लाड़ले ठाकुर श्री राधापिय जू महाराज का विवाह महामहोत्सव !
पूज्य श्री हित प्रेमानंद गोविंद शरण जी महाराज का सत्संग — पूरा सुनने के लिए ऊपर वीडियो देखें।
पूरा प्रवचन
ज अनि वृषभानु नंदिनी आ मने वृष मान नंदने आ भरे वृषभ नंद समान ंदने आ भूषण वसन विविध पहिरे तन भूषण वसन विविध पहिरे तन मोहन हित साजु प्रिय मोह नहित साजु भूषण बसन विविध पहिरे प्रय मोहन हित साजु भूषण वसन विविध पहिरे तन प्रय मोहन हित सा बनी वृष भालो बनी आज ब वृष भान आ भाव भाव लावन बकट लट भाव भावला वन्य बकट लट भाव भाव लावण्य बिकट लट भाव भावना रावण बिकट लट हरत जुव जन पाजू हरत जुती जन पा ताल अघर सुर सू चत ताल भे र सुर सोचत ताल भेद अघर सुर सचित ताल भेद सुर
सोचत नपर किं केने बाज नपर केन बाज ताल भर अघर सुर सूच र सुर सत नपर कि बाज ताल भेद घर सरसो घर सर सोचत नपुर केने जोष भानु नंदिनी आज मनेस भानु नंदनी आ नवन कुंज अभिराम श्याम संग नव नि कुंज अभ राम श्याम संग को बनो समाज ने को बनो समाज जय श्री हित हरिवंश विलास रास जूता हेत हरिवंश ला रास जत जोरी अविचल राजु जोरी अवे चल राधु जय श्री हित हरिवंश विलास रास जुत विलास रास जुत जोरी अविचल राजू ज शत हरिवंश विलास रास विलास रास जत जोरी अविचल रा री नव नि कुंज अभिराम श्याम संग को बन समा जय श्रीत हरिवंश विलास रास जुत त हरिवंश विलास रास जोरी अ विचल रा नव निकुंज अभिराम श्याम अभिराम श्याम संग की को बनो समान जहित हरि वर्ष विलास रास जहित हरिवंश विलास राज जोरी अ चल रा बनी वृष भानु नंदिनी आजू बनीन नंदनी आ बनी वृषभ लत रास ल केल तना दलने दूर सुनना सखी सहित ललिता का सुन हो ना सके ललता देख सुन ना सखी सहित ललिता सुनना सके सहित ललिता देख निरखी निरख ना न फूल निरख निरख ननन फूल सोना होना सखी सहित ललिता सहित ललिता निरख निरख न
सोन हो ना सके सहित ललिता सहित ललिता देख निरख निरन केनल अ कला मधूर महा मोघन अति कल मधु महा मोहन धोनी उपजत हंस सुता के कुल उपजत सुता के फूल हंस सुता के कुल उपजत हस सुता के कुल हो थ वचना मिथुन मुखन स च मिथुन मुख नि सरत सुनी सुनि देह केन भूल सुने सुने दे के नभ अति कल मधुर महा मोहन गुनी महा मोहन गुनी उपजत हंस सुता के कुल ई वचन मिथुन मुख नि स तेई वचन मिथुन मुख नि सरत सुनी सुनी दे द सान भूल कल मधुर महा मोहन ध महा मोहन धुनि उपजत हस सुता के कोल थ बचन मुख सर वचन मिथुन मुख सरत सुनि सुनि ध साख न भूल ु पनस उठता कुमकुम रज मदु बदस उठत कोम कुमार अदभुता बहता समीर दुकल अदभुत बहत समर कुल धु पनस उठत कुमकुम रज अदभुत बत समर दुकल मृदु पद न्यास उठत कोम मराज अदभुत बत समरध कोल कबहु श श्यामा दसना चल तब हो श्या मानसना चल कच कुच हार चुवत भुज मु कज गुज हार जमु पद न्यास उठत कुम कुमा उठत कुम कुमर अदभुत बहत समीर कुल कबहु श्याम श्यामा दसना कहु श्याम श्यान सना चल तस उठत कुम कुम उठत कुम कुमर समरक कबहु श्याम श्यामा नसना
कबहु श्याम श्याम मानसना बज कुछ हार चमत भुज बोल हो अति लावण रूपा अभिनय गुण अराव रूप विन नान कोटि काम समूल ना न को काम सम दूर हो अलाव रूप अभिनय गुना नान कोटि काम समतल अति लावन रूप अभिनया गर नाहीन कोटी काम समतल ला हासर सवर बकट विलास आस रस जय श्रीता हरि हंश प्रेम रस हरि वर्ष प्रेम रसरी अति लावण्य रूप अनरू अन गुण नान कोटि काम समतल त्रिकुट विलास आसर सस त्रिकुट विलास वास रस वस त हरि हंश प्रेम रस जति लावण्य रूप अभिनय रूप अभिनय गु हिन कोट काम समतल बिकट विलास हास रस भर बिकट विलास स रस शत हरि वर्ष प्रेम रस झूला लस दलही दूल खेलत रास द दलने दू खेलत रास सखियान केरा ऐसी आ के ऐसे द रचे है सुखदा विनोद मेरा च सुखदा यह बा सबके मन भा यह बा सब के मन भा आनंद मो द बढ़यो अधिकार नंद मोज ब अधिकारी आहु पढ़ो आनंद मोद सबके बढ़यो आनंद हा हा हा हो बढ़यो आनर हा ब आ हा बढ़यो आनंद बढ़यो आनंद मोद सब के महा प्रेम सुमोद सबके प्रेम सु सुबोध सबके महा प्रेम सुरंग रंगी महा प्रेम सुरंग रंगी और कछु ना सुहाय देना और कछु ना सुहाय
दिन जुगल सेवा सुख पगी और कछु ना सुहाय ते न जुगल सेवा सुख पगे हा बढ़यो आनंद मोद सबके महापे सुमोद सबके महा प्रेम सुरंग रंगी और कछु ना सुहाय न को और कछु ना सुहाय तिन को जुगल सेवा थक पगी ब आनंद पयो आनंद हा हा हो बढ़यो आनंद री बढ़यो आनंद बढ़यो आनंद मोद सबके महा प्रेम सु मोध सबके महा प्रेम सुरंग रंगी और कछु ना सुहाय तिन को और कछु ना सुहाय तिन को जुगल सेवा सुख पगे निषद स जानत नाही सजनी री हा हा हा हा निषद सजा री हा निषद सजन नि सजान निषद स जानत नाही सजनी
एक रस भीजी हित सजनी एक रस भीज हित सजनी एक रस भीजे रहे एक रस भीजे रहे गोपन आदि दुर्लभ गोप गोपन आदि दुर्लभ ही सुख ही दिन प्रति ल गोप गोपन आदि दुर्लभ सुग जिन प्रति ल हे नियो सज जानत नाही सजनी एक रस भी जीत सजनी एक रस भीज रहे ओप गोपन आज दुर्लभ गप गोपीन आज दुर्लभ सुख दिन प्रति ल निषद सजन री हा हा हा हा निषद सजान हा निश जो सजान नि जो सजान नि जो स जानत राही सजनी एक रस बजत सजनी एक रस भीजी रहे गोप गोपन आदि दुर्लभ गोप गोपन आदि दुर्लभ ते सुख दिन प्रति ल नवला
ने आते सुकुमा शी आते सु कुमार रे नाम दूला हो लाल बिहारी री ज नवदल हो ला बिहार रंग बने ऊ प्राण प रे राने दो प्राण पयारे सत अंगना रे नाम सद सिंगार नव सत शृंगार अंग अंगन नव सत सिंगार हा हा नव सत श्रृंगार रेहा नव सत सिंगार नव सत श्रृंगारे नव सत का आंगन झलक चन की अंग अंगन झलक तन के आंग आंगन लक तन की अति बड़ी ला कतन अ बड़ी मर मोरी शी ससो है मोड़ मोड़ शीष सोह न पानी मुख चड़ी मोर मोरी शेष सोहे मैन पाने मुख चढ नव सत सिंगारे अंग अंगन झलक तन की अंग अंगन झलक
तन की अ ब मोर मोरी शी ससो है मोर मोरी शीश सोहे मैन पान मुख छड़ी नव सत सिंगार हा हा नव सत सिंगार हा नव सत सिंगार नव सत सिंगार नव सत सिंगार आंग आंगन लग तन की आंग आंगन दलग तन की अति बड़ी मोर मोरी श सोहे मोर मोरी शश सोहे न पानी प मुख चढ़े री जलज सुमन सुसे घरे रची जलज सुमन री हा हो जलज सुमन रे हा हो जलज सुमन हा जलज सुमन जलज सुमन सुसे हरे रचे रतन हीरे से हरे रच रतन हीरे से हरे रच रतन हीरे जग मगे रतन हीरे जल मगे री देखी अदभुत रूप मन म देखी अदभुत रूप मनमत कोट रति पायन लगे देखि अदभुत रूप मनमत कोट रति पायन लगे री जल ज सुमन सुसे गरे र चर हीरे से घरे र च रतन हीरे जम देख अदभुत रूप मन म की अदभुत रूप मनमत कोटर पायन लगे जल सुमन री हा हो चल ज सुमन हा चल जलज सुमन जलज सुमन सुसे हरे रच रतन से हरे र रतन हीरे जग मगे देखी अदभुत रूप मन मत देखी अदभुत रूप मन मथ कोट रति पायन लगे हा देखि अदभुत रूप मन मत कोट रति पायन लगे देखि अद्भुत रूप मन मत कोटि रति पायन लगे शो मंडप कुंजन द्वा रे शो म जन द रेत की बाध बंदन वा ता
के बाध कोम कोम स् ले है अजर पा ओम कोम हजर ले भूतम देन च भत तेरा रा री हा पुराय अदभुत चौक मुन बराय अदभुत चौक मते हा चित्र रचना चौक मतेनु चत्र रचना चौक म तेन चत्र रचना बहु गई चित्र रचना बहु करे आए हाड़े भए तहाय दो हाड़े भता सवन की गति मति हरि आय दो हाड़े भए ता सबन की गति मत हरे अदभुत चौक मति चत्र रचना चौक मति चित्र रचना बहु करी आए दो ठाड़े भए तहा आए दो ठाड़े भए त सबन की गति मति हरीराय अदभुत पुरा अदभुत पुरा अदरा हराय अदभुत चौक मो तेन क्षेत्र रचना चौक मो तेन क्षेत्र रचना बहु कररी आए दो ठाड़े भए त आए दो ठाड़े भए त सवन की गति मति हरी हा सुरंग मेहली रंग राच सुरंग मेहली री हा सुरंग में रे हा सुरंग मेहदी सुरंग मेहदी सुरंग मेहदी रंगरा चरण मेहदी रंग राचे चरण मेहदी रंग राचे चरण कर अतिराज चरण कर अतिराज विराग किंक विराग मधुर हरु मधुर न पुर पाज सुरंग मेहंदी रंग राचे चरण कर अति रंग राचे चरण कर अतिराज विविध रागिनी किंनी अरु विविध रागिनी किंक हरु मधुर नपर बाही सुरंग में देरी हा हा हा उस रंग में रे हा
सुरंग सुरंग मेह सुरंग मेह रंग रा चरण करति रंगरा चरण कर राज विविध राग अ विराग किक अरु मधुर पुरवा विविरा किंनी अरु मधुर अ पुरवा जी श जा सो दे स सुहा द श झ सहाना द चला ग्र जरा मन दृग आचल ग सुरा रीति भाति विज बना रे भाति दे चे मना ने ह की देवी दहा उजा की देहा होजा हा पूजी देवी ने की दोज दे री हा हा हो पूजी देवी हाज दे हा पूजी देवी हा पूजी दे नेह की दो रति विनोद हने ह की दो रति विनो नेह की दो रति विनोद बिहारी रति विनोद बिहार मय सखी ललिता हित सोय सखी ललिता देहित शरी प्राण वा समय सख ललिता देत री प्राण बारही हे हा पूज देवी नेह की द रती विनोद नेह की द रती विनोद बिहारी यही समय सखी ललिता देहित सो समय सखी ललिता देहित सो री प्राण नवा रही हा पूज देवी हा हा हो पूज देवी हा हो पूज दे पूज देवी पूज देवी नेह की ौरत विनोद नेह की ौरत विनोद बिहार ही समय सखी ललिता दे ही समय सखी ललिता देहित स फरी प्राण बार हा एक वैस स्वभाव एक एक वै हा हा हो एक वै सर हा हो एक वैस हा एक वैस हा एक वैस स्वभाव एक सहज जोरी स्वभाव एक
सहज जोरी स्वभाव एक सहज जोरी सोहनी सहज डरी सोहनी एक डोरी प्रेम की ध्रुव एक डोरी प्रेम के ध्रुव बंधे मोहन मोहिनी री प्रेम के ध्रुव बंधे मोहन मोहनी एक वैस स्वभाव एक सहज वैस स्वभाव एक सज जोरी सोहनी एक लोरी प्रेम की ध्रुव एक कडो प्रेम की ध्रुव बंदे मोहन मोजनी हारी हा हा हा हो एक व हा हा एक वैस हा एक वैस स्वभाव एक सहज र स्वभाव एक सहज जोरी सो हरी एक डोरी प्रेम के ध्रुव एक डोरी प्रेम के ध्रुव बंधे मोहन मोहिनी हा एक कोरी प्रेम की ध्रुव बंधे मोहन मोहिनी एक
क डोरी प्रेम के ध्रुव बंदे मोहन मोहनी श्री वृंदावन धाम रस कामाला हो हई श्री वृंदावन री हा हा हा हा हो श्री वृंदावन हा हो श्री वृंदावन श्री वृंदावन श्री वृंदावन धाम रस कमन री धाम रस का मन धाम रस कमर मो रस कमन मोह रस कमन म लाहा दुलहिन ब्याह सहज ताहा सो गई री हा दल दलह सहजता सो तेरी हारी हा हा ला लगनी ब्याह सहजता सो गए तेरी हा तेरी हा दल दुलहिन ता री हारी हा हो दला दुलहिन ब्याह सहज ताहा सो गई तेरी हा तेरी हा दल दलने सहजता सोहा नित्य सहाने पट अरु भूषण साज त सहाने पट भूषण साज हा नित्य नवल समस एकरस राजही री हा नित्य नल सम वस एकरस राज हे हो नित्य नवल सम वस एकस राजही री हा नित्य नवल स एकरस रारी हो निथ नवल सम वैस एकरस राज री हा मेरी हा हो नित्य नवर सरस राज श को सिर मोर चंद्र का मोर की शोभा को सर मोर चंद्र का मोर चंद्र का मोर चंद्र का मोर बरनी न जाए कछु छ भी नवल किशोर की तेरी हाहा बरने ना जाए कछु छब नवल किशोर की हारी हो बरनी न जाए कछु च कवल किशोर की रे हा तेरी हा मरने ना जाए कछू छ नवल किशोर की
री हा री हा हो परली ना जाए कछु छरी नवल किशोर की री हा तेरी हा मरने ना जाए कछु छवि नवल किशोर की हा सुभग मा रंग देखा मनो अनुराग की सुभग मांग रंग रेख मनो अनुराग मनो अनुराग मनो अनुराग के लकत मरी सी सग सुरंग सुहाग की रिहा जल कत मोरी शस सुरंग सुहाग की री हो चलकत मोरी से स सुरंग सुहाग री हा हा लकत मोरी श र सुहा के री हा हो जल कत मोरी स सुरंग सुहा री हारी हा ल कत मोरी शस सुरंग सुहा हा मण नुख चता नव कुंज रही जग भग जहां मणि नुख चत नव कुंज रही जग मग जा छवि को बनो बितान सोई मंडप कहां री हा छवि को बनो वितान सोई मप रहा री हा हो छवि को बन बतान कोई मंडप मेरी हा मेरी हा जभ को बन बितान कोई मंप री हारी हा हो सभी कोन बतान सोई मंडप तहा हा सभ को बनो बतान कोई मन जपना यहा वेदी से ज सुद स रच अति बानी के वेद सेज सुदेश ती अति माने के भाति माती के फूल सुरंग बहु आन के हा भाति भा के फूल सुरंग बहु री हारी हा हो भाती भाज के फूल सुरंग भगवान तेरी हा तेरी हा भाति भा के फूल सुरंग बहु री हारी हा भा भाती के पूण रंग भगवान के
री हा मेरी हा भाती भाती के फूल रंग बहु आन के य हा गावत मरम राल सुहाए गीतर गावत मोर मराल सुहा गरी गावत मोर मराल सुहा कररी नावत मोर मराल सुहाय ग सह चरी भरी आनंद करत रस ति रेहा सहसरी भरे आनंद कर तरस रे तेरे तेरी हा सहक भरी आनंद भरत रसे मे हा मेरी हा सह चड़ भरे आनंद कर सरस तेरी हारे हा वो सहचर भरी आनंद अरस रे तेरे रे हा री हा स चरी भरी आनंद करत रसते हेहा अलवे ले सुकुमार फिरत तेही थावरी हर बले सु को मार फिरत रत ही ठव विरत रे री दगा अंचल परि ग्रंथ लेत मन भावरी हाल ह ग्रंथ लेत मन भाग री हारी हो दगंल परि ग्रंथ शत मन भाव री हा तेरी हा ल परि गंथ त मन सावरी री हा री हा दृग अंचल परि गंथ एक मन भावरी री हा री हा ृ गजल परि गं मनरी श्री राधा मोहंड महाराज की जय हो परिगम मन भावन ग ग मन अंचल परि गंथ तवन भावरी मजल परगति त मन भावरी हा कंगना प्रेम नूप कबहु नहीं छू कही गगना प्रेम करो पर कबहु नहीं छूट यो डोरी रूप सहज सोना टूट ही हायो डोरी रूप सहज सोना ट री हा हो कोयो डोरी रूप सहज सोन टूट री हा री हा बोयो डोरे
रूप जहद तो ना री हारी हा यो डोरी रूप सहज सोना टूट री हा हा यो डोरे रोज सोना तो रहे हा रच रहे कोमल कर हरु चरण सुर री रच रहे कोमल कर अ चरण सुरारी सहज छवि ले कुंवर निपन सब अरी री हा सहज छप कोवर निपन सब आ ग री हारी हा हो सहज छरी ले कुम न सब अंगरी मेरी हारी हाह छबीले कुवर पुन सब आंगरी री हारी हा हो सहज छवि ले कुवर मैं सब अरी तेरी हा तेरी हा सहज छवि देख पुन सब आगरे हनु पुर कंकन केनी बाजे बाजनी नपुर ककन किने बाज बात कोटि अनंग नारी सब ला रिहा निरत कोटी अनंग नारी सब ला है तेरी हार कोटि अनंग नारी सब नार री हा री हा र तत कोट अनंद नाई सगला री हारी हा हो निरे तत कोटि अनंद सारी सबला तेरी हा री हा निरत कोटि अन ार सब हा बाढ है मन माही अधक आनंद री यो है मन माहे अधिक आनंद रे अधिक आनंद अधिक आनंद ही भूले फरात किशोर वृंदावन चंद तेरी हा फूले शरत किशोर वृंदावन चंदरी री री फूले फिरत किशोर वृंदावन क री हा फूले पिरस किशोर वृदावन हो सखि अन किए बहु चार अनेक विनोदी सखि अन की बहु चार अनेक विनोद अनेक विनोद अनेक विनो
मरी दूधा ती हेत बढ़ो मन मोगरी री हा दूधा भाती हेत बढ़यो मन मोदर गदा भाति है बरो मन मो ग री हा री हा धा भा पयो मन मोरी री हारी हा ददा भाती त भज मन मोरी री हा री हा खदा खाते बड़ो मन मो नलिता लाल की बात जब ही स न कही लत लाल की बात जब ही सखी यन कहे लाल की बात जब ही सके अना कही लाल की बात जब ही स सख अन कहे हा लाज सहित सुकुमारी सहित सुकुमारी ट पट जरही हे हा लाल सहित सु कुमार सहित सु कुमार ट पट हा नमित व सेवा कोवरी नहीं बोलही गव वि सेव कोवर नरहे श सवा कुबरी नहीं बो सेव गोवर्धन बोल हा बुद्धि बल करत उ पाय हा करता उपाय घुघट पट होल यहा बुद्धि बल करत उपाय करत उपाय भ गट पट थो ल हा कनक कमल कर नील कलन कन कमल नेल कल कल बने कमल कर नीला कल अति पना कमल कर नील कल अ कल हे हा सत सखी सुख हेरी सखी सुख भरी सहज शो भागनी हे हा हसत सके सो कहे सके सो गरे सहज शोभा गड़ हा पाम चरण सो शीष लाल को लाम चरण सो शस लाल कोव चरण सो शीस लाल को लाव चरण सो शस लाल कोवले शहा पानी वारी कुंवरी पर वारी कुमरी पर पियरी पिया हा पानी बार
को हरी पर बार को हरी परती अरी वावही यहाली सुगंध उबार सुगरी हवा ग मेरी सुगंध उ स्मी मेरी हवाव सुगंध उ गार सुबीर हवाव सुगंध उ गार सु हवा बहा समज उरी मु सकाई उरी मु सिकाई अज का सुख आवरी हेहा समुझ कुमर मोस काए कुमर मोस काए अध का सुख पाव हे हा और हास पर परिहास रहसी रस गंग न हास परिहास रहसी रस रग रयो हस परिहास रहसी रस रंग रयो हस परिहास रहसी रस रंगहा नित्य बिहार विनोद बिहार विनोद यथा मति कछु करो नेत बिहार विनोद बिहार विरोध यथावत कचो प्रयोग हा अंचल उठ स स सखी सब देरी ट आशीष सखी सब देरी हा अंचल ओट असस सख सबद ट शस सखी सब पल पल बढो सुहाग प्यारी तेरो पल पल बढो हा चरी चरो पल पल बढ़ो मेरी हा तेरो बल बल प्यारी तेरो बल बल ब प्यारी तेरो बल बल बढ़यो सुहाग हा बढ़ो सुहाग हा बढ़यो सुहाग नन सु फले गरी प्यारी तेरो पल पल बढ़ो सुहाग बढ़ो सुहाग न खले हा जैसे नवल विलास नवल नवरा कर नवल विलास नवल नव नाम करे हा जैसे नवल विलास नवल नवला नवल विलास नवल नवला करहा हम मन मन की रुचि जान रे हा मन मन की रुच जान रुच जाना रो जान
नेह सरे रे हा मन मन के रोच जान रुचि जान ह विध अनसर हेहा बैठी है नेज कुंज कुंवरी मन हो नव कुंद कुरी मन मोहनी यहा बैठी है निज कुंज कोवरी मन हो कुंज कोवरी मन मो री तेरो लकत रूप अप प्यारी तेरो झलक तर हा हा प्यारी तेरो जल कतर रूप हा प्यारी तेरो लकत श्यामा प्यारी तेरो लक का रूप प तेरो लकत रूप अपार हा रूप अपार रूप अपार सहज की सोमनी प्यारी तेरो जल गत रूप अ हरूप अपार सहज अति सोहने हे हा चाहि चाही सरूप कसर रूप रस कसर मोरहा चाहे चाहे सरूप रसिक सर मोर सोरूप रसिक सेर मोर रे आए दो नैना री हा भरि आए दो नैन आए दो नैन आए दो नैन भई गति री री हा भरि आए दो नैन आए दो नैन गति और हे हा अति आनंद को मोध न कुरही समात आनंद को मोध न रही समात हा अति आनंद को मन न हो रही समान आनंद को मोल रही समांतर हारी जी रीज र सवी जी री हमारी जी रीजी रस भीजे रीज रस भीजी रीजी रस भेजे आप बली जातरी हा रेज रेज रस भज रेज रस भजे आप बन जात हा अरु जे मन अरु नैन बढ़ो अनुराग मन अरु नैन बढ़ो अनुराग री हरु से मन अरु नन बढ़यो अनुराग मन अरुन
बढ़यो अनुराग हा एक प्राण द्वे देहा एक प्राण दव देह दे नागर अ नागरी हा एक प्राण दव दे प्राण दव दे नागर अरु नागरी हा यो राजत दो प्रीतम हसी प्रीतम हसी मुस कातर राजत दो प्रीतम हसी मुस का प्रीतम हस मुस कारे हानि राखी परस्पर री हा रख पर रूप परस पर रूप परस पर रूप ना कबहु अघात जी रेहा निर परस्पर रूप परस्पर रूप बहु आधार देहात नहीं के सुख रंग सखी देन रंग मही सुख रंग सखी देन रंग मही रे हाथ नहीं के सोख रंग सके रंग सुख रंग सखी देना रंगम के तेरी अब और ना कछु सुहा अब और ना कछ री हा आवा और ना कछू री हा और ना और ना कछ और ना कछु सुहाए ना कछु सुहाए ना कछु सुहाय एकरस सब प और ना कछु सुहारी गचो सुहाय एकरस सब पद हा उ भय रू परस सिंधु मगन जहा सब भई उय रू रस सिंधु मगन जहां सब मगन जहां सब मगन जहां सब भए दुर्लभ श्री पति आदी सोई सुख दिन नहीं री हा दुरल श्री पति आ सई सुख बन री हा हो दुर्लभ श्री पति आरी सोई सुख दिन दुर्लभ श्री पति आद कोई सुख री हा ल श्री पति आरी सोई सुखना नहीं री हा दुर्लभ शी पति आ कोई सुख हाहित
ध्रुव मंगल सहज नित्य जो सहज नित्य जो काव र ध्रुव मंगल सहज नित्य जो सहज नित्य जो गाव सर्वोपरि सोई होई प्रेम रस पाहा सर्वो पर सो होई प्रेम रस पा तेरी हा सर्वोपरि सोई होए प्रेम रस पावन मेरी हा मेरी हा सर्वोपरि सोय होई प्रेम स मंगल सहज ने सहज नेत जो गाव सरई हो प्रेम रस पाव मंगल सहज सहज जोव सर्व पर सई होई प्रेम रस पावरी सर्वो परि सई होय प्रेम रस पाव री हा मेरी हा सर्वो पर सोई होई प्रेम रस जय जय श्री वृंदावन धाम रसिक मन धाम रसिक मन ई ल दुलहिन ज सजता सो
गई ज वृंदावन धाम रसिकन धाम रसिक मन मो हरी दल दुलहिन सहजता स हरी श्री वृंदावन का हो लाड़ जू थारो थारो अवि चल रहो जी सुवा ओ लाड़े जो यो धारो अवे चल र जी सुहा हो लाड़ जू खारो थारो अविचल रहो जी सुहा हो लाड़ जो ारो ारो चल सुहा लाड़ ज थार विचल रघु जी सुहा ड़ जो थारो अभ चल रहो जी सुहा अलक लड़े रजवार लस अलकल बजवा लस लक लड़ रजवार चल सोलक लड़ रिवाय शैल स नितन बढ़ो अनुराग प्या री नित नाव बढो अनुराग प्यारी निनव बड़ो मनराग प्यार नत बढो अनुराग अग नित नव बढ़ो अनुराग प्यारी तरा अनुरा लाड़ी जू थारो थारो अभ चलल रहो जी सुहा लाड़ जोरो धारो अ चल रहो जी सुहा यो नित बहरो ललिता दि का संग यो नेत बहारो ध वृंदावन निजु बाग प्यारी वृंदावन ण जोवा प्यारी वृंदावन निजु बाग प्यारी वृंदावन निजवा जय श्री रूपा हित यु गलाने हलग रूपाली त युगा नेहल की मानत निजु बड़ भाग प्यारी मान कर जो बड़ भा लखी मान तन जो बड़ भाग लखी मान तन जो बड़ भाग मानत जो बड़ भा लखी मान तने जो बड़ भा हो लाड़ जू थारो थारो अभी चल प्रज सुहा जोरो थारो अवि चल
रहो जी सहा लाड़ी थारो अवि चल र जीी सुहा लाड़ जो थारो अविचल अवि चल चल होहा आ
यह पाठ वीडियो के स्वचालित (auto-generated) उपशीर्षकों से लिया गया है — इसमें शब्दों की त्रुटियाँ हो सकती हैं। प्रामाणिक वचन के लिए वीडियो अवश्य सुनें।
मूल वीडियो: Shri Hit Radha Kripa (YouTube)
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