखने चलते तो डर लगता है कि नहीं कहीं नाम जब कम हो जाएगा। दो घंटे हां चाहिए। ऐसा ही चाहिए कि संसार के दृश्यों को देखने से बचे। कि मनुष्य स्वतः ही उन चीजों में ज्यादा रुचिकर क्यों महसूस करता है? क्योंकि उन्हीं का बना हुआ है ना। प्रकृति का बना हुआ है ना तो प्रकृति में ही उसका रुझान है। जैसे पानी कहीं भी छोड़ो वो नीचे की तरफ जाएगा ढलान की तरफ जाएगा तो मन को छोड़ो वो गंदी बातों में जाएगा।
ऊपर कैसे चढ़ाएं? जैसे पानी को ऊपर चढ़ाने के लिए यंत्र की जरूरत होती है। ऐसे मन को ऊपर चढ़ाने के लिए मंत्र की जरूरत होती है। खूब मंत्र जपो, नाम जप करो।
यह पाठ वीडियो के स्वचालित (auto-generated) उपशीर्षकों से लिया गया है — इसमें शब्दों की त्रुटियाँ हो सकती हैं। प्रामाणिक वचन के लिए वीडियो अवश्य सुनें।
मूल वीडियो: Bhajan Marg (YouTube)
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