भक्त की सिंहवत गर्जना / Shri Hit Premanand Govind Sharan Ji Maharaj
श्री हित राधा केलि कुंज, वृन्दावन में पूज्य श्री हित प्रेमानंद गोविंद शरण जी महाराज के साथ एकांतिक वार्तालाप। साधक अपने जीवन और साधना के प्रश्न रखते हैं और महाराज जी उनका समाधान करते हैं।
पूरा प्रवचन
में भक्तों की दयनीय अवस्था पर कभी कोई हसीना की देखिए बगैर थे कटोरा लिए उम्र देखो बड़े भजनानंदी बनते थे चल नहीं पा रहे चार लौंग संभाल भक्तों के जीवन में कभी अंधकार नहीं कवि पराजय नहीं हर पर आ जाएं उसकी विजय का द्योतक बनती है मेरे दिखाई दे रहा है कि भक्त गिरा तो कहां गिरा यह तुमने देख पा रहे बाहरी की गोद में आ है वह बुद्धि भी कम होती है जो भगवत शरणागति महान बलवान जिसे विचलित न कोई भी वार कोई भी प्रहार जिसे विचलित न कर सके भीम सब कुछ सहते हुए भी ऊपर
की तरफ निष्ठा में रहता है चलाएं मन बुद्धि है कि चाहे जितने प्रहार हर क्षण हर प्रहार का उत्तर है हर क्षण हर बार उसकी भगवत नियुक्ति उसकी शरणागती निखार लाती है उसका विश्वास चमकता है कई बार प्रहार होता है जितना उसे माया रोना चहती उतनी बार वह ताल ठोक कर विजय प्राप्त होता है उसका विश्वास उसकी श्रद्धा उसकी शरणागती जय हो माता भक्तों के जीवन में कभी अंधकार नहीं कवि प्लाजा नहीं हर पर आ जाएं उसकी विजय का द्योतक बनती है हर प्रधान विजय तो विजय हर हार उसकी विजय का स्वरूप होती है हारे को हरिनाम कि हर कदम कदम पर उसे प्रभु का विश्वास प्रभु क सिद्धांत चमकती नजर आती है शरणागति लिस्ट तू चली जाती है यह सा मार्ग ने कभी ईद अगर सिंह का बच्चा बहनों के बीच में फस जाए तो बेगम नहीं बन जाता वह सिंह ही रहता है ऐसे कर्म व्यवस्था करें अगर किसी वक्त को की दयनीय दशा पर सिंह है थोड़ा सा अलार्म का यह सब कर्म और हरिदास भक्तों भक्तों की व्यवस्था पर कोई भगत कटोरा लिए खड़े थे इस चैनल को सब्सक्राइब प्राप्त है अदरक हरी नाम
जपत जय तुम बाहरी बात देख रहे हो उसे कोई प्राप्त कर सके पैदा ही नहीं हुआ उसे कोई प्राप्त कर सकें शरीर परास्त होने वाली वस्तु होगी ही आज नहीं तो कल होगी उसे परास्त कर दे पैदा करे न करे न कोई कष्ट भय हरे सकल संताप हरिहर नाम जपत जय पराजय पराजय विजय का समय दिखाई दे रहा है कि भक्त गिरा गिरा यह तुमने करो जिम राख बिसवास प्रकाशित सत्य कहते हैं कि जब जब कभी अंधेरा थाने की चेष्टा करता है कर्म व्यवस्था या जो भी उसे शब्दों से कहा जाए उसी समय प्रकाश की किरण आती है उसी समय आनंददायक प्रवाह बताएं और बाहर ले जाता है उस अंधकार को महान आनंद में डूब देता है यह शरणागति ऐसी नहीं है कि अनाथों जैसी हो लग गया दाग तो लग गया ने भी बह गया नए कुछ बने ना बने बैठे होगे नहीं यह मार्ग ऐसा नहीं अनुभव कि बांध यहां भजन का हिसाब नहीं होता शरणागति होता कोई नौकरी नहीं है जितना करो उतना मिलेगा वैदिक सिद्धांत में अवश्य पधारें ए बिग मैजिक सिद्धांत का सार है भागवत धर्म जो वेद प्रतिपादित मार्ग के ऊपर भागवत धर्म और भागवत धर्म के
ऊपर वितरण करने वाला यह प्रेम धर्म इसमें पूर्व वशिष्ठ लेकर त्यानंतर हो चित्र कोई प्राप्त नहीं करता
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मूल वीडियो: Bhajan Marg (YouTube)
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