किसी भी रोग से दुखी हैं तो ध्यान से सुनना ! आपको बहुत बल मिलेगा !!
श्री हित राधा केलि कुंज, वृन्दावन में पूज्य श्री हित प्रेमानंद गोविंद शरण जी महाराज के साथ एकांतिक वार्तालाप। साधक अपने जीवन और साधना के प्रश्न रखते हैं और महाराज जी उनका समाधान करते हैं।
पूरा प्रवचन
मराज जी तीन अलग-अलग प्रश्न है इसमें उदय मान सैनी जी म जी किडनी रोग से पेशेंट है काफी समय से 2018 से राजन सूत जी मराज जी न साल से कैंसर से पीड़ित है और जानवी जी म जी भी किडनी पेशेंट है तीनों के एक जैसे प्रश्न थे आपका सत्संग सुनने के बाद बहुत उत्साह मिला और भजन मार्ग पर आगे चलना चाहते हैं हमा जी एकदम निराश हो गए थे बट आपके सत्संग ने उत्साह देक आगे बढ़ा देखो निराश होने की कोई आवश्यकता नहीं हमारी दोनों फेल है आपने ट्रांसप्लांट करा लिया हा अब कि अगर हमारा चित्त इन सब बातों में लगा तो हम दुखी हो जाएंगे हमारा चि अगर प्रभु में लगा है तो सब बढ़िया अच्छा कितने साल चले गए ट्रांसप्लांट विवा विचार करके सोचो एक सीमा ही तो है ना य कितने साल शरीर चलेगा चाहे हम क कुछ भी कर लो एक समय तो निश्चित है ना यहां से जाने का वह समय पक्का है जाने वाला जब जाने वाला पक्का है तो मुझे जहां जाना है वहां की तैयारी करना चाहिए यहां से तो जाना ही है यह हमारे लोगों के ऊपर कृपा है कि हमारे पास एक साथी है हमें हर समय संबोधन
देने वाला कि रमो मत यहां तुम्हें यहां से जाना है जैसे कैंसर है ना यह कृष्ण मिलाने के लिए साथी मिला है किडनी खराब है ना वह श्री जी से मिलने के लिए प्रेरित कर रही है हमको नहीं डरना चाहिए मृत्यु एक बार होगी जो शरीर के भोग है हम भोग लेते हैं पर हम भजन में लगे तब हम लोगों की क्या इच्छा होती कि शरीर स्वस्थ हम भोगों को भोगे मौत से आ रहे कब तक रहोगे मरना तो पड़ेगा ही आज नहीं तो कल इसका ना मृत्यु लोग है जब जितने आए वो गए फिर हमको भी जाना चाहे महात्मा हो चाहे दुरात्मा मरना तो सबको पड़ेगा लेकिन मर के फिर मरना ना पड़े यह खास बात होती है हमारी आखिरी मृत्यु होनी चाहिए अब इसके लिए हमें भजन करना चाहिए डट के भजन करो राधा राधा जपो यह सब टिकाऊ चीजें नहीं है इसमें कभी सुखी मत हो कि हमारी किडनी बदल गई तो मन को विश्वास मत दिलाओ इस बात से दुखी मत हो कि हमारी किडनी खब दोनों बातें हम संबोधन इसलिए कर रहे कि रास्ता बन जाएगा एक मात्र प्रभु ही हमारे सुख का साधन है अगर हमारा प्रभु का चिंतन होता है तो दोनों फेल है
देखो आपके सामने बैठे हैं और कल डायलिसिस हुआ है और डायलिसिस में जो प्रसाद पाया था उसके अलावा नहीं पाया अब जाकर 230 11 बजे पाएंगे अपनी और एक बजे से दिन चर जा एक बजे रात्रि से इसलिए आनंदित रो और भजन प्रण रहो य कैंसर पैंसर कुछ नहीं है कृष्ण के आगे कोई है क्या कुछ नहीं ये बना रहे कोने भाई जाना तो हैय जिस दिन जाना है उस दिन पक्का जाना है बस नाम जप करें श्री जी का और निश्चिंत रहे हमें परेशान नहीं होना है आप लोग परेशान तो नहीं हो हां मस्त रहो परेशान हां जाना को 100 बार थोड़ी मरना है एक बार मरना है बिल्कुल आनंदित रहो कोई हमें परास्त नहीं कर सकता हम श्री जी के हैं हम लाडली जी के हैं और जब जाना है तो हम लाडली ज के पास जाना अपने घर जाना है परेशानी क्या है यह परिचय मृत्यु से इसलिए डर लगता है कि आपको मरने के बाद ठिकाना निश्चित नहीं है देखना जिनसे आपने अपना परिचय बढ़ाया वह सब छूट जाएंगे जो कुछ आपने माना है वह सब छूट जाएगा इसलिए आपको डर लगता है मरने से यह शब्द हमारे चिंतन में रखना और यह पहले ही तुमने
छोड़ दिया सब छूटने वाला है और पकड़ लिया गोरे सावले चरण अरविंद राधा राधा राधा क्या जाब मरने से सब जग डरा मेरो मन आनंद कब मरि हो कब भेट हो पूरण परमानंद अपने प्यारे से मिलने के लिए म अरे यही देख लो दो मित्र बनते हैं और उनका परस्पर वियोग होने का अवसर होता है तो फांसी चढ़ा लेते हैं अपने शरीर को जहर खा लेते कि हम तुम बिना नहीं जिएंगे मृत्यु ऐसे हंसते हंसते स्वीकार कर लेते नहीं कर लेते देखो ना कितनी बातें आती समाचार को लड़की लड़के ने जहर खा लिया उनके परिवार में विरोध था इसलिए मिलने मृत्यु कोई बहुत भयावह वस्तु है अरे दो प्रेमी एक चट मतलब जरा में अपने को नष्ट कर देते हैं जरा से प्यार में नष्ट कर हम बड़ा प्यार कर रहे हैं प्रियालाल फिर हमें मृत्यु का डर लगे मतलब अभी प्यार हुआ नहीं प्रियालाल से नहीं प्रियालाल से अपनापन मृत्यु क्या है जाना तो है ही एक दिन मस्त रहो नाम जप करो और भूलो मत प्रिया लाल को यह किडनी टिकाव नहीं है इसका स्थाई इलाज श्री जी की प्राप्ति है जिनकी ठीक है वोह कब चले जाए कोई पता ले
निकले रोड में पहुंचे बटोरने लायक शरीर हो गया यह बुरा लगता है सुन कर के लेकिन कहानी ऐसी ही है कब कहां काल हमें रौंद दे कुछ पता नहीं इसलिए हर समय सावधान रहो राधा राधा राधा राधा आनंदित रहो दवाइयां तो आपकी भी चलती होंगी हां मस्त रहो दवा लो अब राधा राधा राधा पत्नी नहीं पत्नी आई हैने किडनी हां वास्तविक तो वही पत्नी है जो मतलब अपने पति की प्राण रक्षा के लिए शाम को नौ माला करता हूं राधा रानी की और एक बेटी का भाव आता है राधा रानी कोई भी हमारी श्री जी तो ऐसे लाल जो ऐसे कोई भी भाव कर लीजिए कोई भी भाव कर लीजिए धन्यवाद है आपको कि आपने अपने पति के लिए ऐसा समर्पण किया बहुत सुंदर भगवान की कृपा है आपके ऊपर ऐसा ही होना चाहिए एक दूसरे का प्यार जो है ना पति पत्नी का ऐ ही होना चाहिए य बीच में राक्षसी भाव डिवोर्स आ गया है ना इसको हटा देना चाहिए ये राक्षसी भाव स सुख बादशा से पागल होकर के लोग ऐसा करते हैं वास्तविक तो यही कि जब हम दो मित्र मिले हैं तो एक दूसरे के प्राणों को समर्पित करते हुए आगे बढ़े हमें बहुत
अच्छा लगाय सुनकर कि आपकी पत्नी ने आपको
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मूल वीडियो: Bhajan Marg (YouTube)
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