॥ श्री राधावल्लभो जयति ॥ श्री हित हरिवंश चन्द्रो जयति ॥
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भगवान निर्गुण निराकार है, तो मूर्ति पूजा क्यों ?

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श्री हित राधा केलि कुंज, वृन्दावन में पूज्य श्री हित प्रेमानंद गोविंद शरण जी महाराज के साथ एकांतिक वार्तालाप। साधक अपने जीवन और साधना के प्रश्न रखते हैं और महाराज जी उनका समाधान करते हैं।

पूरा प्रवचन

सुदीप नायक जी राधा वल्लभ श्री हरिवंश राधे राधे महाराज जी मैं यूट्यूब के माध्यम से आपसे जुड़ा हूं 1 साल से आपका एकांतिक सत्संग सन रहा हूं महाराज जी बहुत से अध्यात्म मार्ग के प्रश्न उत्तर आपके द्वारा हमें मिले हैं महाराज जी में भक्ति और प्रेम मार्ग में आगे बढ़ाना चाहता हूं लेकिन कभी-कभी बुद्धि बहुत तर्कशील हो जाती है बार-बार कहती है ब्रह्म तो निराकार है ये प्रेम मार्ग फिर मर्जी आगे पूरा वैसा ही इनका एक पत्र कैसे हो सकता है कोई तेरे को अन्वय पढ़ती स्वीकार होती है हमें तुम्हारी बुद्धि तो तर्क करती हम तो 20 वर्ष उसी मार्ग में रहे संन्यास में बचपन से फिर मार्ग प्रभु ने दिया है तो ज्ञान का मार्ग दो पढ़ती लेकर चलता है और यह नहीं जो ननद तो देख रहे हो यह नहीं ब्रह्म विद्या nastinchan समझो प्रारंभ कहां से हुआ ब्रह्म शक्तियां जगन मिथ्या पूर्णता जिसे तुम मिथ्या करके आगे बढ़े द यही ब्रह्म सर्वम ब्रह्म ने ननद ब्रह्म से अलग नहीं जाने दोनों पक्ष देखो बर्फ जो है इस आकर रूप मानो पर है क्या यह चल ही तो है

और जल उसका निराकार रूप मानो तो जब जल की तरफ देख रहे हैं जब हम उसकी कृपा होगी कोई बहुत प्रवचन वही निराकार है वही शकल है वही नजदीक है वही दूर है वही जड़ है वही चैतन्य है उजड़ चैतन्य में भरे भी हैं समझ जाओ तो समझ जाओ फसे उसे छूटने का सरल उपाय कमजोर होगा पहले जाकर एकदम मतलब ये तूफान मचाना चाहे क्योंकि उसको पता है मैं टिक नहीं पाऊंगा पहले ही एकदम ऐसे तो जो कच्चा ज्ञानी होता है ना भर-भर एकदम अरे बाप रे इतना ज्ञान है ऐसा लगेगा वो ज्ञान नहीं ज्ञान जो होता है उसका गुण होता है गंभीर अपने लोग एक सेकंड में उसको पहचानते ही वस्तु क्या है ये शब्द तो बोल रहा है ब्रह्म ज्ञान की इसको ज्ञान नहीं क्योंकि वो अनुभव गम में है ना वो समझ में बस यही की सरकार को खानदान कर रहे द निंदा कर रहे द तो हमने कहा जिसकी आप निंदा कर रहे हैं वह वह नहीं है क्या करोगे वैसे आपको दिखने लगेगा इस सृष्टि का एक स्वरूप जैसा आप दृष्टि रखोगे वैसे अरे सब दुष्ट है तो आपको सब दुष्ट नज़र आएंगे उनको सब राम नजर आया गोपी जानकी सब श्याम है

उनको ब्रह्म नजर आया उनको देखा की इतना ज्ञान तरक्की नहीं रह जाता है वास्तविक ज्ञान तभी सूर्योदय वी तो कई अंधकार रह जाएगा क्या वही वही कुछ उसके शिव नहीं बचा महात्मा सुधार लो एक पक्ष तक सगुन मिलती शगुन उपासना करोगे तो वह जैसा है वैसा पूरे का पूरा अनुभव करता है जो है उसका ज्ञान नहीं होगा है तो अगर आप वास्तविक भाव से चलना चाहते हैं तो प्रभु के नाम और प्रभु के रूप इनका भगवान शिव की कृपा से मुनि की कृपा से मार्ग मिला है कोई अंतर नहीं स्वाद है एक ही परमात्मा विभिन्न रूपों में upaskon के भाव अनुसार है वही और जो केवल उसका भजन करता है तो सब रूपों में अनुभव कर देता की मैं हूं मेरे शिव कोई नहीं है यही अनुभव हो जाना देखो भक्त के अनुभव करता है चलो दोस्तों यह सब अज्ञान की धारा में होते हैं भक्ति मार्ग में भागवत मार्ग में लड़ाई झगड़ा का प्रश्न कहां रह गया जिससे झगड़ा हम करें वही हमारा प्रभु है हम झगड़ा किस कर रहे हैं जिसको हम नीचे कर रहे हैं वो मेरा प्रभु ही है अब क्या है

यह पाठ वीडियो के स्वचालित (auto-generated) उपशीर्षकों से लिया गया है — इसमें शब्दों की त्रुटियाँ हो सकती हैं। प्रामाणिक वचन के लिए वीडियो अवश्य सुनें।

मूल वीडियो: Bhajan Marg (YouTube)

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