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कामदेव की माया ने कैसे ऋषि की तपस्या नष्ट की?

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पूज्य महाराज जी का एक संक्षिप्त वचन — पूरा सुनने के लिए ऊपर वीडियो देखें।

पूरा प्रवचन

एक बार एक जंगल में ऋषि रहते थे तो 12 वर्ष उन्होंने वृक्ष के सूखी छाल की पपड़ी पाकर के और कठिन भजन किया। अब तो महा तेजस्वी हो गए। एक दिन काम प्रकट हुआ और कहा क्या तुम समझते हो कि तुमने काम पर विजय प्राप्त कर ली? तो उनका एक काम क्या हजारों काम पर विजय प्राप्त कर चुका हूं। तो बोले महाराज अब मैं अपने बाण संधान करता हूं और आप संभालो अपने को। तो उनका कहा जाओ नहीं तुम्हें भस्म कर दूंगा। इतना कहकर चले गए। अब जहांजहां वो पपड़ी खाते थे वहां वहां हलवा घी का ऋषि ने जब देखा कि वृक्षों के जितने वृक्ष उस जंगल में सब में हलवा लगा हुआ तो उन्होंने कहा मेरे तप से भयभीत होकर वृक्ष हमें लगता है कोई स्वादिष्ट पदार्थ देने लगे अब वो खाने लगे अब दसो वृक्ष से जब पाया तो आधा किलो हलवा तो गया ना तो हड्डी के ऊपर मांस बढ़ना शुरू हुआ महीना हुआ एक दिन छमम छमम छमम छमम पायल करती हुई और एक कटोरा लिए हुए जे ही देखा ऋषि किसी आ रहे तो ऐसे हलवा लगा के भागो।

उन्होंने कहा ए खड़ी हो जाओ। तुम कौन हो? क्या ये स्वादिष्ट पदार्थ तुम लगाती थी? कहा हां महाराज तो भाग क्यों रहे हो? मैं आपके तप से भयभीत हूं। बोले नहीं नहीं नहीं महीनों से इतना स्वादिष्ट पदार्थ पवार क्योंकि पहले अन्न जाएगा तो बुद्धि बदलेगी। तुम इतना स्वादिष्ट पदार्थ पवार रहे। तुम भयभीत क्यों हो रही हो? बोले महाराज वृक्ष में चुपचाप इसलिए लगा जाती थी कि आपकी सेवा बन जाए। मैं आपकी सेवा करना चाहती हूं। बोले लाओ कटोरा वृक्ष में लगाने की जरूरत नहीं है। अब रोज कटोरा लेके तुम ले आ जाना मैं इस कुटिया में रहता हूं।

कटोरा लेकर आ जाने। हमने चैलेंज किया था मैं अपना बाण संधान कर रहा हूं। तुम सावधान फिर एक दिन पूछा तुम इस जंगल में क्यों रहती हो? तो उन्होंने कहा मेरी मां तपस्विनी है तो मैं अपनी मां के साथ रहती हूं। तो आखिरकार तुम्हें ब्याह तो करना ही पड़ेगा। कहा ये तो मां का विषय है। मेरा विषय तो है नहीं। ये तो मां जाने। तो बोले मां से बात करके आप कल आना। बोले अवश्य दूसरे दिन पधारी महाराज मैं निराश हूं ब्याह नहीं हो सकता बोले क्यों निराशा क्यों बोले मां ने एक शर्त रखी है कि अपना मुंह काला करके मुझे पीठ में बैठाल कर और अपनी कुटिया से और मेरी मां की कुटिया तक आपको घुटनों के बल चलना पड़ेगा और मैं आपके पीठ में और ऐसा मैं आपसे करवाना नहीं चाहती।

कहा अगर संध्या काल में ये काम हो जाए तो बोले काल कोई भी हो लेकिन आपको ये करना पड़ेगा अगर ब्याह करना है महाराज राजी हो गए मुंह काला किया पीठ पर बैठाला घुटने के बल चले जब वहां पहुंचे तो काम खड़ा था उसने कहा ये मेरी रची हुई माया है मैं ही हूं इसका स्वामी बोल तेरी तपस्या कहां गई ये कहो कि मैं तेरी तपस्या नष्ट नहीं की केवल केवल दिखाया है तुझे कि अगर तू तपस्या का अहंकार करेगा तो देख घुटले केवल चल रहा मेरी माया तेरे पीठ पर बैठी हुई है। यह मन बड़े-बड़े ऋषि मुनियों को मोहित कर दिया।

हम तुम तो बहुत छोटे लोग हैं। बहुत छोटी सामर्थ है। इसलिए भगवान का आश्रय ले लो। भगवान जिसकी रक्षा करते हैं, वही अपनी धर्म से पवित्रता से चल सकता है।

यह पाठ वीडियो के स्वचालित (auto-generated) उपशीर्षकों से लिया गया है — इसमें शब्दों की त्रुटियाँ हो सकती हैं। प्रामाणिक वचन के लिए वीडियो अवश्य सुनें।

मूल वीडियो: Bhajan Marg (YouTube)

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