भगवान की शरण में जाकर पापी भी तर सकता है!
पूज्य महाराज जी का एक संक्षिप्त वचन — पूरा सुनने के लिए ऊपर वीडियो देखें।
पूरा प्रवचन
भाई अस्पताल बना ही होता है रोग निवारण के लिए। अब अगर अस्पताल में पहले लिख दिया जाए कि यहां किसी को खांसी, जुकाम, बुखार, कैंसर, किडनी, फेलियर ये सब ना हो फिर आप आओ तो मजाक नहीं माना जाएगा। यार ये कैसा अस्पताल है? अस्पताल का मतलब ही होता है रोगी हो जाए। तो शरणागत होता ही असमर्थ है। शरणागत कौन होता है? असमर्थ है। मेरे में सामर्थ्य नहीं कि मैं काम विजय हो जाऊं। मैं क्रोध विजय हो जाऊं। मैं अहंकार को जीत लूं। यही तो दोष है काम क्रोध मद लोभ सब ये नाथ नरक के पंथ तो हे हरि मैं आपकी शरण में हूं हरि शरणम हरि शरणम हरि राम कृष्ण हरि राधा राधा राधा सब ठीक हो जाएगा ये जितने शत्रु हैं हमारे बस के नहीं है हो हारो कर जतन विविध विधि अतिशय प्रबल अजय तुलसीदास बस होई तब जब प्रभु पेरकजे इनकी डोरी प्रभु के हाथ में वही संभालेंगे दे दो डोरी और राधा राधा हर समय रटो क्या परेशानी?
यह पाठ वीडियो के स्वचालित (auto-generated) उपशीर्षकों से लिया गया है — इसमें शब्दों की त्रुटियाँ हो सकती हैं। प्रामाणिक वचन के लिए वीडियो अवश्य सुनें।
मूल वीडियो: Bhajan Marg (YouTube)
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