मृत्यु का दोषी कौन? सुनकर सब शांत हो गए...
पूज्य महाराज जी का एक संक्षिप्त वचन — पूरा सुनने के लिए ऊपर वीडियो देखें।
पूरा प्रवचन
कि एक महान तपस्विनी गौतमी नाम था उनका तो उनके एक पुत्र था और वो जंगल में तपस्या करती थी। पुत्र खेलने गया तो सांप ने काट लिया विषदर सर्प ने। अब वो मर गया तो कुल किरा जंगली लेकर आए और कहा देवी तुम्हारे पुत्र को सांप ने काट खाया। अब पुत्र को मृत देखकर उनको बहुत क्रोध आया। उन्होंने मंत्र के द्वारा सांप का आकर्षण किया तो सामने सांप आ गए। बोले अभी तुम्हारे 100 टुकड़े करते हैं। तुमने हमारे पुत्र तो उसने कहा देखो आप तपस्वी हो कर सकते हो। पर हमने नहीं मारा।
हमारे ऊपर मृत्यु सवार थी इसकी तो कटवाया। विचार किया आप बात तो सही कह रहे हैं। मृत्यु का आकर्षण किया। मृत्यु ने कहा कि नहीं मेरा कोई दोष नहीं। काल काल से मैं प्रेरित मृत्यु सांप को प्रेरित किया। काल का आकर्षण किया। काल ने कहा आप मेरा अपराध मत समझिए। इसका कर्म है। इसके कर्म से प्रेरित मैं काल काल से प्रेरित मृत्यु मृत्यु से प्रेरित सांप मतलब टोटल का टोटल अगर मूल में पहुंचते हैं तो इसी बालक के कर्म का परिणाम ये आया है। वो शांत हो गए। वो शांत हो गए। किसी को दंड नहीं दिया।
यह पाठ वीडियो के स्वचालित (auto-generated) उपशीर्षकों से लिया गया है — इसमें शब्दों की त्रुटियाँ हो सकती हैं। प्रामाणिक वचन के लिए वीडियो अवश्य सुनें।
मूल वीडियो: Bhajan Marg (YouTube)
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