मेहनत करते हैं पढे-लिखें हैं फिर भी धन की प्राप्ति नहीं हो रही ऐसा क्यों ?
श्री हित राधा केलि कुंज, वृन्दावन में पूज्य श्री हित प्रेमानंद गोविंद शरण जी महाराज के साथ एकांतिक वार्तालाप। साधक अपने जीवन और साधना के प्रश्न रखते हैं और महाराज जी उनका समाधान करते हैं।
पूरा प्रवचन
सोमेश जी हाथ रस से श्री हरिवंश महाराज श्री महाराज जी मेरा मन धन की तरफ बहुत भागता है महाराज जी मैं क्या करूं किय भजन में लगे पूरे संसार को तीन बड़े शब्दों में बांध दिया गया है कंचन कामिनी कीर्ति पूरे संसार को इ तीन बड़े शब्दों में बा कोई धन में आसक्त हो जाता है कोई स्त्री में आसक्त हो जाता है काम शब्द से स्त्री पुरुष का परस्पर आकर्षण और कोई मान प्रतिष्ठा में इसमें बड़े-बड़े राजी हो जाते हैं सम्मान होना यश कीर्ति होना प्रतिष्ठा हो है संसार के अंतर्गत कहीं ना कहीं कहीं ना कहीं सब फसे होते हैं वही मुक्त होता है जो भगवान पर महत्व बुद्धि कर लेता है जब तक हमारी बुद्धि संसार में बुद्धि इसलिए कि मन लगाम है और बुद्धि सारथी है इंद्रिया घोड़े हैं और बैठने वाला जीव है शरीर रथ है और रथ के घोड़े बहुत बलवान है लगाम जरा सा ढीली हुई तो फिर मैं सारथी रथी सहित गड्ढे में गिरा देंगे नहीं घोड़े बहुत बलवान है इंद्रिय रूपी घोड़ों को ठीक से चलाने के लिए मन रूपी लगाम को बहुत कसना होता है और मन रूपी लगाम को
वही बुद्धि रूपी सारथी कस सकती है जो भगवान के आश्रित है भजन करती है अगर भजन नहीं करती तो फिर नशे में है ड्राइवर माया का नशा काम का क्रोध का लोभ का मोह का मद का तो लगाम नशेबाज थोड़ी खींच सकता है व तो ढीली हो जाएगी और लगाम ढीली हुई तो घोड़े इतने बलवान है फिर धज्जिया उड़ा देते पूरा जीवन बर्बाद कर देते हैं अब जैसे धन में रति हो जाए धन चाहिए सबको संसार की व्यवहार के लिए सबको धन की पर वो धर्म से युक्त चाहिए तो ठीक है नहीं तो केवल धन में तो फिर क्या है फिर तो आप भ्रष्ट हो जाएंगे आप ऐसा कर लो आप ऐसा कर लो कितने गंदे काम हैं कितने ऐसे अधर्म रत कार्य हैं जिनमें धन की बाहुल्य होती है फिर आपको अधर्म खींच ले जाएगा अगर धन की प्रधानता रखोगे धर्म से चलो तुम्हारे प्रारब्ध में पूर्व से लिख गया है कि क्या तुम्हें धन मिलेगा यह प्रारब्ध से लिखा है इसमें आपका पुरुषार्थ थोड़ा सहायोग करेगा लेकिन मिटा नहीं सकता जैसे आपके प्रारब्ध में दरिद्रता ही लिखी है तो आप खोपड़ी के बल खड़े हो जाओ 24 घंटे कार्यरत रहो जितना
कमाओगे उतना साइड में ऐसा निकलने का चांस आ जाएगा कि फिर आप खाली हो जाओगे फिर आप खाली हो जाओ चाहे जितना उपाय कर लो क्योंकि आपके पूर्व ऐसे कर्म है और जैसे आपका है धनी होना तो अभी आप की अवस्था ऐसी है फटाफट ऐसे जुड़ते चले जाएंगे संयोग कि एकदम क्योंकि पूर्व संस्कार आपका जुड़ा अब इस प्रारब्ध को बदल सके वो केवल भगवत भजन है दूसरा कोई नहीं कोई कर्म इसे नहीं बदल सकता वह केवल भगवान ही बदल सकते हैं उन्हीं के हाथ में सब है तो नाम जप करो और धर्म से रहना धर्म धन
की प्रधानता अगर कर ली तो अधर्म में ले जाएगा ये पक्की बात ध्यान रखना ऐसे सलाहकार मिल जाए सुनो एक बार केवल तुम ऐसा कर लो बस फंस गए पुलिस ले गई बर्बाद हो गया परिवार बर्बाद अधर्म खींच ले जाएगा थोड़े दिन अधर्म में उन्नति दिखाई दे सकती है बढ़िया लाभ पर एकदम नष्ट हो जाओगे इसलिए धर्म से चलो नमक रोटी खाओ दूसरों को ना देखो तुमसे भी ऐसे हैं जैसे तुम रह रहे हो ऐसे वो नहीं रह पा रहे नीचे देखो अपने तुमसे भी गरीब लोग हैं जो तुम्हारे जैसे नहीं रह पा रहे अगर ऊपर देखोगे तो परेशान हो जाओ कितना ऊपर देखोगे तो अगर कभी मन कहे कि तो फिर नीचे भी देखो ऐसे भी गांव में लोग होते हैं जैसी आप व्यवस्था में रह रहे ऐसी व व्यवस्था में नहीं है तो धैर्य पूर्वक रहो और भगवान का नाम जप करो और अधर्म से धन मिले भी तो ना ले वह तुम्हारा नाश करेगा अच्छा नहीं होगा अधर्म से चलोगे तो थोड़े दिन लगेगा आपको कि आप बादशाह हो रहे हो बड़े आदमी हो रहे बड़े नहीं हो रहे बिल्कुल मिट जाओगे गरीबी से चलोगे धर्म से चलोगे तो नमक रोटी खाकर आराम से
सोओगे और भगवान सब व्यवस्था कर देते हैं देखो अगर आप अपनी स्थिति से देखोगे तो भगवान वैसे ही बेटी के लिए वर मिला देंगे वैसे ही बेटे के लिए बह मिला सबका है भाग्य है अब आप अगर सोचोगे कि ऐसे से हम छलांग लगाए और अधर्म करके तो घर में बैठक रोएगी आक उसको शांति नहीं मिलने वाली इसलिए न की प्रधानता तो रखो मत चाहिए सबको चाहिए कोई ऐसा नहीं है सबको अर्थ प्रधान समय है भाई बिजली है तो रुपया चाहिए हर काम रुपए से हो रहा है पर धर्म को देख करके अधर्म से नहीं अधर्म से मिट जाएगा धर्म से भी तो धन आता है हां थोड़ा ये कि कम आएगा पर शांति से तो रहोगे चैन से अपने परिवार के साथ सो तो सकोगे ऐसा क्या कि भागे भागे घूमो मारे जाओ इसलिए धर्म से चलो ऐसा क्या परिवार में भयानक ऐसे रोग ऐसी विपत्तियां ऐसी अशांति ऐसी बुद्धि बदल जाए तो एक दूसरे को खाए जा रहे हैं हर व्यवस्था है सब एक दूसरे के साथ छल कपट कर रहे हैं एक दूसरे को देखकर सहन नहीं कर रहे यह सब वृतिया अधर्म से आ जाती है ठीक है ना
यह पाठ वीडियो के स्वचालित (auto-generated) उपशीर्षकों से लिया गया है — इसमें शब्दों की त्रुटियाँ हो सकती हैं। प्रामाणिक वचन के लिए वीडियो अवश्य सुनें।
मूल वीडियो: Bhajan Marg (YouTube)
संबंधित
- स्वर्ग में वो कौन-सा सुख है, जो धरती पर भी नहीं है? — पारस कोहली जी नई दिल्ली से राधे राधे महाराज जी आपके चरणों में कोटि-कोटि प्रणाम महाराज जी सुख और दुख एक ही गाड़ी के दो पहिए हैं। मेरा प्रश्न यह है कि वह कौन सा सुख स्वर्ग में है…
- एकांतिक वार्तालाप एवं दर्शन #1401 — विक्रम पांडे जी मिर्जापुर से श्री हरिवंश महाराज जी राधावल्लभ श्री हरिवंश महाराज जी आपके चरणों में कोटि-कोटि प्रणाम महाराज जी आपका सत्संग सुनता हूं और कृपा का अनुभव है महाराज जी…
- संत भगवान के प्रश्न पर महाराज जी ने साधना जीवन के लिए क्या उपदेश दिया? — महाराज जी कुछ हम लोगों को आप बता दें कि जैसे साधना जीवन में क्या कैसे कुछ भी आप अपने मुखारविंद से कुछ सब बातों की केवल एक ही बात है ना विषय चिंतन होने पावे ना विषय क्रिया बस…
- परिवार में नकारात्मकता व कलह हो तो क्या करें? — एसवी चतुर्वेदी जी दिल्ली से राधे-राधे राधे-राधे महाराज जी महाराज जी परिवार में नकारात्मकता हो घर में कलह हो रही हो गृह युद्ध जैसी परिस्थिति बन रही हो तो अध्यात्म के रास्ते पर…
- एकांतिक वार्तालाप एवं दर्शन #1400 — संजीव मुखर्जी शेयर इवें राधे-राधे महाराज आईआईटी धनबाद से महाराज जी कृपया मुझे बताइए कि मैं कैसे कम बोलूं अधिक सुनूं बोलते समय नरम रहूं दूसरों को अपनी बात रखने का मौका दूं फिर…
- भगवत् मार्ग पर चलना चाहते हैं, पर हर दिन असफल हो रहे हैं। — आस्था बोरा जी जयपुर से श्री हरिवंश महाराज राधे-राधे महाराज जी 2 साल पहले जब आपको सुनना शुरू किया तो जानना हुआ कि हम कितना अज्ञानता और अंधकार में जीवन जी रहे हैं। आपको सुनने से यह…