दो दोस्त, दो कर्म… और दो बिल्कुल अलग परिणाम
पूज्य महाराज जी का एक संक्षिप्त वचन — पूरा सुनने के लिए ऊपर वीडियो देखें।
पूरा प्रवचन
एक दो मित्र थे। वह दोनों मित्र कुछ दिनों के बाद आचरणों में दोनों के परिवर्तन हो गया। एक गंदे लोगों की संगत में शराब पीना, जुआ खेलना, वैश्या आगमन करना इधर चल पड़ा और एक गंगा स्नान करना, नाम जप करना, भागवत सुनना, संतों का समागम करना काफी लंबे समय तक दोनों का मिलान नहीं हुआ। एक दिन वो पास से निकल रहा था जो व्यभचार मार्ग में चला गया और वो आ रहे थे गंगा नहा के नाम जप करते हुए तो खजूर होता है ना खजूर का बड़ा कांटा होता है गंगा नहाने वाले के खजूर का कांटा वो एकदम चीख के वो नजदीक गया सूट बूट पहने बाबूजी की तरह क्या मिला तेरे को गंगा नहा रहा है नाम जप कर रहा है धर्म से चल रहा है देख सैकड़ों फ्रेंड ने हमारे मौज मस्ती से जीवन कट रहा है देख मेरे को ऐसे थोड़ी देर के लिए उसको लगा कि यार बातों से ही बचपन से गंगा नहा रहा हूं नाम जप कर रहा हूं।
सही ढंग से खाने को भी नहीं। देखो नंगे पैर गंगा नहाने गया था तो खजूर का काटा डाला। वो बूट पहने घूम रहा है। वो गया उसको उपहासास्पद वचन कह कर और अंदर से कि क्या भगवान मैं गलत मेरा मार्ग गलत है। इतनी देर में एक वयोवृद्ध के रूप में प्रभु आए लाओ लाओ मैं कांटा निकाल देता हूं। बोले कांटा तो तुम ना निकालोगे तो हम ही निकाल लेंगे। अरे हृदय में जो कांटा लग गया है अभी उसके वचनों से उसका संशय बोले क्या? बोले वो मित्र हमारा हम दोनों मित्र थे। हम सतार्ग में आए। वो कुमार्ग में उसका महल खड़ा है।
सूट बूट से टहलता है। कभी उसको जुकाम भी नहीं हुआ। नंगे पैर चलता हूं। खाने को भी नहीं। देखो अभी कांटा खजूर का लगा हुआ। गंगा नहा के आ रहा हूं। कोई पाप कर्म ये सब क्या है? क्या हमारे भजन का यही फल मिला हमको? तो उन्होंने कहा नहीं तुम केवल अभी वर्तमान को देख रहे हो। मैं तुम्हें अनेक जन्मों की बात बताता हूं। ये जो अभी गया तुम्हारा मित्र पूर्व का पुण्यात्मा पुरुष है। इसने खूब दान पुण्य किए थे। इस जन्म में इसे चक्रवर्ती सम्राट का वैभव प्राप्त होना था। इसने जो पाप कर्म किए सब नष्ट हो गया है।
अब यह कुछ क्षणों के लिए आपको यह दिखाई दे रहा है। जहां इसका वर्तमान का पाप और पूर्व का पुण्य नष्ट होकर पूर्व का पाप जुड़ा तो नष्ट हो जाएगा। यह किसी काम का नहीं रहेगा देखना। और तुम्हारे ऐसे पाप थे कि इसी समय तुम्हें सूली की सजा मिलनी थी। पहले पुराने जमाने में सूली की सजा होती थी। बोले तुम्हें सूली की सजा तो खजूर के कांटे में निकल गई। तुम्हारा वर्तमान का पुण्य और पूर्व के जो पाप है वो नष्ट हो चुके हैं और पूर्व का पुण्य ये दोनों जब मिलेंगे तो तुम्हें जो अपार सुख होगा वो सोच भी नहीं सकता।
इसलिए तुम गलत नहीं हो। अपने विचारों को शुद्ध रखो।
यह पाठ वीडियो के स्वचालित (auto-generated) उपशीर्षकों से लिया गया है — इसमें शब्दों की त्रुटियाँ हो सकती हैं। प्रामाणिक वचन के लिए वीडियो अवश्य सुनें।
मूल वीडियो: Bhajan Marg (YouTube)
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