हम जानते हुए भी वही गलती क्यों दोहराते हैं?
पूज्य महाराज जी का एक संक्षिप्त वचन — पूरा सुनने के लिए ऊपर वीडियो देखें।
पूरा प्रवचन
जिसको हम जानते हैं यह गलती है वह हमसे पुनः इसलिए होती है कि मानते ऊपर से गलती हृदय से मानते हैं कि इसमें सुख है अंदर की बात है ये ऊपर से हम कहते हैं अधर्म है पाप है गलत है नहीं करूंगा नहीं करना चाहिए और अंदर से है कि सुख है अब तुम्हें कोई नहीं रोक सकता हजार बार गलती मानो फिर ऊपर हजार के ऊपर चलेगी बात वही होगा जिस दिन आपके हृदय में यह बात आ गई कि देख लिया कहीं सुख नहीं अब आज से मैं नियम लेता हूं अंदर से भगवान के बल पर कि मैं ऐसी जगह नहीं जाऊंगा जहां भ्रष्ट हो जाऊं।
ऐसे दृश्य नहीं देखूंगा जिससे मैं पतित हो जाऊं। ऐसा भोजन नहीं करूंगा। ऐसा संग नहीं करूंगा और खूब नाम जप करो। यही सुधार है।
यह पाठ वीडियो के स्वचालित (auto-generated) उपशीर्षकों से लिया गया है — इसमें शब्दों की त्रुटियाँ हो सकती हैं। प्रामाणिक वचन के लिए वीडियो अवश्य सुनें।
मूल वीडियो: Bhajan Marg (YouTube)
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