यमुना जी के पावन तट पर नाम जप की अद्भुत महिमा । 24.06.26
श्री धाम वृन्दावन पर पूज्य महाराज जी के वचन — ऊपर वीडियो में सुनें।
पूरा प्रवचन
ब्रह्म भगवान से भी बढ़कर के भगवान का नाम है। भगवान के नामों के जपने का फल अनंत है। आप जो चाहोगे प्राप्त हो जाएगा। नाम जप का फल इतना ही है। ऐसा वर्णन करना असंभव है। कहो कहां लगी नाम बढ़ाई और राम न सके नाम गुण गाई। भगवान के नाम का इतना फल है कि स्वयं भगवान भी यदि नाम के जप का फल का वर्णन करना चाहे तो नहीं कर सकते हैं। नाम ग्रहण करते ही जैसे गुरुदेव से मंत्र मिला और नाम मिला और आपने नियम लिया कि अब मैं अधिक से अधिक नाम जप करूंगा उसी समय से भगवान ने आपको स्वीकार कर लिया।
जब भगवान ने स्वीकार कर लिया तो अब मेरी दुर्गति कैसे हो सकती है? नाम जैसे भगवान चिन्मय है जो भगवान का स्वरूप है सच्चिदानंद रूपाय सत चित आनंद भगवान का स्वरूप है सच्चिदानंद में तो नाम कैसा है बोले चिन्मय ऐसा चिन्मय नाम है कि सच्चिदानंद भगवान को अधीन कर ले। सुमिर पवन सुत पावन नामु अपने बस कर राखे रामू। नाम जप करते हुए हनुमान जी ने भगवान राम को अपने अधीन कर लिया। महाराष्ट्र के संत नाम जप करते हुए एकनाथ जी के यहां शिखंडिया नाम रूप धारण करके भगवान ने कई वर्ष उनकी सेवा की।
कई वर्ष सेवा की। नाम जप का इतना बड़ा प्रभाव है कि स्वयं भगवान सेवक बन जाते हैं नाम जापक के। नाम दिव्य है। जैसे राधा, राम, कृष्ण। यह अक्षर मात्र नहीं है। इसको जितना आप अपनी जिह््या से रगड़ोगे तो जैसे दो लकड़ियों के रगड़ने से अरण्य मंथन उसे ही कहते हैं। अग्नि प्रज्वलित हो जाती है। ऐसे जिभ्या और नाम के घर्षण से ज्ञान अग्नि प्रकट हो जाती है। दिव्य ज्ञान दिव्य प्रेम प्रकाशित हो जाता है। जो नाम और जिभ्या दोनों को रगड़ते राधा राधा राधा राधा त जप तदर्थ भावनम अगर नाम जप कर रहे हैं और नाम का ही ध्यान कर रहे हैं तो बहुत जल्दी लाभ प्राप्त होगा।
राधा हमारे आंखों के सामने लिखा है राधा और हम नाम जप कर राधा राधा मंत्र जप कर रहे हैं पूरा मंत्र आंखों के सामने लिखा है फिर हमारी मन का गुरिया चल रही इसमें बहुत टाइम लगेगा लेकिन यह बहुत लाभदायक है त जपस तदर्थ भावनम जो जप कर रहे हो वही तुम्हारे भाव में होना चाहिए। अब जैसे नाम जप कर रहे हैं, सांसारिक बातें कर रहे हैं, सांसारिक चिंतन कर रहे हैं। एक व्यर्थ तो नहीं जाएगा पर बहुत समय लगेगा। जन्म के जन्म लग सकते हैं। नाम जप कर रहे हो और नाम ही दिखाई दे रहा है।
राधा राधा राधा त जपस तदर्थ भावनम उसका एक एक अक्षर उसका एक एक भाव तो कुछ समय बाद चिन्मय व पुधारी नामी उसके मानस पटल पर झलकने लगता है नाम जापक के सामने देख रहा है प्रिया प्रीतम भावना में पुलकित हो रहा है, रोमांचित हो रहा है, अशुधारा बहने लगती है। एकांत में रोना आता है। जब आप खूब जप करो तो एकांत में रोना आता है। नाम जप करते समय यदि कहीं नामी का ध्यान हो जैसे हरिवंश महाप्रभु ने कहा सबशोहित निष्काम मति श्री वृंदावन विश्राम श्री राधा वल्लभ लाल को हृदय ध्यान मुख नाम हृदय में देखा प्रफुल्लित वो मुस्कुराते हुए राधा वल्लभ लाल जी और मुख से राधा वल्लभ श्री हरिवंश राधा वल्लभ श्री हरिवंश जीवन कृतार्थ हो जाएगा।
नाम और नामों का शब्द इसमें बड़ी सामर्थ है। जैसे हमने कहा राधा यद्यपि अपार सामर्थ राधा राधा लेकिन राधा शब्द जब हम लिखते हैं अपने मानस पटल पर और राधा नाम उच्चारण करते हैं तो बहुत बड़ी सामर्थ हो जाती है। बहुत बड़ा संयोग बन जाता है। बहुत बड़ा हमारे अंदर ऊर्जा शक्ति का संचालन होने लगता है। जब हम नाम का ध्यान करते हुए नाम का जप करते हैं। नाम की जो प्रभुता है, महिमा है, अनुभव संपन्न संतो और साधकों ने वर्णन किए हैं। बड़े-बड़े महापुरुष में हैं। इसी नाम के बल से गोस्वामी जी ने तो नाम को राम नाम को राम जी से भी बढ़कर के माना है।
उन्होंने कहा भी है कि वो कोई बिरला नाम जापक होगा जो भगवान से भी बढ़कर भगवान के नाम को प्यार करता है। भाई जी श्री हनुमान प्रसाद पोदार जी ने कहा कि यदि भगवान स्वयं खड़े हो और नाम जप छोड़ने की बात छूटने की बात हो तो नाम जप मत छोड़ना भगवान चले जाए तो चले जाए क्योंकि जैसे डोरी और पतंग नाम है डोरी भगवान है पतंग अगर डोरी छूट गई तो पतंग हाथ आने वाली नहीं अगर डोरी हाथ में है तो जाए पतंग कहां जाएगी वो तोड़ के वही आएगी नाम यस्मिनस्त मति नया नरकम स्वर्गपी यत चिंतने जिसका नरक जाना निश्चित हो चुका है।
ऐसे पाप हो गए हैं और उसने शुरू कर दिया नाम जपना तो निश्चित समझो उसके लिए नरक का द्वार बंद हो गया। भले वो 100 200 बार ही नाम जप करता हो। विश्वास करो। विश्वास से ही भक्ति बढ़ती है। विश्वास से ही भगवान की प्राप्ति होती है। बिन विश्वास भगत नहीं ते बिन द्रह न राम और राम कृपा बिन सपने जीव नल विश्राम जिसका नरक जाना निश्चित हो चुका है। अगर उसने नाम जप करना शुरू कर दिया 100 200 बार भी तो नरक का दरवाजा उसके लिए बंद हो गया। वो कह रहे स्वर्गोपियत चिंतने यदि वो चिंतन करेगा कि मुझे स्वर्ग मिल जाए तो स्वर्ग मिल जाएगा।
और विघ्नो यत्र निवेशितात्म मनसो ब्रह्मो लोको कहा यदि वो चाहेगा तो ब्रह्मलोक भी प्राप्त हो जाएगा। कोई विघ्न नहीं पड़ेगा। मुक्ति चेतस अगर वह चाहेगा तो मोक्ष भी प्राप्त हो जाएगा। स्थितो अमल पुष ददाद किम चित्रम यदगम प्रयाति विलयम तते कीर्तते अगर वो चाहेगा तो कीर्तिवान भगवान श्री हरि से प्रेम भी हो जाएगा। नर्क का दरवाजा बंद हो गया। स्वर्ग चाहोगे तो मिल जाएगा। ब्रह्मलोक चाहोगे तो मिल जाएगा। मोक्ष चाहोगे तो मिल जाएगा और प्रेम चाहोगे तो मिल जाएगा। कब? जब भगवान के नाम जप का आश्रय ले लिया।
कलयुग में और कोई साधना सिद्ध होना बहुत कठिन है। जैसे अष्टांग योग है, सांख्य योग है। बड़ा कठिन है और उन सबका फल मोक्ष है। बिना श्रम के बिना कठिनता के, बिना विशेष नियमों के पालन के, प्रेम तक की प्राप्ति कराने वाला, मोक्ष प्रदान करने वाला, ब्रह्मलोक प्रदान करने वाला, स्वर्ग प्रदान करने वाला भगवान का नाम है। नाम के द्वारा सैकड़ों जन्मों की पाप राशि को हम भस्म कर देते हैं। यह जो नाम अभी जप रहे हैं आप और नाम जपने में आपको सुख नहीं मिल रहा है। उसका कारण पूर्व जन्म के पाप है।
जब हम हठ पूर्वक निरंतर अधिक से अधिक नाम जप करेंगे तो हमारे इस जन्म के पाप और पूर्व जन्म के भी पाप नष्ट हो जाएंगे। ध्यान से सुनिएगा। बहुत कीमती समय है और बहुत पावन जगह में बैठे हुए हैं। जब आपका अधिक से अधिक नाम जब चलेगा तो इस जन्म के और पूर्व जन्म के पाप जे ही पाप नष्ट हुए तभी आपके हृदय में आनंद छाएगा। एक अलौकिक आनंद फिर नाम छोड़ने का मन नहीं होगा। अगर नाम छूटने की बात आएगी तो आपको भय लगेगा, डर लगेगा, जलन पैदा हो जाएगी। त स्मरण परम व्याकुलते यहां तक कि त्रिभुवन की राज लक्ष्मी देने पर भी आधे पल के लिए अपने प्रभु का सुमिरन ना छोड़े वही महाभागवत है।
सकृत स्मृतोपी गोविंदो नम जन्म स कृतम एक बार यदि भाव से बोल दिया गोविंद तो बोले सैकड़ों जन्मों के पाप नष्ट हो जाते हैं। सकृत माने होता है एक बार। ध्रुवदास जी ने भी कहा है एक बार जिन नाम लिए हित सोए अति दीन ताको संग न छाही ध्रुव अपनो कर लीन पाप रास दहत्यासु तूल रावाला बोले उसके पाप कैसे नष्ट हो जाते हैं जैसे पहाड़ लगा हो रुई का और उसमें आग लगा दी जाए तो एक क्षण में भस्म हो जाता है। ऐसे गोविंद गोविंद हरे मुरारी गोविंद गोविंद मुकुंद कृष्ण गोविंद गोविंद रथांग पाण गोविंद दामोदर माधवेति जो भगवान के गोविंद गोविंद राधा राधा राम राम कृष्ण कृष्ण हरि हरि ऐसे नामों को जपता रहता है तो रास के रास पाप उसके ऐसे नष्ट हो जाते हैं जैसे पहाड़ लगा हो रुई का और एक दिया सलाई लगाओ तो पूरा पहाड़ भस्म हो गया रुई का ऐसे कह रहे हैं तूल रास मिवा नला तूल कहते हैं रुई को मिला माने अग्नि यु जैसे अग्नि स्पर्श होते हुए देर न लगा सेकंड में भस्म हो गया ऐसे ही भगवान का नाम उच्चारण कर तो आप प्रश्न कर सकते हैं हम तो बहुत समय से नाम जप कर रहे फिर हमारे पाप नष्ट क्यों नहीं हो रहे?
क्योंकि हमारे कोई 100 जन्म के पाप नहीं है। अनंत जन्मों के पाप है। जब से सृष्टि हुई तब से आज तक के हमारे पाप सब जमा है। अगर वह नष्ट हो गए होते तो हमें भगवत प्राप्ति हो गई होती। इसलिए नाम स्मरण धैर्य पूर्वक करो। बिल्कुल मत सोचो फल मिला कि नहीं मिला? मिलेगा कि नहीं मिलेगा? मैं नाम जप कर रहा हूं। पता नहीं प्रभु को पता है कि नहीं कि मैं नाम जप कर रहा हूं। उनका एक एक सेकंड का हिसाब मिलेगा। एक एक पल वह आपको देख रहे हैं कि आप उनका नाम जप कर रहे हैं। जो आपके जीवन में कष्ट आ रहा है वह स्वयं भेज रहे हैं।
आपको निष्पाप करने के लिए आप धैर्य पूर्वक नाम जप कीजिए। नाम जप से बढ़कर कोई साधना
यह पाठ वीडियो के स्वचालित (auto-generated) उपशीर्षकों से लिया गया है — इसमें शब्दों की त्रुटियाँ हो सकती हैं। प्रामाणिक वचन के लिए वीडियो अवश्य सुनें।
मूल वीडियो: Bhajan Marg (YouTube)
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