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पवित्र हों या अपवित्र, हर समय करें नाम जप

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पूज्य महाराज जी का एक संक्षिप्त वचन — पूरा सुनने के लिए ऊपर वीडियो देखें।

पूरा प्रवचन

आप जैसे हो पवित्र हो या अपवित्र हो आप सोच में बैठे-बैठे भी राधा राधा जप सकते हैं और जपते ही हैं नहीं तो सोच में मर जाएंगे तो फिर हमें तो हर समय सावधान रहना है कब प्राण निकल जाए तो सोच होते समय भी अंदर ही अंदर भगवान नाम राधा वल्लभ से फिर निरंतरता कैसे रहेगी अंतर पड़ जाएगा ना मंत्र जपा नहीं जाता अपवित्रता में मंत्र नहीं जपा जाता लेकिन नाम जप किया जा सकता है अगर जीवन में एक बार भी राधा नाम उच्चारण हो गया है तो विश्वास मानिए आप नर्क नहीं जाएंगे जो इतना महिमामय नाम है उसको हम एक बार ही क्यों ले निरंतर क्यों ना ले जिससे हमें प्रियाल मिल जाए प्रभु मिल जाए देखो अजामिल ने अपने पुत्र को पुकारा था ना कि भगवान को नारायण इतने में ही भगवान के पार्षद आ गए और नाम के प्रताप से यमदूतों की फांसी काटकर यमदूतों को भगा दिया और परिणाम में अजामिल को भगवत धाम की प्राप्ति हुई।

पुत्र के बहाने नारायण पुकारने से सच्ची बुद्धि से विचार करके सब छोड़ दीजिए। जितने भी साधन है बने तो बने नहीं सब छोड़ दीजिए नाम पकड़ लीजिए। आप गंगा स्नान किए फिर पाप किए फिर गंगा स्नान किए फिर पाप। तो हाथी के स्नान जैसा रहा। आपकी पाप की प्रवृत्ति नष्ट नहीं हुई। इसलिए नाम जप नाम पाप और पाप की प्रवृत्ति दोनों का नाश कर देगा।

यह पाठ वीडियो के स्वचालित (auto-generated) उपशीर्षकों से लिया गया है — इसमें शब्दों की त्रुटियाँ हो सकती हैं। प्रामाणिक वचन के लिए वीडियो अवश्य सुनें।

मूल वीडियो: Bhajan Marg (YouTube)

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