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मन लगे न लगे, हमें बस नाम रटना है | यमुना तट सत्संग (26-06-26)

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श्री धाम वृन्दावन पर पूज्य महाराज जी के वचन — ऊपर वीडियो में सुनें।

पूरा प्रवचन

कलयुग है। इसमें जो शास्त्रों में बड़े-बड़े साधन पवित्र बताए गए हैं। उनका निर्वाह करना कठिन है। निर्वाह होने पर भी जो फल की प्राप्ति होती है वो प्रेम नहीं होता। किसी अन्य साधनों से या गुण साधन ते नहीं होई तुम्हारी कृपा पाव कोई कोई जो भगवत प्रेम है ये अन्य साधनाओं से नहीं होता ये भगवत कृपा से होता है भगवत कृपा का स्वरूप क्या है हरिवंश कृपा हरिवंश कहे और हरिवंश कहे हरिवंश लाए हरिव हरिवंश सुलाभ सदा तिनके सुख संपत्ति दंपत्ति जो जिनके हरिवंश कृपा का स्वरूप है कि हमारी जिभ्या हर समय श्री हरिवंश राधा वल्लभ श्री हरिवंश राधा वल्लभ श्री हरिवंश ये रचती रहे हे दिव्य रस सारगे संततम मधुर प्रिय श्री राधा नाम पीयूषम प प्रीत्या निरंतरम नाता पर तरह पायो दृश्यते समताम श्रताम सारात सारतम शुद्धम सर्वेशाम मुक्ति दम परम हे जी वे तू रस को बहुत स्वाद लेने वाली है।

रस्द कहते हैं। महाप्रभु ने भी कहा राधा नाम सुधा रसम रसीत जो में हे जि रस सार संतम मधुर प्रिय राधा नाम पयूषम प प्रीत निरंतरम जि तसारों के सार परमोत्तमा प्रेम प्रदान करने वाले बड़ा स्वादिष्ट अमृत से भी स्वादिष्ट क्योंकि अमृत तो देवताओं ने भी पिया है उससे भी महिमाशाली राधा नाम पियूषम पी प्रीत्या निरंतरम प्रेम पूर्वक निरंतर राधा राधा राधा जप के तो देखो जीव को समझाना चाहिए हे रसना तुम मधुर प्रिय और रस सार को परखने वाली हो। सब कुछ चखा। अब एक बार नाम का स्वाद लीजिए।

निरंतर प्रीति पूर्वक नाम का पान कीजिए। भगवान शंकर ने सभी ग्रंथों सभी शास्त्रों का मंथन किया और कहा कृतम सद ग्रंथ शास्त्र नाम निर्णयम परम मया श्री नाम स्मरणम सारमन्यम निरर्थकम सब शास्त्रों का सार मंथन करके भगवान शंकर जी ने कहा कि नाम जप यदि हो रहा है तो आपका जीवन आपकी साधना ठीक चल रही है और नाम जप नहीं हो रहा है तो कह रहे हैं निरर्थकम उसका जो अंतिम परिणाम होगा वो कोई खास नहीं होगा। भगवान के नाम में अपार सामर्थ है। इसको ऐसे रखा गया है। जैसे मधुमक्खी हर पुष्प से थोड़ा थोड़ाा पराग लेकर एकत्रित करती है और ऊपर से ढक के अंदर शहद को रखती है।

कहीं शहद है नहीं किसी फूल पर। किसी फूल को निचोड़ो तो शहद निकलेगा क्या? लेकिन यह कला मधुमक्खी की है कि हर फूल से पराग एकत्रित करती है और उसे शहद बना के इतना मीठा इतना स्वादिष्ट बलिष्ठ और रोग हरण करने वाला लेकिन ऊपर वो रहती है। जो कोई मधुमक्खियों को हटा सके वही शहद का पान कर सकता है। ऐसे सब शास्त्र उनके लुभावने वाक्य और उनका सबका सार रखा गया है नाम रूपी सहद। अब माया के काम, क्रोध, लोभ, मोह, मद, मत्सर, नाना प्रकार के साधनों के सुंदर फल इन सब से मन को हटा के कोई शहद की भांति यदि नाम का पान करना चाहे तो उसको प्रेम की प्राप्ति हो जाए।

नाम सहद है और सब साधन पुष्प पराग है। सब साधनाएं पुष्प और पराग है और उन्हीं से निकाला हुआ नाम शहद है। जैसे मधुमक्षिका निकास सारी फूलनते गात विशेष बात विदित विशेष है। ऐसे ही सुसंत सुधि सुतन समूह मति सुनाम रंग रूप वेश है जो प्रभु का नाम है वो मधुमक्खियों के द्वारा जैसे निकाला हुआ शहद ऐसे ब्रह्म ऋषियों के साधनों के समस्त साधनों का सार नाम है। नाम रटना है। यहां कह रहे हैं नाम रटना है। राधा वल्लभ राधा वल्लभ श्री हरिवंश राधा वल्लभ श्री हरिवंश राधा वल्लभ श्री हरिवंश मन लगे ना लगे हमें नाम रटना है सब संतों का श्रुति शास्त्रों का सार है भगवान से जुड़े रहना अब हम राम बोले कृष्ण बोले हरि बोले राधा बोले तो हम जुड़े हैं ना भगवान से हमें जुड़े रहना है आप इस बात पर विश्वास कीजिए कि नाम से बढ़कर कोई साधना नहीं है।

कोई इसमें विधान नहीं है। कि आप ऐसे बैठकर के करो पद्मासन में बैठकर के करो। आप एक बार अन्न पा के करो आप उपवास कुछ नहीं। आप जैसे हो पवित्र हो या अपवित्र हो। आप सोच में बैठे-बैठे भी राधा राधा जप सकते हैं और जपते ही हैं। नहीं तो सोच में मर जाएंगे तो फिर हमें तो हर समय सावधान रहना है कब प्राण निकल जाए तो सोच होते समय भी अंदर ही अंदर भगवान नाम राधा फिर निरंतरता कैसे रहेगी अंतर पड़ जाएगा ना मंत्र जपा नहीं जाता अपवित्रता में मंत्र नहीं जपा जाता लेकिन नाम जप किया जा सकता है अगर जीवन में एक बार भी राधा राधा नाम उच्चारण हो गया है तो विश्वास मानिए आप नर्क नहीं जाएंगे।

जो इतना महिमामय नाम है उसको हम एक बार ही क्यों ले निरंतर क्यों ना ले जिससे हमें प्रियाल मिल जाए प्रभु मिल जाए। देखो अजामिल ने अपने पुत्र को पुकारा था ना कि भगवान को नारायण इतने में ही भगवान के पार्षद आ गए और नाम के प्रताप से यमदूतों की फांसी काटकर यमदूतों को भगा दिया और परिणाम में अजामिल को भगवत धाम की प्राप्ति हुई। पुत्र के बहाने नारायण पुकारने से सच्ची बुद्धि से विचार करके सब छोड़ दीजिए जितने भी साधन है बने तो बने नहीं सब छोड़ दीजिए नाम पकड़ लीजिए आप गंगा स्नान किए फिर पाप किए फिर गंगा स्नान किए फिर पाप किए तो हाथी के स्नान जैसा रहा आपकी पाप की प्रवृत्ति नष्ट नहीं हुई।

इसलिए नाम जप कीजिए। नाम पाप और पाप की प्रवृत्ति दोनों का नाश कर देगा। जीवन का आधार बना लीजिए। समस्त सारों का सार जो नाम है उस नाम से ही तुम्हारा कल्याण होगा। एक तो हम कलयुगी कलयुग में प्राय मन गंदी बातों में ज्यादा लगता है। सांसारिकता में ज्यादा लगता है। भजन में नहीं लगता है। अच्छे बनावटी कपड़े पहनना, बनावटी बातें करना, बनावटी भोजन पाना, बनावटी जीवन हो जाना ये कलयुग का प्रभाव है। आज ये पता नहीं चलता कि आदमी सही बोल रहा है कि नहीं बोल रहा है। विश्वास नहीं रह गया है कि आदमी बोल रहा है कि सही सही बोल रहा है कि नहीं बोल रहा है?

पूरा का पूरा 100% भी झूठ बोल सकता है। 100% एक तो कलयुगी मानो उसमें भी थोड़ी आयु उसमें भी रोगों की बाहुल्यता अब नए-नए बच्चे चश्मा लगाए हैं। 500 शुगर है। हाई ब्लड प्रेशर लो ब्लड प्रेशर। कैंसर तो ऐसे हो रहा है जैसे जुखाम बुखार हो रहा हो। पहले जैसे जुखाम बुखार किसी किसी को होता था ऐसे अब कैंसर हो रहा है। कैसे भजन करें और आहार तो अशुद्ध शुद्ध आहार का अभाव मन स्थिर नहीं। कैसे कल्याण होगा? आप विचार करके देखो। कलयुग का प्रभाव आयु थोड़ी रोग अनेक भोजन अशुद्ध मन स्थिर नहीं और संग गलत कोई बिरला ही ऐसा संगी होगा जो हमें भगवान की तरफ लगावे नहीं हमारा संग जो है मन गलत और हमारा तन का संग गलत तन मन दोनों का संग गलत अब नाना प्रकार की साधनाएं इतनी तपस्याएं लिखी हुई है शास्त्रों में भगवत प्राप्ति के लिए वो हमारे लिए पहाड़ उठाने के समान है।

जो साधनाएं हैं वो पहाड़ उठाने के समान है। युगों पढ़ते रहो। इतने शास्त्र हैं। इतने साधन है। निर्णय नहीं कर पाओगे। किस में चले, क्या करें, क्या ना करें। मोह ममता अपना प्रभाव दिखा रही है। परिवार से, शरीर से, भोगों से इतनी प्रियता है कि भगवान से बिल्कुल प्रियता नहीं। उस तरह की है। तो इसीलिए सभी जीवन का, सभी शास्त्रों का, सभी साधनों का सार निकाला गया है। नामामृत नाम सारों का सार आनंद सिंधु को अधीन कर लेने की सामर्थ नाम में है। सुमिर पवन सुत पावन नाम अपने बस कर राखे रामू भगवान शंकर जी सदैव नाम जप करते रहते हैं।

उनको क्या चाहिए? वो तो आनंद समुद्र है। रामचरितमानस में आया है कि होई सो जो राम रच राखा को कर तर्क बढ़ाव शाखा अस कह जपन लगे हरि नामा सती गई जहां प्रभु सुखधामा ये प्रसंग में आता है तो भगवान भी नाम जप करते हैं। बड़े-बड़े ब्रह्म ऋषि बड़े-बड़े महात्मा नाम जप करते हैं। देखो सनक सनंदन सनातन सनत कुमार हर समय हरि शरणम हरि शरणम हरि शरणम ऐसा जपते हैं। नाम प्रकाशमान रत्न है। और सब साधन दीपक है। दीपक को हवा बुझा सकती है। लेकिन रत्न के प्रकाश को हवा बुझा नहीं सकती।

आंधी आवे माया की तो साधना रूपी दीपक बुझ सकता है। लेकिन रत्न रखा है, मणि रखी है और जगमग जगमग हो रही तो धूल भरी आंधी क्या बिगाड़ लेगी उसका? तो सब साधनाएं दीपक प्रकाश देने वाले और नाम है मणि प्रकाश देने वाला। जैसे गोस्वामी जी ने लिखा है राम नाम मणि दीप धर जीह दे हरी द्वार तुलसी भीतर बाउ जो चाह सुझ हृदय में भी और बाहर जगत में भी यदि आनंद चाहते हो तो भगवन नाम मणि को अपनी जिभ्या पर रख लो भयंकर कलिकाल इसके जितने दोष और भयंकर पाप सबको नष्ट करने की सामर्थ नाम में है।

और नाम जपने के लिए कोई ऐसा नहीं कि जवान होना चाहिए कि बूढ़ा होना चाहिए कि पढ़ा होना चाहिए कि ब्राह्मण होना चाहिए, क्षत्रिय होना चाहिए कि वैश्य होना चाहिए कि शूद्र होना इससे कोई नहीं। पुरुष नपुंसक नारीवा जीव चराचर कोई कोई शब्द में आ गया जीव चराचर कोई सर्व भाव भज कपट तज मोह परम प्रिय सोई भगवान ने कह दिया तो नाम असरण शरण है कोई भी नाम जप कर सकता है गुणहीन पापाचारी व्यसनी सब कोई नाम जप कर सकता है। यदि आप नशा नहीं छोड़ पा रहे तो नाम जप शुरू करो। नशा छूट जाएगा।

आप गंदी आदतें नहीं छोड़ पा रहे। नाम जप करो गंदी आदतें आपकी छूट जाएंगी। नाम अहंकार को नष्ट कर देता है। अमानी बना देता है। अमानना मान देना। स्वयं अमानी रहकर दूसरों को मान देना। ये नाम भगवान की कृपा से आता है। नाम भगवान मानो तीक्षण तलवार है। सब पापों का सब दुर्गुणों का नाश करने के लिए। इसलिए भलीभांति मन में स्वीकार कर लो कि समस्त रसों का खान प्रभु का नाम है। अब नाम छोड़कर के हमें अन्य साधनों की तरफ नहीं भटकना। जितना समय मिले अधिक से अधिक राधा वल्लभ श्री हरिवंश राधा वल्लभ श्री हरिवंश राधा वल्लभ आपका परम कल्याण परम मंगल हो जाएगा कलयुग है कलयुग केवल नाम अधारा सुमिर सुमिर नर उतर पारा हां।

यह पाठ वीडियो के स्वचालित (auto-generated) उपशीर्षकों से लिया गया है — इसमें शब्दों की त्रुटियाँ हो सकती हैं। प्रामाणिक वचन के लिए वीडियो अवश्य सुनें।

मूल वीडियो: Bhajan Marg (YouTube)

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