परिवार और समाज में बढ़ता क्रोध—अब समाधान क्या है?
पूज्य महाराज जी का एक संक्षिप्त वचन — पूरा सुनने के लिए ऊपर वीडियो देखें।
पूरा प्रवचन
जी आज समाज में और घरों में बहुत क्रोध और बिखराव देखने को मिल रहा है। ये मुर्गा मछली खाने वाले ये राक्षसी बुद्धि यह कभी शांति प्रदान नहीं कर सकती अपने को जो बहुत वीआईपी समझते हो और दूसरे शरीरों को उबाल उबाल के काट के खाते हो तुम्हारी दुर्गति हो जाएगी। जो कोई भी हो जो आपका सामाजिक प्रश्न है कोई पर्सनल प्रश्न नहीं है जहां दुर्गति का कारण है जो अशांति का कारण है उसे आप बढ़ा रहे हैं जैसा खाए अन्न वैसा बने मन आप अघोर राक्षसी भोजन करोगे तो काम क्रोध लोभ मोह मद मत्सर नहीं सताएंगे तो और क्या भगवान की याद आएगी भगवान का प्रेम आपके अंदर स्पित होगा अरे यहां तक कि हम जब साधना में कदम रखने की चेष्टा करते हैं तो प्याज लहसुन तक बंद करवा दिया जाता है क्योंकि तमोगुणी है।
वो हमारे भजन में विक्षेप डालेगा। तो जो अपवित्र भोजन करते हैं, अपवित्र व्यवहार करते हैं, अपवित्र विचारों से युक्त नहीं रहेंगे तो और क्या होगा? आज हमारे समाज में जो अपवित्रता बढ़ रही है उसका कारण खानपान कुसंग
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मूल वीडियो: Bhajan Marg (YouTube)
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