गिरिराज जी की शीला अगर ब्रज से बाहर लेकर जाएंगे तो क्या होगा ?
श्री धाम वृन्दावन पर पूज्य महाराज जी के वचन — ऊपर वीडियो में सुनें।
पूरा प्रवचन
अगर कोई गिरिराज जी की शिला छोटी भी लेकर गया है तो उसे तुरंत जाए और वापस करके गिरिराज जी में विराजमान कर दे नहीं तो अनर्थ हो जाएगा य पक्की बात कहता हूं गिरिराज जी महाराज बड़े करुणाम है कभी किसी का अनिष्ट क्यों करेंगे और अनिष्ट हो जाएगा यदि उनकी रुचि के विपरीत चलोगे तो तब से अब तक घट ही रहे हैं गिरिराज जी साफ स्वीकार कर लिया लेकिन ब्रज के बाहर नहीं गए इसलिए ब्रज के बाहर जो ले जाएगा वो अनिष्ट कारी ही होगा म जी एक प्रश्न बारबार एक दो ब्रजवासी जन भी आए थे उन्होंने भी किया था और भी काफी लोग करते हैं गिरिराज जी की शिला को बृजवासी जन कह रहे थे कि अज्ञानता के कारण लोग जो भक्त जन आते बाहर ले जा हां गर्ग संहिता में स्पष्ट लिखा हुआ है और भी महापुरुषों के वचन है कि गिरिराज जी की शिलाखंड को कभी ब्रज चौ को उस के बाहर ना ले जाया जाए अगर ले जाता है तो पाप है अपराध है और वो उसका अनिष्ट निश्चित कर देंगे अभी नहीं तो आगे हो जाएगा अगर कोई गिरिराज जी की शिला छोटी भी लेकर गया है उसे तुरंत जाए और वापस करके
गिरिराज जी में विराजमान कर दे नहीं तो अनर्थ हो जाएगा ये पक्की बात कहता हूं ये गिरिराज जी महाराज जी की गर्ग संहिता में पढ़ के देख लो उनकी स्पष्ट आज्ञा है कि ब्रज देश से बाहर मुझे ना ले जाया जाए अगर ब्रज देश से बाहर ले जाओगे तो आपका अनिष्ट हो जाएगा ऐसा केवल गिरिराज जी की ये बात है आप रज ले जा सकते हो आप यमुना जल ले जा सकते हो कुंडों का जल ले जा सकते हो प्रसाद यहां का ले जा सकते हो लेकिन गिरिराज जी को नहीं ले जा सकते गिरिराज जी की शिला नहीं ले जा अगर कोई भूल से ले गया हो तो हमारी बात जहां तक कान में पहुंचे वह तत्काल गिरिराज जी में विराजमान कर दे नहीं भगवत आज्ञा के विरुद्ध चलने वाले को कोई लाभ नहीं मिलता अनिष्ट ही होता है गिरिराज जी महाराज बड़े करुणामय है कि अभी किसी का अनिष्ट क्यों करेंगे पर अनिष्ट हो जाएगा यदि उनकी रुचि के विपरीत चलोगे गिरिराज जी को यहां ब्रज चौरा कोष से बाहर नहीं ले जाना चाहिए ब्रज के अंदर ब्रज के अंदर आप विराजमान कर सकते हो 84 कोष में कहीं भी आप ला सकते हो विराजमान
यहां देखो अपने यहां विराजमान है लेकिन आप बाहर नहीं विराजमान वृज चौरा को उसके बाहर नहीं विराजमान कर सकते गिरिराज जी को ऐसा नहीं कि आप थोड़ी से एक शिलाखंड को लि आओ आप बाहर ले जा रहे हैं वहां घर में विराजमान करके पूजा करें बिल्कुल नहीं गिरिराज जी की रुचि नहीं उनकी आज्ञा नहीं गर्ग संहिता में मना किया गया है ये अपराध है और ये अनिष्ट कर देगा पक्का अनिष्ट कर देगा एक जन कोई आके कह रहे थे कि उतना ही भजन का स्वर्ण का वो कर दो तो फिर लेकर जा सकते हैं बट भावात्मक वो नहीं गिरिराज जी को स्वर्ण की जरूरत नहीं वो व्रज चौरा को उसके बाहर जाना ही पसंद नहीं किए साफ स्वीकार कर लिए लेकिन जाना पसंद नहीं किए रोज तिल भर टेंगे ऐसा साप अगस्त जी ने दिया गिरिराज जी जो आए उनकी द्रोणागिरी से आए हैं द्रोणा गिरी के पुत्र हैं गिरिराज जी तो ब्रज में ही उनको ये लीला भगवान का अवतार होना था इसीलिए वो आए थे तो अगस्त जी ने उनको काशी ले जाने की सोचा था मैं काशी ले जाकर के उनको को विराजमान करूंगा तो अगस्त जी से कहा कि मुझे
रास्ते में जहां रख दोगे फिर मैं नहीं उठूंगा उन्होने कहा मैं रखूंगा ही नहीं आपको सीधे ले जाऊंगा लघु शंका लगी यहां ब्रज क्षेत्र में इतनी जोर की लगी वो गिरिराज जी की इच्छा से उन्होंने गिरिराज जी को रख दिया लोग शंका करके पवित्र होकर आए जब उठाने को तो लाख कोशिश की तपोबल का पूरा प्रयोग कर दिया तो उनका गिरिराज जी ने कहा श्री कृष्ण स्वरूप है साक्षात गिरिराज जी ने कहा मैंने कहा था मुझे रख दोगे फिर नहीं उठा पाओगे अब तुम नहीं उठा पाओगे अब मैं वृक्ष से बाहर नहीं जाऊं बहुत प्रयास किया बहुत विनय की फिर आखिरकार क्रोधित हो गए और शप दिया कि रोज तिल तिल भर घटो ग तो तब से अब तक घट ही रहे हैं गिरिराज जी साप स्वीकार कर लिया लेकिन ब्रज के बाहर नहीं गए इसलिए ब्रज के बाहर जो ले जाएगा वह अनिष्ट कारी ही होगा उसके लिए मंगल नहीं होगा अगर कोई ले गया है तो वापस पुनः गिरिराज में रख दिया के ऐसा नहीं गिरिराज जी को ब्रज से बाहर नहीं ये भगवत लीला भूमि है इसलिए यहां 84 को जी
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मूल वीडियो: Bhajan Marg (YouTube)
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