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माँ ने माँगा अपने पुत्रों का जीवन... कर्ण ने क्या कहा?

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पूज्य महाराज जी का एक संक्षिप्त वचन — पूरा सुनने के लिए ऊपर वीडियो देखें।

पूरा प्रवचन

एक दिन कर्ण सुबह से दोपहर तक भगवान सूर्य की आराधना करता था। प्रातः काल ऐसे चला गंगा जी में खड़े होकर और जैसे जैसे सूर्य घूमते वैसे जब सूर्य ऐसी पीठ की तरफ आ जाते हैं तब प्रणाम करके चलते और उस समय कोई जो भी मांग ले जो कुछ कर्ण का व्रत था उसी समय माता कुंती गई पीछे तो उन्होंने कहा देवी कौन हो जब सूर्य उधर गए तो छाया आई तो कहा देवी कौन हो सामने आई प्रणाम राज माता बोले राज माता ही नहीं तेरी भी माता हूं मुझे पता है लेकिन आज कहने आई हो कि जब हमारा युद्ध तय हो चुका है तभी बताने आई हो मुझे पता है तुम मेरी मां हो क्या चाहते हो उनका यही चाहती हूं मेरे सारे पुत्र जीवित रहे नहीं पांच जीवित रहेंगे आप आई हो मांगने तो मृत्यु दशा में भीम को छोडूंगा युधिष्ठिर को छोडूंगा नकुल को छोडूंगा सहदेव को छोडूंगा अर्जुन को मारूंगा या अर्जुन मुझे मारेगा रहेंगे पांच पुत्र छह नहीं रहेंगे जाओ बोले बेटा याद रखना बोले मां कर्ण के वचन है मरेगा या तो अर्जुन मरेगा या तुम्हारा बेटा कर्ण मरेगा रहेंगे पांच ही बहुत बलवान लेकिन अधर्म का संग करने के कारण मारा है।

यह पाठ वीडियो के स्वचालित (auto-generated) उपशीर्षकों से लिया गया है — इसमें शब्दों की त्रुटियाँ हो सकती हैं। प्रामाणिक वचन के लिए वीडियो अवश्य सुनें।

मूल वीडियो: Bhajan Marg (YouTube)

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