॥ श्री राधावल्लभो जयति ॥ श्री हित हरिवंश चन्द्रो जयति ॥
The Radhavallabh Times श्री हित समाचार भक्त चरित्र · युगल लीला · पद · वाणी · सत्संग
ताज़ा

वृंदावन वास की अद्भुत महिमा ! | Shri Hit Premanand Govind Sharan Ji Maharaj

▶ YouTube

श्री धाम वृन्दावन पर पूज्य महाराज जी के वचन — ऊपर वीडियो में सुनें।

पूरा प्रवचन

एक अनंत सृष्टि में में कितने ऐसे हैं जिनको वृंदावन का नाम सुनने को मिलता है कितने ऐसे हैं जिन्हें वृंदावन का महत्व सुनने को मिलता है उनमें से कितने ऐसे हैं जिनके हृदय में उल्लास होता है वृंदावन आने का वृंदावन दर्शन करने का और कोई विरले ऐसे हैं जिनके हृदय में यह छटपटाहट व्याकुलता होने लगती है अब मुझे वृंदावन वास करना कुछ बने बिगड़े इसकी परवान अब जैसे भी है हम राधारमण के वृंदावन का निरंतर वास से कार्य करेंगे उन कुछ भोज्य कि कोई फील ए मोहब्बत सलीम सर्वोपरि श्रीधाम वृंदावन वास अपने आप में पूर्ण है कि किसी गुणों से साधनों से तपस्या से जिस वस्तु को प्राप्त नहीं किया जा सकता और श्रीधाम वृंदावन के वास्ते मिलती है कि वृंदावन व्याख्या कैसे वास करें प्रथम विषय श्री धाम वृंदावन वास ए ओम श्री श्यामा श्याम का न्यूज़ महल बहुत बड़ी और है उल्लासपूर्वक बास कीजिए यदि आपको वृंदावन का वास का सौभाग्य मिला है एकांत में प्रफुल्लित रहिए हमेशा जी ने श्री धार्मिक व्यक्ति आगे की बात को आप मत में नकारात्मक सोच में

ले जाइए किसी धाम वृंदावन वास करते और भजन नहीं होता तो क्या भजन होना जितना सामर्थ्यशाली है उतना ही सामर्थ्यशाली वृंदावन वास उन्हें इतना भी कम नहीं है बात समझ लीजिए कबीर एक बार ही और राधा ना बोले और वृंदावन का श्रेय ले लिया है वृंदावन राधा नाम राधा कृष्ण की शक्ति राधा रूप राधा रानी लागे जन्म उत्सव समान है कोई अंतर नहीं है और पकाएंगे कोई राधा राधा बाहर बोलता है तुलसी वृंदावन वास के फल मिलेगा व क्योंकि बिना वृंदावन की कृपा कोर राधा नाम का परिचय जानने

ही नहीं वृंदावन की थाती है राधा नाम इस वृंदावन अवश्य अगर हुए दिव्या में राधा नाम रटत वृंदावन की कृपा यह राधा किशोरी के गुरुचरण अरविंद की गति और वृंदावन की कृपा नाम रूप लीला धाम चारों समान है यदि आप धाम में पड़े हैं ऐसा लिख सकता कि नाम स्थित ना हो नाम गठन न धर्म जिससे लोग कहते भजन वृंदावन वास मिले वृंदावन वास मिले निरंतर नाम रखने वाले वृंदावन धाम अपने आप में पूर्ण हैं हुआ था धाम में अपराध ना बने वर्तमान में हम सदैव आनंदित रहें परिणाम भी आनंद में हो इसलिए आनंद का चिंतन करो प्यारी जू का नाम पर जुकारू प्यारी जू की लीला यह प्रेमानंद मैं है इसका वर्तमान में चिंतन करो यदि चिंतन नहीं होता यह भजन नहीं होता तो वृंदावन वास अपने आप में पूर्ण भजन है वह तो उपासक की मनोस्थिति को वर्तमान में लीला प्रवेश कराने के लिए उसे गहरा जाता है कि आप धाम वास करके मना स्थिति प्रपंच और विषयों में लगाएंगे तो आपको अनुभव में नहीं आएगा इसलिए वर्तमान आपका महमूद में जाए परिणाम तो धीरे ऊपर मरीजों मंगल आएं हैं

यह पाठ वीडियो के स्वचालित (auto-generated) उपशीर्षकों से लिया गया है — इसमें शब्दों की त्रुटियाँ हो सकती हैं। प्रामाणिक वचन के लिए वीडियो अवश्य सुनें।

मूल वीडियो: Bhajan Marg (YouTube)

संबंधित