कलियुग में ऐसा क्या खास है जो सतयुग में भी नहीं?
पूज्य महाराज जी का एक संक्षिप्त वचन — पूरा सुनने के लिए ऊपर वीडियो देखें।
पूरा प्रवचन
कलयुग पापों का विस्तार करेगा तो मुनियों ने विचार किया कि पापों से कैसे बचा जाए तो भगवान व्यास देव जी उस समय गंगा जी में स्नान कर रहे थे तो सबने सोचा चलो व्यास जी से चलकर के प्रश्न करते हैं तो उस समय जे सब मुनि गए कह रहे थे साधु कली साधु कली साधु कली धन्य है कलयुग को धन्य है कलयुग को धन्य है कलयुग कलयुग की जय बोल रहे थे भगवान व्यास देव जी तो ऋषियों को लगा शिकायत तो करने हम यही आए थे कि कलयुग पाप का विस्तार करेगा। लेकिन यहां उल्टा है ये कलयुग की जय बोल रहे हैं।
तो ऋषियों ने पूछा कि आप साधु कली साधु कली धन्य है कलयुग की साधुवाद है कलयुग को। तो आप कलयुग को साधुवाद क्यों दे रहे हैं? क्योंकि वो तो पापों का विस्तार कर रहा है। भगवान व्यास देव जी ने बताया 10 वर्ष सतयुग में जो तपस्या करने का फल होता है वो एक वर्ष त्रेता में तपस्या करने से मिलता है और एक महीना द्वापर साधना की जाए तो फल प्राप्त होता है और कलयुग में एक दिन जो सतयुग में 10 वर्ष तपस्या की जाए फल मिलता है। कलयुग में 24 घंटे में मिल जाएगा। इससे बढ़कर और कौन सी बात होगी।
यह पाठ वीडियो के स्वचालित (auto-generated) उपशीर्षकों से लिया गया है — इसमें शब्दों की त्रुटियाँ हो सकती हैं। प्रामाणिक वचन के लिए वीडियो अवश्य सुनें।
मूल वीडियो: Bhajan Marg (YouTube)
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