संतों की सेवा के लिए भगवान बने नौकर!
पूज्य महाराज जी का एक संक्षिप्त वचन — पूरा सुनने के लिए ऊपर वीडियो देखें।
पूरा प्रवचन
त्रिलोचन जी के यहां नौकर बनकर सरकार गए थे। उनको एक सेवक की जरूरत थी कि कोई ऐसा सहयोगी मिले जो संतों के मन की बात जानकर वैसे ही रसोई बनावे और संतों को पवावे क्योंकि उनका व्यापार भी था तो भगवान स्वयं 16 वर्ष की अवस्था है। फटे पुराने कपड़े और दरवाजे के पास कहा मैं बहुत प्रवीण सेवक हूं। मुझे कोई नौकरी में रख ले। त्रिलोचन जी निकले देखा नई अवस्था। उन्होंने कहा आइए आइए हमें तो जरूरत है पर हमें अपनी सेवा के लिए नहीं जरूरत। हमें संतों की सेवा के लिए जरूरत है।
बोले वो तो बचपन से हमारा स्वभाव है। संतों की सेवा करना। बोले आप क्या बना लेते हो? बोले जो चाहो बनवा लो। कढ़ी, खीर, पुआ, पूरी सब और हम जिसको देखते हैं उसके मन में जो चल रहा हो तो आप समझ जाते हैं ये सेवा के प्रभाव से। मेरे में कोई सिद्धि नहीं पर हम आपके संतों को देखेंगे। उनके मन में कि रबड़ी तो हमको रबड़ी पा। अरे बोले हमारी बात बन गई। भगवान नौकर बन करके रहे। किस लिए? क्योंकि संतों की सेवा में उन्होंने चित्त
यह पाठ वीडियो के स्वचालित (auto-generated) उपशीर्षकों से लिया गया है — इसमें शब्दों की त्रुटियाँ हो सकती हैं। प्रामाणिक वचन के लिए वीडियो अवश्य सुनें।
मूल वीडियो: Bhajan Marg (YouTube)
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