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महाशिवरात्रि के दिन दिनचर्या कैसी रहनी चाहिए?

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पूज्य महाराज जी का एक संक्षिप्त वचन — पूरा सुनने के लिए ऊपर वीडियो देखें।

पूरा प्रवचन

शिवरात्र महाशिवरात्रि वाले दिन आपकी दिनचर्या क्या रहती थी? उपवास और आठों पहर की पूजा। आठ पहर होते ना तो आठों पहर चार पैर रात्रि भर पूरे जगते थे और दिन से उपवास रहते थे। कुछ खाना पीना नहीं। भगवान शंकर की वहां तो विश्वनाथ जी हैं काशी विश्वनाथ जी वहां तो आठों पहर की आराधना होती थी। महाराज जी आराधना में आप नाम स्मरण करते थे। चिंतन मंत्र जप मंत्र हां मंत्र जप पवित्र दशा में जैसे शौच जा रहे हैं तो फिर नाम जप करते थे। यही जप करते साम सदा शिव सा हां यही महाशिवरात्रि में रात्रि की महिमा है महाराज जी उस समय रात्रि पूरी रात नहीं पूरे आठों पहर की आठों पहर की पूजा की महिमा चार पहर दिन के और चार पहर रात्रि के तो उनकी आराधना करनी और उनकी आराधना में खास बात ये है एक लोटा जल और धतूरे का फल विश्व में कोई देवता नहीं जो खाता धतूरे का फल कोई देवता लेगा हां धतूरे अकड़ा का फूल उन्होंने चुनकर के ऐसी सेवाएं ली कि किसी को कोई तकलीफ है ना पड़े।

जंगल में कहीं भी चले जाओ बिल पत्र ले लो, धतूरे का फल ले लो और कौड़े का फूल ले लो। सबसे ज्यादा प्रिय चीजें हैं ये और एक लोटा जल चढ़ा दो और प्रणाम कर लो। इतने में खुश हैं भगवान शंकर। मंत्र समझ लिया। सा साम सदा शिव सा सदा शिव श सदा शिव सा सा सा सदा शिविव सदा सा सदाम सा सदा शिव ऐसे मंत्र थोड़ी बोले जाते हैं यही तो सा सदा शिव हां ये जो मंत्र है ये मंत्र कभी बोलना नहीं चाहिए और हां अंदर अंदर जपना चाहिए और गुरु से लेना चाहिए इसीलिए वही गुरु गुरु से लेने के लिए जो है भगवान शिव से प्रार्थना करें वही गुरु है किसी न किसी रूप में मिलके वही दे देंगे।

यह पाठ वीडियो के स्वचालित (auto-generated) उपशीर्षकों से लिया गया है — इसमें शब्दों की त्रुटियाँ हो सकती हैं। प्रामाणिक वचन के लिए वीडियो अवश्य सुनें।

मूल वीडियो: Bhajan Marg (YouTube)

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