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यह रहस्य सबको नहीं पता | यमुना तट सत्संग (29-06-26)

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श्री धाम वृन्दावन पर पूज्य महाराज जी के वचन — ऊपर वीडियो में सुनें।

पूरा प्रवचन

जय जय श्री हरिवंश जय साधना की नीव है अपने को लाडली जी की दया पर उनके अनुग्रह पर उनकी कृपा पर पूर्ण छोड़ देना अपना भार अपने इष्ट के चरणों में समर्पित कर देना। यह साधना की नीव है। यही नहीं हो पाता। हम अन्य आश्रय लिए रहते हैं। अहंकार का आश्रय लिए रहते हैं। श्री जी का संपूर्ण रूप से आश्रय नहीं ले पाते हैं। अगर संपूर्ण रूप से आश्रय हो जाए तो बहुत जल्दी हमारे अंदर ज्ञान प्रकट हो जाए। और ज्ञान प्रकट हो जाए तो संसार का जितना राग है, जितने विकार है, जितनी अशांति है, दुख है, यह सब अंदर से खत्म हो जाए।

अंदर ही प्रभाव नहीं पड़ता। जिसने लाडली जी को सारा का सारा जीवन और सब भार छोड़ दिया श्री जी के ऊपर। [गहरी सांस लेने की आवाज़][अचानक ज़ोर से सांस लेने की आवाज़] उसका सारा भार श्री जी ने संभाल लिया। प्रभु ने संभाल लिया। अब सौंप दिया सब भार तुम्हें। फिर मारो या तारो कहे हम क्या? केवल भगवत आश्रित। ये शायद समझ भी नहीं पा रहे होंगे। देह का भाव पुष्ट होने के कारण अहंकार के कारण लगता है कैसे कैसे श्री जी को अर्पित कर दे कैसे कैसे श्री जी का वो अंदर का विषय होता है अंदर का विषय होता है सर्वतो भावेन इष्ट के चरणों में समर्पित हो जाना हमारे सर्वस्व प्रभु हैं प्रिया जो है यह बात नहीं आ पा रही है।

इतना मीठा लगता है संसार जो दुखाले है जो नाशवान है। इतने प्यारे लगते हैं परिवार के लोग। इतने प्यारा संसार लगता है कि लगता है अगर भगवान कृपा करें तो मुझे इसी संसार में भेजें। पर थोड़ा सुख समृद्ध करके भेजें। शरीर रोगी ना हो। रुपया पैसा हो और बढ़िया पत्नी हो, बढ़िया पति हो, बढ़िया पुत्र हो। ऐसा भगवान कृपा करें। क्यों? ऐसी चाह लगभग 98% हो गई कि भगवान हम पर अगर कृपा करें तो हमारी सारी समस्याएं मिटा दे, बढ़िया दुल्हन मिले, बढ़िया दूल्हा मिले, बढ़िया मकान मिले तो जय हो भगवान तुम्हारी।

शायद हमें तो लगता है कि अधिक मात्रा में यही चाह होगी। यह चाह कि भगवान मेरे हैं और मुझे इस जन्म में केवल भगवान को प्राप्त करना है। नहीं तो अन्य योनियों में हम भगवान को प्राप्त नहीं कर पाएंगे। मनुष्य योनि जहां छूटी तो कर्म बिगड़े तो सूअर, कुत्ता, पशु, पंछी, कीड़ा, मकुड़ा न जाने किस योनि में भेज दिए जाएंगे। फिर हमसे साधना नहीं बनने वाली। फिर हम नाम जप नहीं कर सकते। फिर हम कोई दान पुण्य नहीं कर सकते। फिर कोई तीर्थ स्नान नहीं कर सकते। देखो जब हम भाव से प्रणाम करके यमुना जी को स्नान करते हैं तो पवित्रता प्रदान करते हैं और इसी में कछुआ रहता है।

इसी में अन्य जीव रहते हैं। उनको कोई पवित्रता से थोड़ी मतलब उनको कोई साधना तपस्या भजन इससे कोई मतलब नहीं है। इसी मनुष्य योनि में हम साधना कर सकते हैं। तो हमारे सर्वस्व भगवान हैं। यह हृदय में बात आ जानी चाहिए। कितने लोगों के हृदय में बात आ गई कि हमारे सर्वस्व प्रभु हैं। प्रियाल है। हृदय में अंदर देखो अंदर देखो। यह बात हृदय में आ गई कि मेरे सर्वस्व प्रभु हैं। रिश्तेदार नातेदार तुम्हें हो माता च पिता तुम्हें हो। तुम्हें हो बंधु सखा तुम्हें हो। तुम्हें हो विद्या द्रविड़ तुम हो।

तुम हो सर्वम मम देव देव। मानिए आपके दुख का कारण है आपका अहंकार। प्रभु का समर्पण जो महा सुख प्रदान करने वाला है वह स्वीकार ना करने के कारण हमारी दुर्गति है। यह संसार नहीं जान पा रहा है। जिस क्षण यह भाव हुआ एक एक शब्द बड़ा महत्वपूर्ण है। बिना प्रयत्न के आपका उद्धार हो जाएगा। बिना प्रयत्न के आपका उद्धार हो जाएगा। जिस क्षण यह भाव हुआ कि प्रभु हमारे सर्वस्व है। बस यही कठिन बात है। मेरे प्रभु के सिवा मेरे तो गिरधर गोपाल दूसरो। बहुत बड़ा मंत्र है। मेरे तो गिरधर गोपाल दूसरो ना कोई।

प्रभु के सिवा मेरा कोई नहीं है। वास्तविक आप ईमानदारी से बताओ प्रभु के सिवा आपका कौन है? अभी शरीर छूटने लगे। अब कौन है? पत्नी, पुत्र, परिवार, धन, संपत्ति सब यही रह जाएगी। अकेला जीव यहां से जाएगा। दुनिया में लाखों का मेला जुड़ा। हंसा जब जब उड़ा तो अकेला उड़ा। बस यही आके हम फंस गए। यदि हम इनमें भगवान देख पावे पर बड़ा कठिन है। पत्नी में भगवान देख पाना, पति में भगवान देख पाना, पुत्र में भगवान देख पाना, अपने दुश्मन में भगवान को देख पाना, जो हमें गाली दे मारे उस पर भगवान देख पाना, वासुदेवा सर्व सा महात्मा सुदुर्भा सब में भगवान देख पाना बड़ा कठिन है।

और बिना यह देखे मोक्ष नहीं हो सकता, कल्याण नहीं हो सकता। एकमात्र जगतगुरु भगवान को जिसने अपना मान लिया जिस क्षण यह भाव हुआ कि फिर बिना प्रयत्न के ही उज्जवल भाव जागृत हो जाएगा। दिव्य भाव जागृत हो जाएगा और वह परम पवित्र होकर भगवान का निज दास बन जाएगा। बड़ी सीधी बात है। सब कुछ अपने आप हो जाएगा। केवल विश्वास करो। इस जगत को नचाने वाली दो कठपुतलियां है। एक भगवान की कृपा शक्ति से नाचती हुई कठपुतली और एक भगवान की माया शक्ति से नाचती हुई कठपुतली। यता रूढ़ानी म माया।

हम सब माया रूपी कठपुतली में नाच रहे हैं। इसलिए हमारे अंदर काम है, क्रोध है, लोभ है, मोह है, मद है, मत्सर है, चिंता है, शोक है, दुख है, भय है, क्या-क्या है। और जब कृपा रूपी शक्ति से कठपुतली नाचेगी उमादार जो सिद्ध की नाही समय न चावत राम गुण तो आनंद प्रतिषण हमारे द्वारा ऐसे आचरण होंगे जिससे जगत का मंगल होगा। हमारा मंगल होगा। हम खुश रहेंगे। हम प्रसन्न रहेंगे। हमारे अंदर एक दिव्य आनंद और बाहर भोग सामग्री पीछे पड़ जाएगी। हम आपको एक रहस्य बता रहे हैं। जब तक आप भोग सामग्री के पीछे पड़ोगे तब तक आप तरसते रहोगे।

और जब आप प्रभु के पीछे पड़ जाओगे तो भोग सामग्री आपके पीछे पड़ जाएगी। यह रहस्य नहीं जान पा रहा सब कोई। यह रहस्य रघुनाथ कर वेग न जाने कोई और जो जाने रघुपति कृपा तो सपने मोह न होए क्या जब हम भोग सामग्री की चाह करके उसके पीछे लग जाते हैं तो हवा नहीं मिलती वो भागी घूम रही पकड़ में नहीं आ रही और जब हम भगवान की तरफ हो जाते हैं तो पीछे डोलती है खाना पीना कपड़ा लत्ता मकान व्यवस्था जितनी जो कुछ भोग सामग्री है। इसके पीछे जब तक पड़ोगे तब तक इसे पकड़ नहीं पाओगे।

और अगर भगवान के पीछे पड़ गए तो यह सब तुम्हारे पीछे पड़ जाएगी। हमारी बात मान लो केवल तुम्हें राधा राधा रटना है और अंदर से सोचना है प्रभु के सिवा मेरा कोई नहीं। क्या जाता है यार? हम कुछ ले नहीं रहे तुमसे। हम यह नहीं कह रहे हमारी तरह बाबा जी बनकर गंगा किनारे या यमुना किनारे फस की झोपड़ी पर रहो जहां रह रहे हो मुंबई कोलकाता देश विदेश वहीं से तुम भगवान के हो जाओ और वही नाम जप करने लगो और वही सब में कोशिश करो भगवान को देखने की देखो तुम्हारे हृदय में शांति और तुम्हारे पास कोई कमी नहीं रहेगी सच्ची कहते हैं वो कैसे व्यवस्था करते हैं पूछो मत।

वो बड़े कृपालु हैं। किसी का सहारा नहीं लिया। पूरी सृष्टि को अकेले बनाया है। और घंटा तो घंटा में नहीं बनाया है। निमिश में बनाया। निमिश कहते हैं पलक झपकते। भकुटी विलास सृष्टि लय होई। ऐसे किया कि पूरी सृष्टि रच गई। ऐसा हमारा स्वामी है। अब हमारे पास क्या कमी है? अगर हम भगवान के नहीं हैं। एक दिन अकबर बादशाह ने तार उतार करके तुलसीदास जी के चरणों में रखा तो गोस्वामी जी के आंसू भर आए। तो जब वो बादशाह चला गया तब निज जनों ने पूछा कि बादशाह ने ताज रख दिया आपके चरणों में इसलिए आप आनंदित होकर अस्र प्रवाह तो कहा नहीं यह बात नहीं थी।

बात थी कि तुलसी जब राम का नहीं था तो मांगे कौर नहीं मिलता था। किसी के दरवाजे पर खड़े हो जाते थे तो धक्का देकर भगा देता था कि तुलसी अभागी है। जन्मते ही मां मर गई। पिता ने त्याग दिया। सेवा करने वाली दासी भी मर गई। कोई पूछने वाला नहीं। यह अभागा है और जब तुलसी राम का हुआ तो बादशाह ताज उतार के रखता है। मान लो हमारी बात बिना भगवान की शरण में गए तुम्हें शांति आनंद तुम्हारा कल्याण तुम्हारा मंगल ये बिल्कुल नहीं हो सकता। चाहे जितना रुपया बेईमानी से कमा लो।

चाहे जितना वैभव एकत्रित कर लो। अशांत रहोगे, दुखी रहोगे, चिंता युक्त रहोगे और बेकार की बातें आपको परेशान करती रहेंग जिनका कोई अस्तित्व नहीं है। बड़ी सीधी बात है। फिर सब कुछ अपने आप हो जाएगा। केवल तुम भगवान को स्वीकार कर लो। हे प्रभु मैं आपका हूं। स्वीकार करके उनका नाम जप करना शुरू कर दो। स्वीकृति तभी मानी जाएगी जब उनका नाम जप चलेगा। भगवान की कृपा पर विश्वास और भगवान के नाम का जप फिर देख लेना कुछ समय बाद। अब तुरंत कह दो कि चेक आ जाए या व्यवस्था तुरंत नहीं पहले तुम्हारे पापों का नाश होगा।

पहले तुम्हारे अशुभों का नाश होगा। पहले तुम्हारा जो अमंगल करने वाले उन बातों का नाश करेगा नाम तब फिर प्रकाशित होगा। भगवान कहते हैं चाहे जितना बड़ा पापी हो नीच हो अपचे सुदुराचारो भजते माम अनन्य भाग साधव्या समिता भवती धर्मात्मा स निगति कौते प्रति जानी नामे भक्त प्रणसति कल चर्चा चर्चा हुई थी कि दो बार राम राम उच्चारण करने वाले की क्या गति हुई थी। वो भगवान की गोद में पहुंचा था। यहां भगवान कह रहे कौनते प्रति जानी नामे भक्त प्रणसति अर्जुन तुम ऐसा जान लो कि मेरे भक्त का कभी नाश नहीं हो सकता।

यदि आप नाम जप करते हैं और आप इस जन्म में भगवान को प्राप्त नहीं कर पाए तो आपका अगला जन्म होगा बहुत अच्छे कुल में जहां धन संपत्ति ऐश्वर्य वैभव भोग सामग्री सब कुछ एकत्रित होगी और आपको भजन का सहयोग मिलेगा भजन का सहयोग और भोग सामग्री है ही इसलिए भोगों से विरति तो उस जन्म में निश्चित भगवत प्राप्ति हो जाएगी महा महान पापी भी यदि भगवान को अपना एकमात्र आश्रय दाता मान ले और भगवान का नाम जब शुरू कर दे तो भगवान कहते हैं साधु तो मैं उसे बनाऊंगा करो सज ते साधु समाना और यहां तो कह रहे मान लो साधु है क्योंकि नाम जब शुरू कर दिया अब साधुता आ जाएगी मेरी शरण में आ गया अब ये सच्चा आदमी बन जाएगा पापी नहीं रहेगा और सशत शांति गच्छति परम शांति को प्राप्त हो जाएगा।

देखो शांति सब कोई चाह रहा है या शांति मिले, सुख मिले, प्रेम मिले और यह जगत में नहीं है। यह भगवान में है। जब तक हम भगवान से जुड़ेंगे नहीं तब तक हमें प्रेम नहीं मिलेगा। शांति नहीं मिलेगी। सुख नहीं मिलेगा। सीधी सी बात है आप में जितनी ताकत है उतनी ताकत झोंक दो नाम जप करने में। शेष भगवान आपको संभाल लेंगे। अब बेईमानी करो। तुम मोबाइल में समय नष्ट करो। प्रपंच में समय नष्ट करो। कह दो हमारे पास समय नहीं है और भजन ना करो और सोचो भगवान सब कर देंगे ऐसा नहीं सिद्धांत ऐसा नहीं कहता आप प्रयत्न कर रहे हो फिर भगवान सब कुछ कर लेंगे आप में जितनी सामर्थ है उतनी पूरी सामर्थ झोंको एक बार नाम जप करने में चलते फिरते उठते बैठते काम करते जो काम करो कृष्णारपणमस्तु और हर समय राधा राधा राधा राधा राधा सब संभल जाएगा देख लेना सब संभल जाएगा सकल अंग पद विमुख नाथ मुख नाम की ओट लई है है तुलसी प्रतीत एक प्रभु मूरत कृपा मई है सब तरह से हीन हूं नीच हूं पापी हूं पर आज से भगवान का नाम जप करूंगा तो भगवान की कृपा आपको बरसेगी।

अब आपको दो बातें बता दें सूक्ष्म हो सकता है आज से आपका मंगल शुरू हो जाए। जो सोचो वो होने लगे सब चकाचक तो आपको लगेगा यार बात बन गई। हो सकता है आज से हर काम आपका बिगड़ना शुरू हो जाए। पूर्व के पाप आप पर आक्रमण करेंगे और पूर्व का पुण्य आपको प्राप्त होगा। यदि पाप का संयोग आज से लग गया तो नाम जप करने पर भी आपको विघ्न नजर आएंगे। आपको हार सहनी पड़ेगी। आपको असफलता सहनी पड़ेगी। चुप रहना। नाम जप करते रहना। वो जहां नष्ट हुआ तहां सफलता उन्नति प्रारंभ हो जाएगी।

हो सकता है आज से आपका पुण्य लग गया हो। तो जहां आप नाम जब शुरू करेंगे तो आपका और मंगल शुरू हो गया तो आपको आनंद प्राप्त होगा। तो दोनों लोग सावधान रखिए। जिसका आज से कल्याण मंगल कामना पूर्ति शुरू हो जाए तो अहंकार मत कीजिए। ये आपके पूर्व पुण्य से हो रहा है। अभी के नाम जप से नहीं। अगर अमंगल शुरू हो गया, कोई विपत्ति आ गई, कोई ऐसा तो यह दुखी मत होइए। ये नाम जप का प्रभाव नहीं। यह पूर्व का पाप है जो आपको दंड देने के लिए उद्यत हुआ है। विश्वास कर लो भगवान बहुत कृपा में है।

अगर कृपा नहीं किए होते तो आप यहां बैठे नहीं होते। यमुना जी के पावन पुलिन पर परम महान मंगलमय वृंदावन धाम के पावन क्षेत्र में बैठकर भगवान की चर्चा सुनना भगवन नाम महिमा सुनना ये केवल भगवान की कृपा से है। यदि हम अपनी जीभ से भगवन नाम लेंगे तो अमृत निकलता है जीभ से। जैसे राधा राधा राधा राधा तो जो रस निकला ना वह अमृत है। वह हर नस नाड़ी में बसे हुए पाप को नष्ट कर देता है। इसीलिए तो संतों की जूठन पाई जाती है। संतों की जूठन इसीलिए पाई जाती है कि उनके मुख में नाम रूपी अमृत का रस होता है।

अगर वो आएगा तो हमारी भी नाम जपने में रुचि हो जाएगी। इसलिए बड़े भाग्यशाली जिनको अपने गुरुजनों संतों की जूठन कभी प्राप्त हो जाए अगर नहीं प्राप्त हो रही तो सबसे बड़ी झूठन है कि वो रात दिन रट रहे हैं राधा राधा राधा राधा और वो कह रहे हैं राधा राधा रटो और आप राधा राधा रटोगे तो आपके जो रस निकलेगा वो जब हृदय में जाता है तो हमारी हर नस नाड़ी को पवित्र कर देता है। हम परम पवित्र भगवान के मिलने के योग्य हो जाते हैं। इतनी नाम में महिमा है। विश्वास करो मां के समान भगवान आप पर कृपा दृष्टि रखें।

कैसे? जैसे मां काम करती तो नजर आती है पर एक दृष्टि से देख लेती है मेरा लाला क्या कर रहा है। ऐसे ही भगवान सहस्त्र शीरखा पुरखा सहस्त्राक्षा सहस्त्रपाद वो हजारों नेत्रों से सबको देख रहे हैं। एक एक सेकंड का हिसाब होगा। गलत कर रहे हो तो उसका दंड मिलेगा। आज नहीं तो कल अच्छा कर रहे हो तो आपकी उन्नति और सुख होगा। आज नहीं तो कल पक्का एक एक सेकंड मेरा भगवान आपको देख रहा है। ऐसा नहीं है कि हो गया कोई देखा नहीं कोई जाना नहीं तो दब गया। वो दब नहीं गया। वो आपको दंड देके ही रहेगा।

ऐसा नहीं कि आप रो-रो कर नाम जप कर रहे हो। कोई देख नहीं रहा। नहीं भगवान देख रहे हैं। आपको निहाल कर देंगे। विश्वास कीजिए।

यह पाठ वीडियो के स्वचालित (auto-generated) उपशीर्षकों से लिया गया है — इसमें शब्दों की त्रुटियाँ हो सकती हैं। प्रामाणिक वचन के लिए वीडियो अवश्य सुनें।

मूल वीडियो: Bhajan Marg (YouTube)

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