श्री हित चौरासी जी — श्री हित हरिवंश महाप्रभु · 84 पद. ब्रजभाषा के 84 पद — श्री प्रिया-प्रियतम के नित्य विहार का रस। पूज्य महाराज जी नित्य पाठ की आज्ञा देते हैं।
श्री राधा सुधा निधि — श्री हित हरिवंश महाप्रभु · 270 श्लोक. श्री राधा की महिमा के 270 संस्कृत श्लोक — मूल, रोमन लिप्यंतरण और हिन्दी व्याख्या सहित।
श्री हित स्फुट वाणी — श्री हित हरिवंश महाप्रभु · 27 पद. महाप्रभु के फुटकर 23 पद और उपासना के 4 दोहे — अर्थ सहित।
श्री हित यमुनाष्टक — श्री हित हरिवंश महाप्रभु · 9 श्लोक. श्री यमुना जी की स्तुति के 8 श्लोक और फलश्रुति — अर्थ सहित।
श्री हित सेवक वाणी — श्री सेवक जी (श्री दामोदर दास जी) · 197 पद. 16 प्रकरणों में श्री हित हरिवंश महाप्रभु की महिमा, नाम-निष्ठा और हित-धर्म — प्रकरण और पद संख्या सहित (जैसे 4.7), स्वामी श्री हितदास जी की टीका (भावार्थ) सहित।
श्री हित बयालीस लीला — श्री हित ध्रुवदास जी · 3351 छंद. श्री हित ध्रुवदास जी की 42 लीलाएँ — जीव-दशा से दान-लीला तक, पद्यावली सहित; स्वामी श्री हितदास जी के भावार्थ के साथ।
प्रेम की पीर — श्री भोरी सखी (श्री भोलानाथ जी) · 459 पद. श्री भोरी सखी के विरह और प्रेम के पद — गुरु वन्दना, प्रिया वन्दना, आत्म-निवेदन, शरणागति आदि प्रसंगों में।