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सूरदास जी का पद सुनाते-सुनाते महाराज जी हो गए भाव विभोर !

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पूज्य महाराज जी का एक संक्षिप्त वचन — पूरा सुनने के लिए ऊपर वीडियो देखें।

पूरा प्रवचन

सूरदास जी कहते हैं सुर कहा द्विद आंधरो बिना मोल को भगवान में बिक जाना कोई कामना ना होना भगवान के सिवा हमारा कोई है नहीं ऐसा देखो शब्द देखो कह रहे सूर दास दुविधा धर बाहर से तो अंधा हो अंदर से भी अंधा हो मेरे तो और कोई साधन ही नहीं जिसका भाव बड़ा गंभीर भाव है सूरदास दुविधा धरो बाहर से आंखें तो पहले से जन्म से ही अंधा हूं और अंदर ज्ञान की आंखें भी नहीं है दोनों तरह से अंधा मैं तो बिना मोल का बिका हुआ आपका दास हूं। सूरदास दुविधा धरो बिना मोल को चेरो भरोसो दृढ़ इन चरणों हमारे कोई और साधन नहीं केवल आपके चरणों का भरोसा हमारा कोई और नहीं प्रभु केवल आपके सिवा और कोई नहीं जब यह भाव होता है तो दृढ़ भरोसा भगवान बस यही साधना का फल है भगवान में दृढ़ भरोसा हो जाना

यह पाठ वीडियो के स्वचालित (auto-generated) उपशीर्षकों से लिया गया है — इसमें शब्दों की त्रुटियाँ हो सकती हैं। प्रामाणिक वचन के लिए वीडियो अवश्य सुनें।

मूल वीडियो: Bhajan Marg (YouTube)

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