एकांतिक वार्तालाप एवं दर्शन #57 · 31 दिसंबर 2022
श्री हित राधा केलि कुंज, वृन्दावन में पूज्य श्री हित प्रेमानंद गोविंद शरण जी महाराज के साथ एकांतिक वार्तालाप। साधक अपने जीवन और साधना के प्रश्न रखते हैं और महाराज जी उनका समाधान करते हैं।
पूरा प्रवचन
प्रिय वल्लभ शरण जी बैठे र जय जय राधा वल्लभ श्री हरिवंश गुरुदेव आपके चरणों में कोटि कोटि नमन गुरुदेव शरणागत तथा निज मंत्र जपने में सायंता तथा निरंतरता का मन को व्यथित करता रहता है रात्रि में चिंतन करता हूं तो मन में व्यथा पैदा होती है कि सारी दिनचर्या व्यर्थ ही गई आपके उपदेशों को दिनचर्या में न धारण कर पाना अस्थिरता पैदा करता है कृपा है इस यही कृपा और बढ़ती रहे जब किसी उपासक को अपनी उपासना में असंतोष हो तो जानना चाहिए भजन ठीक चल रहा है अगर उपासना में संतोष लगने लगे तो फिर कोई ना कोई गलती हो रही है ठीक चल रहे हो श्री जी की कृपा है जब मन जलेगा भजन के लिए तो निष्पाप हो जाएगा अहंकार रहित हो जाएगा और जब ऐसा अहंकार होगा कि मैं भजना नंदी हूं मैं ठीक चलता हूं तो मामला कहीं ना कहीं हमारा गलत है इसलिए आपके ऊपर कृपा है इसको अन्यथा ना लीजिए और भजन में चित्त को जोड़ते ही रहिए असंतुष्ट भजन में बनी रहना यह भगवत कृपा का लक्षण है और भजन में संतोष हो जाना यह दुर्भाग्य है भोगों में संतोष और भजन में असंतोष
यह साधक का लक्षण है भजन में संतोष और भोगों में असंतोष यह संसारी पुरुष का लक्षण है इसलिए आप आनंदित अंदर से रहिए प्रभु को जैसा उचित लगेगा वैसा हृदय करते हुए वह आगे बढ़ाएंगे और अपने कल्याण की तो चिंता करनी नहीं है क्योंकि हम प्रया प्रियालाल के शरणागत है हमारी स्वामिनी का स्वभाव ही है ऐसा उनका प्रभाव ही ऐसा सत्तार कृत स्वभाव सुधार सोगम उनका स्वभाव है अपनी तरफ से हम आपसे सबसे प्रार्थना करते हैं कि देखो एक एक दिन हमारे मृत्यु के नजदीक पहुंच रहे हैं और पता नहीं वह तिथि तारीख कब है हमको कम से कम ऐसे आचरण नहीं करने चाहिए कि हमारी जो इस समय उन्नति हुई है सब योनियों में श्रेष्ठ मनुष्य योनि इससे हम गिर जाए यह बात ध्यान रखना है भगवत प्राप्ति तो और बड़ी बात है पर इतनी बात ध्यान रख ले कि हम जितनी ऊंचाई पर आ गए हैं अब इससे नीचे ना गिरने पावे अब जो भी हम करें कम से कम इसम टिके रहे हमारा जन्म अब मनुष्य योन के नीचे नहीं होना चाहिए तोब जैसे आप शराब पियोगे जुआ खेलोगे परि स्त्री की तरफ गंदी दृष्टि रखोगे गंदी
वार्ताएं करोगे तो यह आसुरी प्रवत आपको नार की योनियों में में ले जाएगी फिर बड़ा मुश्किल हो जाएगा इसलिए संतों के पास जाने से शास्त्र स्वाध्याय करने से भगवत भजन से बुद्धि शुद्ध होती है और उसका स्वरूप यही होता है कोई शास्त्र विरुद्ध आचरण मत करो गंदी बातें मत करो गंदी बातें मत देखो और यह जिनसे गंदी बात की प्रेरणा मिलती है ऐसे व्यक्ति का त्याग करो ऐसे भोजन का त्याग करो ऐसे दृश्य का त्याग करो आप मोबाइलों में से दृश्य बाहर ऐसे दृश्य कदापि मत देखिए जो आपको धर्म विरुद्ध आचरण करने के लिए प्रेरित करें हां भले भजन कम हो लेकिन गंदे आचरण तो ना हो हम अच्छाई नहीं धारण कर सकते तो बुराई क्यों पकड़े अच्छे बनो इस जीवन में सुख पूर्वक जियो और शरीर छूटने के बाद अगर भगवान ना मिले तो फिर ऐसी जगह जन्म हो कि हम फिर ऐसे ही अभ्यास करें हम फिर भगवान के मार्ग में चले पर ऐसा तो ना हो कि हमारी नीच कोट की योनि हो जाए कि फिर हम चढ़ ही ना पावे कितनी ऐसी योनि है जहां भयानक कष्ट है इसलिए सावधान रहो नाम जप करते रहो राधा
राधा राधा वल्लभ श्री हरिवंश हित हरिवंश शरण श्री हरिवंश मेरे भोले से भी भोले महाराज जी आपकी जय हो आपके चरणों में कोटि कोटि दंडवत प्रणाम महाराज जी मेरी जिज्ञासा है कि निकुंज कैसा दिखता है आप कृपया बताए तो बच्चा है प्यारो डम क्मत न य सु काद नाम य ध्यान गम ऐसा है निकुंज क्षमता नहीं है इन महापुरुषों की कि भी हमारी प्यारी ू के निज महल को ध्यान में रख ले वृंदावन द्विती पत्र की उपमा को कनाए कोटि कोटि बैकुंठ हो ते सम कहे न जाए एक निकुंज के एक पत्ते की कांति के बराबर भगवान नारायण का बैकुंठ धाम भी नहीं तो और की कहा चलावे यह तो या रस को तही अधिकारी कृपा करें श्री राधा प्यारी कृपा लाड़ली तही करें श्री हरिवन जो कर सिर धरे आचार्य चरण के शरण होकर उनके द्वारा दिए हुए नाम मंत्र का निरंतर जप करते हुए वाणी जी का आश्रय लेकर श्री धाम वृंदावन की रज का सेवन किया जाए तो निकुंज कैसा है यह श्री जी की कृपा से अनुभव में आ जाएगा नहीं तो किसी की ताकत नहीं है कि ध्यान में धर ले या वर्णन कर ले क्योंकि प्रेम स्वरूप
निकुंज का वाणी के द्वारा वर्णन हो ही नहीं सकता और उसकी उपमा में बैकुंठ नहीं तो फिर और प्राकृतिक लो और वन की तो बात ही क्या है इसलिए बस नाम जप करो और धीरे धीरे सब श्री जी समझा देंगे इसमें क्या लिख के लाए हो आपका स ख आज राधा राधा राधा यह सबसे बड़ा सत्संग है अब आपकी भाषा तो पता नहीं किस देश की है हिंदी भगवान कहे हैं कि मेरा भक्त मेरा भजन कर लो यह तुमने लिखा है यार बहुत तुम भाग्यशाली ई छोटी अवस्था में भजन कर रहे हो बढ़िया रखो भी सत्स लिख लिया करो राधा राधा राधा नाम जपते हो कितनी देर फिर इसके बाद क्या करते हो सुनो थोड़ी थोड़ी देर में राधा राधा बोल दिया करो ठीक है हां थोड़ी थोड़ी देर में ऐसे राधा राधा आ गए अभी चुपचाप और याद कर लो और गंदे बच्चों से ना मिलना ठीक है अलग रहना जो तुम्हें खेल में लगाए गंदी बातों में लगाए उनसे दूरी रहना ठीक है मिलते तो नहीं हो बस सावधान रहो बड़े भाग्य यार तुम इतने छोटे बच्चे हो के भजन की बातें महाराज जी क्या निकुंज में जाने के बाद लाली जी मुझे अपनी गोद में बिठाए
तो लाडली ज जाले की क्या लीला तो इसको अपने पास रख लो है देखो लालय श्री जी से कह रहे मैं आपको बिंदू जी जम्मू से धा श्री हरिवंश गुरुजी आपके चरणों में कोटि कोटि प्रणाम गुरु जी मेरे शरीर के पति देव जी सात महीनों से वृंदावन वास कर रहे हैं और रिक्शा चला रहे हैं हम भी उनके साथ-साथ वृंदावन वास करना चाहते हैं लेकिन वह आज्ञा नहीं दे रहे कृपया मार्गदर्शन कर किसका प्रश्न है उनकी आज्ञा की इसमें जरूरत भी नहीं है जबरदस्ती रहना चाहिए पति हो जहां तुम हो वही मेरा जीवन मेरा अधिकार है उसमें प्रार्थना आप कोई भी बैठा हो शास्त्र सिद्धांत में किसी का चेहरा देख के उत्तर नहीं दिया जाता शास्त्र सिद्धांत किसी की अनुमति नहीं पाणी ग्रहण करते समय हाथ बढ़ा कर के स्वीकार किया गया था इसी बात के लिए कि जो भी कार्य है उनमें हम आप दोनों मिलकर चलेंगे अर्धांगिनी अर्धांगिनी होती है और अगर वह आपके समीप रहना चाहती है तो भगवान ना नहीं कर पाए आपकी क्या बात है सीता जी के लिए बहुत बड़े-बड़े महापुरुषों ने जनक जी और बड़े-बड़े
ज्ञानियों ने बैठकर सवा लगाए कुछ दिन अयोध्या रह लेना कुछ दिन जनकपुर रह लेना कभी-कभी इधर कभी-कभी उधर आपके लिए तो बनवास नहीं है प्रभु ने भी कहा कि हमारी आज्ञा है आप यही अवध में रो गुरुजनों के पास रो माता को बहुत संतोष मिलेगा क्योंकि हम जा रहे तो कौशल्या माता को कम से कम आप रहोगी तो दोनों पक्ष में प्राण बने रहेंगे सबके जानकी जी ने कहा प्रभु आप ऐसा कैसे कह सकते हो क्या तन के बिलग करके छाया को रखा जा सकता है क्या नहीं रखा जा सकता क्या मछली को जल से अलग
करके जीवन दान दिया जा सकता है क्या नहीं दिया जा सकता तो प्रभु बस मुझे ना चक्र प्रति सम्राट महाराज का महल अच्छा लगेगा और ना महाराज जनक जी का महल अच्छा लगेगा आपके चरणों की समीप यदि कुछ साथरी में व्यतीत करने को मिलेगी तो उसके सामने सब कुछ है मुझे कुछ नहीं चाहिए किसी के रोके नहीं रुकी अंतिम समय दशरथ जी ने कहा था सारथी से कि कह देना सीता जी से अगर व अकेले वापस आ गए तो हम सब जीवित हो जाएंगे हमारे प्राण बच जाएंगे चलो मानते हैं कि राम तु तो मेरी बात अब नहीं मानने वाले क्योंकि वो सत्य प्रतिज्ञ है वह तो जाएंगे 14 वर्ष के लिए लेकिन आप कोशिश करना अगर जानकी जी वापस आ जाए तो हम जीवित हमारे प्राण बच जाएंगे तो शास्त्री सिद्धांत भी है और व्यवहार में भी है ऐसा नहीं है आप वृंदावन वास कर रहे हैं हां अगर पत्नी की अनुमति है कि हम अपने बच्चों या माता-पिता की सेवा में आप जा सकते हैं तो फिर बात अलग पत्नी कह रही हम साथ रहना चाहि ते हैं तो फिर आप उस पर शासन नहीं कर सकते फिर आपको तो साथ ही रखना होगा ये शास्त्रीय
सिद्धांत है जैसे वान प्रस्थ ब्रह्मचर्य गृहस्थ और वानप्रस्थ जब वानप्रस्थ की बात आती तो उसमें यह बात आती कि पत्नी से पहले आज्ञा लीजिए आज्ञा शब्द है पत्नी से आज्ञा लीजिए क्योंकि पाणी ग्रहण किया है कि अब मैं वनवास करना चाहता हूं और एकांतिक भजन करूंगा आपकी रुचि है तो बच्चों के साथ रह सकती हो आपकी रुचि नहीं तो जैसे हम रहेंगे वैसे तुम्हें रहना पड़ेगा भूखे या जिस परिस्थिति में उसकी अनुमति के साथ है वो अगर कह देती सहमति हा आप जाइए हम यही है खत्म खेल पर ऐसा नहीं चलेगा कि हम वृंदावन वास करें और वह हमारी आज्ञा में बाहर रहे हां अगर वो राजी है तो कोई बात नहीं अगर व रहना चाहती तो फिर आपकी आज्ञा की आवश्यकता नहीं फिर आपके पास उसको रहना ही अनिवार्य है क्यों माता-पिता है घर में तो तुम्हारे माता-पिता है ना उसके माता-पिता भाई बंधु तो सब आप हो अगर वह अपने पति को भगवान समझती तो उसके लिए कोई कोई भी कहीं भी कोई भी अवसर नहीं वोह आपके लिए है आपके माता-पिता हैं आप देखिए आप माता-पिता को लाइए आप सेवा कीजिए आपका
संबंध उससे है उसने माता-पिता को देखकर ब्याह नहीं किया था उसने आपको देखकर ब्याह किया उसने आपसे संबंध माना आपकी खुशी के लिए व सबकी सेवा करती है और उसकी खुशी उससे दूर है वो कैसे बर्दाश्त करें ये सिद्धांत नहीं है मतलब ये सिद्धांत नहीं हां आप उसके साथ उसको राजी करना होगा अगर वह राजी है तो सार है आपके दो हाथ है एक हाथ इधर से दे रहा है एक हाथ उधर सेवा कर चलेगा आपको उसे राजी करना होगा अगर कहती नहीं हम वहा नहीं रहेंगे तो नहीं फिर आप जहां हो उसका अधिकार है
शास्त्रीय और व्यवहारिक भी शास्त्री भी और व्यवहारिक भी व आपकी माता पिता की दासी नहीं है वो आपकी दासी है आप जहां हो वही उसकी सेवा है आप उसको राजी कर लो फिर कोई बात नहीं हा अगर वो राजी हो जाती शार से तो कोई बात नहीं कोई उसकी राजी होना आति अनिवार्य है आज यही सब भूल गए हैं तभी अपनी अपनी रुचि के अनुसार फिर क्या हो रहा है कि यह सब दुनिया की जितनी दली दुरता है ना पापा चरण सब हो रहे हैं पति अपना कहीं पत्नी अपना कहीं उनका उनका तलाक दुनिया का सब गंदगी जो है
ना सनातन धर्म में गंदगी नहीं थी सब बाहर से आई जो माको में गंदगी है ना व विचार प्रवृत्ति यह सब हमारे धर्म में नहीं बहुत गंभीर शांत और मृद व्यवहार करने वाला सनातन धर्म है हिंदू धर्म कोई ऐसा नहीं है पिट गया है लेकिन किसी को पीटने की इच्छा नहीं की है आज क्या हो रहा है ब्याह हो करके आया पत्नी दूसरे लड़के से प्यार कर रही और जहर दे दिया अपने पति को मार दिया पति दूसरी लड़के से प्यार कर रहा पत्नी को नाना प्रकार से प्रताड़ित करके ये सब क्या हो रहा है अरे एक जीव है तुम्हारे को समर्पित है यही विश्वास नहीं पा रहा तो फिर भगवान पर क्या विश्वास करोगे आज कौन विश्वास के लायक रहगा है सब कुछ अपना दे कर के व पति को रिझाना चाहती पति दूसरी जगह रिजा हुआ उसको मरवा देता है एक्सीडेंट करवा देता है कोई नाना प्रकार के उपायों के द्वारा उसे नष्ट कर क्या हो रहा है इसलिए कम से कम सोचो भगवान की कितनी कृपा है कि पत्नी तुम्हें पति रूप में वर्ण करके सिर्फ तुमसे भाग्य मनाओ की ऐसी पत्नी है जो धर्म पूर्वक चल रही तभी वो कह रहे
मैं पति के साथ ही रहना चाहूंगी तो उसकी बात का आप उसे मना लीजिए या फिर धन कमाकर माता-पिता को बुला लीजिए दोनों मिलकर सेवा कीजिए माता-पिता का भी सौभाग होगा जैसा भी हो उसके प्रश्न के अनुसार उसका उत्तर है उसका अधिकार है और वह अधिकार आपको सार से देना चाहिए ही मनमानी आचरण नहीं करना चाहिए रितु जी बिहार से राधा वल्लव श्री हरिवंश महाराष्ट्री आपके चरणों में कोटि कोटि प्रणाम महाराष्ट्री मैं बहुत एक दुविधा में हूं उन तीन दिनों में हम श्री जी की सेवा नहीं कर पा रहे कैसे करें शरीर के पति बाहर ड्यूटी पर रहते हैं तो क्या विधि से इसीलिए नाम सेवा या विग्रह सेवा तब तक विराजमान नहीं करनी चाहिए जब तक दूसरा कोई उन दिनों में सेवा करने वाला ना हो शास्त्री सिद्धांत मानना ही चाहिए नहीं तो उससे बुद्धि मलिन हो जाती है जो मासिक धर्म में य रसोई सेवा श्री जी की सेवा निषेध है तीन दिनों के लिए तो निषेध है इसीलिए छवि विराजमान कर ले दर्शन कर ले प्रणाम कर ले पर श्री विग्रह सेवा या नाम सेवा तभी विराजमान करना चाहिए जब सेवा
में दो हो अगर हमारा शरीर अपवित्र है तो फिर उनकी सेवा हो रही है इसमें कोई गुंजाइश नहीं है मंजू जी ऑस्ट्रेलिया से जय जय श्री हित हरिवंश महाराजी आपके चरणों में कोटि कोटि प्रणाम महाराजी मेरे शरीर के पति और बच्चे पहली बार वृंदावन आए हैं आपसे प्रार्थना है कि आप उनको कृपा करके कुछ प्रेम रस मार्ग की ओर अग्रसर करें प्रेम रस मार्ग किसका प्रश् अरे नाम जप करो गंदे आचरण में ना जाओ बस इतनी पूरे जीवन भर बात मान लो तो बहुत बड़ी बात हो प्रेम रस मार्ग तो बहुत बड़ी
बात है हां ये जो आज का तूफान चला है माया का शराब पीना मांस खाना अंडा खाना बॉयफ्रेंड गर्लफ्रेंड बे विचार इस पर ब्रक लगा दो इसको सुधार कर लो तो हमारे ऊपर बहुत कृपा हो जाएगी प्रेम रस मार्ग में चलना तो यह तो बहुत बड़ी बहादुरी का काम है यह तो उनका काम जिन्होंने सर्वस्व का बलिदान करके आगे बढ़े चाहे देश प्रेम हो गुरु प्रेम हो हरि प्रेम हो प्रेम मार्ग में तो कोई कायर थोड़ी चलते हैं बहादुर चलते कि हजारों चोट लगने पर भी कदम पीछे ना कदम पीछे ना हो य वो मार्ग है प्रेम तो पर इतना तो कर लो कि शराब ना पियो मांस न खाओ अंडा ना खाओ पराई बहन बेटी या पराई पुरुष की तरफ गंदी वृत्ति से इतना कर लो तो बहुत बड़ी कृपा हो जाएगी बस बात समझ में आ जाए नए नए बच्चे ना हां शराब पीना ये बॉयफ्रेंड और गर्लफ्रेंड आज कोई फ्रेंड बनता है फ्रेंड वही है दोस्त वही है जो दोस्त को सुख देने के लिए अपनी जरूरत पड़े तो बलिदान कर दे उसको अपवित्र होता में थोड़ी ले जाए माता-पिता का प्यार छुट करके उसके धर्म उसकी भावनाओं का नाश करके उसके
शोषण की वृत्तियों को बढ़ा देना य कोई फ्रेंड है कोई फ्रेंड है अपनी वासनाओं के जाल में एक दूसरे को फसा के खेलना कोई फ्रेंड है फ्रेंड का मतलब क्या होता है जब जाम जाओगे तब समझ में आएगा तो बचो य बॉय फ्रेंड गर्लफ्रेंड इस भाव से बचो य गंदे वशन से बचो छोटे-छोटे बच्चे हैं गंदी गंदी बातें हैं अभी उस दिन एक लड़का प्रश्न कर रहा था कह रहा था मैं गृहस्ती लायक नहीं रह गया ना विरक्ति लायक रह गया हूं हस्त मैथुन करके मेरा पतन हो गया है तो व अपनी बात थोड़ी कह रहा है ऐसे हजारों बच्चे हैं खिलवाड़ समझते हैं इसको अब किसको समझाए बात करो तो क पुराने जमाने के तो बाबा जी वाली बात कर रहे शास्त्रों वाली बात तो नए जमाने में देख लो क्या होता है क्या हो है बहुत यह बातें यद्यपि हमारा विषय नहीं फिर भी हम इसे बार-बार बोलना चाहेंगे नए योको से कि आप इस बात को समझिए आपकी राह बहुत गलत है और यह गलत राह आपको कहीं किसी भी तरह चैन नहीं लेने देगी आज हमारे जो बुजुर्ग है माता-पिता वह देखते रह जाते हैं उनकी बात नहीं मानते मन माना
आचरण कर रहे हैं भगवान स्वयं प्रातः काल उठकर माता-पिता के चरण छूते थे माथा रख कर के आज बात बात मान लो मत चरण छु कम से कम थोड़ी मान लो तो उनको तो ऐसे जैसे पुरानी चीजें डस्टन में फेंक दी जाती है ना ऐसे माता-पिता को साइड में कर दिया अभी नई जवानी है सोच समझ है नहीं इसलिए भाई यही हमारी प्रार्थना है कि गंदे आचरण मत करो गंदे दृश्य मत देखो गंदे लोगों से मत व्यवहार रखो कोई तुम्हारा मित्र नहीं है भगवान को अपना मित्र बनाओ और व जब मित्र रूप से आपको किसी को देंगे तो धोखा नहीं होगा इंतजार करो चाहे वह पत्नी रूप में हो या पति रूप में हो इंतजार करो व भगवान जब देंगे ना तो आपके कर्म के अनुसार सही मार्ग मिलेगा मनमानी आचरण जो बहुत बहुत हानिकारक बहुत हानिकारक है बिल्कुल बच्चे नहीं समझ रहे बिल्कुल नहीं समझ रहे इसलिए सावधान रहो क्योंकि नई पीढ़ी ही हमारा नया भारत होगा भाई जिस समाज में हम जी रहे हैं तो चाहे महात्मा हो चाहे हम जो भी हो है तो समाज अंतर्गत ही कपड़ा लत्ता भोजन व्यवहार बातचीत तो समाज की है अगर आप
पवित्र नहीं रहेंगे तो हम कहां से पवित्र रह जाएंगे हमारा भोजन आपकी तरफ से ही तो आता है चाहे जितना हम कहे कि हमें भगवान दे रहे हैं तो दे तो रहे ना भगवान पर इन हजारों हाथों से ही तो दे रहे हैं ना अब अगर आपका वह अधर्म से कमाया हुआ पापा चरण से भ्रष्टाचार से तो हमारी बुद्धि को भ्रष्ट करेगा ना तो हम भी तो नष्ट हो गए ना इसलिए आप सावधान रहो आप सुखी रहो आप पवित्र रहो तो सब सुखी है सर्वे भंतु सुखना का सूत्र तभी लागू होगा जब एक अपने को सुधारना शुरू करते अगर आप 10 सुधर गए तो बहुत बड़ी बात हो गई 10 ने नियम ले लिया शराब नहीं पिएंगे गंदा काम नहीं करेंगे गंदी बातें नहीं सुनेंगे नहीं बोलेंगे नहीं देखेंगे तो आप बहुत अच्छे देवी संपत्ति वान पुरुष बन गए फिर क्या है कम से कम मनुष्यता तो यार न देवी संपत्ति मान तो मनुष्यता तो ना छोड़ प पुरुष से ब विचार करोगे परा स्त्री से ब विचार करोगे तुम भगवत मार्ग की बातें सुनने के लायक नहीं रह गए तो बोलना और चलना तो बहुत बड़ी बात रहे आप अगर दुखी अभी अभी किसी देश का आक्रमण
हमारे ऊपर हो जाए तो हम माला लेकर बैठ पाएंगे क्या हम आनंद से ध्यान लगा पाएंगे क्या ऐसे ही अगर ये व विचार फैल रहा है वो वायरल फैला था क्या करोना बाबा जी को भी हुआ था सबको ला ऐसे ये वायरल है व विचार वायरल बुद्धि को भ्रष्ट करने वाला सबको अपने जाल में फसा लेगा इसलिए सबको सावधान रहना चाहिए वायरल है जो नाश कर देगा कलयुग फैला रहा है वायरल और इस वायरल की कोई दवा नहीं है इस वायरल के लिए वैज्ञानिक तैयार नहीं है इसके लिए छूट दी जा रही है अभी हमको किसी ने बताया था लिविन रिलेशन य सरकारी पास है यह क्या क्या बुद्धि बदल रही देखो कैसी ब जैसे घरों में र जाता है ऐसे साधारण स्नान आदि करने के लिए कपड़े पहन के ऐसे लोग बाजारों में घूमने लगे शर्म गई लिहाज गई पवित्रता गई धर्म गया बुद्धि गई माता पिता की आन गई मर्यादा तो मुझे लगता है कि कुछ मिल तो नहीं रहा ना पढ़ाई लिखाई से अच्छे आचरण से हमारे को कुछ मिलना चाहिए अगर ये अच्छे आचरण तो हमें मिलना चाहिए ना कि तो क्या परिणाम हुआ तुम्हारे साथ वीआईपी पने का यह तुम्हारी
सुंदरता का नए-नए आविष्कारों का परिणाम क्या हुआ छोटे-छोटे बच्चे बच्चियां अपने को इस हाल में पहुंचा हमें तो लगता है माता-पिता को अपने बच्चों से बैठ कर के मित्रवत व्यवहार करना चाहिए दोस्त की तरह तुम्हारे पिता भी है तुम्हारे दोस्त तुम्हें अगर कोई भी बात कहनी हो छुपाना मत तुम हमारे बच्चे हो एक मित्रवत भी थोड़ा उनको बल देना चाहिए एकदम टॉर्चर नहीं करना चाहिए अगर बच्चे कहीं गलत जा रहे हैं तो उनको प्रेम से बैठल करके सुधारा जा सकता है उनको ऐसा मतलब सपोर्ट दो कि वो अप आंतरिक बात आपसे कह सके नहीं तो जब माता-पिता का रुद्र रूप और बाहर छल कपट उनको एक ही रास्ता नजर आता है अब क्या करें तो फिर इसलिए सावधान रहो और भजन जरूर करो भाई चाहे 24 घंटे में 10 मिनट ही करो पर भजन जरूर अगर 10 मिनट भी करोगे तो 24 घंटे को आपको बचा लेगा 24 घंटे को सार्थक कर 10 मिनट भजन शुरुआत तुम करो संभालेंगे प्रभु राधा राधा
यह पाठ वीडियो के स्वचालित (auto-generated) उपशीर्षकों से लिया गया है — इसमें शब्दों की त्रुटियाँ हो सकती हैं। प्रामाणिक वचन के लिए वीडियो अवश्य सुनें।
मूल वीडियो: Bhajan Marg (YouTube)
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