शरणागत को मिलती है सुरक्षा… पर जो दूर हैं, उनका क्या?
पूज्य महाराज जी का एक संक्षिप्त वचन — पूरा सुनने के लिए ऊपर वीडियो देखें।
पूरा प्रवचन
में आपने बोला था कि अगर आप अपने शिष्यों को समाज में भेजते हैं तो वह उनको आग में झोंकने के समान होगा। परंतु महाराज जी हम जैसे अधम जीव तो आग में ही रह रहे हैं। तो महाराज जी ऐसे आग में फिर आपको बताया कि बुखार एक ही तरह का नहीं होता है। मलेरिया डेंगू कई तरह के लेकिन लिखा जाएगा बुखार ही तो उसके टेबलेट भी अलग-अलग होते हैं। हम उन शिष्यों को कहते हैं जिनको वैराग्य मार्ग में चलाया है। जिनको आजीवन ब्रह्मचर्य की शिक्षा आजीवन परिग्रह रहित रहना निरंतर भगवत चिंतन परायण रहना किसी से किसी भी तरह का संग ना होना हम इनको किसी भी स्वार्थी की पूर्ति के लिए संसार में नहीं भेज सकते नहीं तुम एकांत कुंज का सेवन करो या जो हमारे साधु समागम में नाम वाणी कीर्तन पाठ हो रहा है उसमें बैठो बस अपने कमरे में एकांत रहो क्योंकि तुम्हारा जीवन एक अलग जीवन है समाज का मंगल करने वाला जीवन है अब गस्थ लाख लाखों लोग जुड़े हुए हैं।
उनके लिए अलग मार्ग है। ऐसा नहीं कि उनको इसी पद्धति से चलना पड़ेगा। उनके लिए पद्धति अलग है। इनके लिए पद्धति अलग है। तो आप जहां रह रही हैं क्या वहां नाम जप नहीं कर सकती? वाणी पाठ नहीं कर सकती। ठाकुर सेवा नहीं कर सकती। अपने गुरुजनों की सेवा नहीं कर सकती। अगर कर सकती है तो जो इनको एकांत में प्राप्त होगा वो तुम्हें घर में प्राप्त होगा। परेशानी क्या है?
यह पाठ वीडियो के स्वचालित (auto-generated) उपशीर्षकों से लिया गया है — इसमें शब्दों की त्रुटियाँ हो सकती हैं। प्रामाणिक वचन के लिए वीडियो अवश्य सुनें।
मूल वीडियो: Bhajan Marg (YouTube)
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