पुत्र की मृत्यु पर मन बहुत विचलित है, मार्गदर्शन करें !!
श्री हित राधा केलि कुंज, वृन्दावन में पूज्य श्री हित प्रेमानंद गोविंद शरण जी महाराज के साथ एकांतिक वार्तालाप। साधक अपने जीवन और साधना के प्रश्न रखते हैं और महाराज जी उनका समाधान करते हैं।
पूरा प्रवचन
पूजा शुक्ला जी औरैया से श्री सदगुरु भगवान आपके चरणों में कोटि कोटि प्रणाम महाराज श्री मैं पिछले दो साल से आपका सत्संग ट के माध्यम से सुनती हूं मेरी आस्था श्री जी और आप में अनन्य है महाराज श्री अकस्मात आठ महीने पहले इस शरीर का एक पुत्र था वह पधार गया इस कारण मैं अपना मानसिक संतुलन अब खो रही हूं महाराज श्री मुझे बल प्रदान करें महाराज श्री मैं अब प्रिया प्रीतम जिस अवस्था में रखें मैं सह स्वीकार करना चाह रही हूं इसमें कृपया महाराज जी मेरा मार्ग दर्शन
करें इसका नाम मृत्यु लोक है हम कई बार सत्संग में कहा है कि पहले पता तो लगाओ तुम रह कहां रहे हो इसका नाम मृत्यु लोक है मृत्यु लोक मरना मृत्यु सबकी होगी अब यह निश्चित है प्रभु किसको किसी को गर्भ में किसी को गर्भ के बार किसी को कुमार अवस्था में किसी को जवानी अवस्था में किसी को वृद्धावस्था में कब प्रभु किसको बुलाते हैं य अब ये तैयार रहो भाई जाना है यहां से सब को जाना है अब दुख तो इसलिए होता है कि हमने अपना माना है ना अभी आपको हम बताए कि अमेरिका में 500 बच्चे मर गए आपको कोई कष्ट नहीं होगा 500 मरे लेकिन आपको कष्ट नहीं होगा क्योंकि आपने अपना माना नहीं अपना कोई संबंध नहीं मरे तो मरता रहे और आप ही उपदेश करोगे अरे कहां सत्संग में तो मरने जीने की बात लगा दी 500 मरे वो तो सब को मरना है लेकिन जब अपना बेटा गया तब वो ज्ञान काम नहीं करता क्योंकि हमने संबंध रखा अपनापन रखा जिसे कह कहते मोह अब मोह के कारण कष्ट होता है कोई तुम्हारा नहीं है तुम्हारा शरीर तुम्हारा नहीं है तुम्हारा बेटा कैसे तुम्हारा बेटा हो
सकता है व तो भगवान का जीव है जिस समय के लिए कर्म के लिए भेजा वापस बुला लिया ना पहले तो मुसे जानते थे ना बाद में तुम जानते हो बीच में तुमने मान लिया था उसी मान लेने का तुम्हें कष्ट मिल रहा है मेरा बेटा और भगवान ने बहुत बुरा किया या जैसा भाव कि मेरे बेटे को भगवान ने छीन लिया गलत बात भगवान के बेटे को तुमने अपना मान लिया था उसी का तुम्हें दुख हो रहा है क्योंकि व जीव भगवान का अंश है ना तुम्हारे कर्म के अनुसार उतने वर्ष तुम्हारे साथ रहने के लिए केवल आया था इसके बाद चला गया हमें लगता है कि मन को विचलित ना करो धैर्य पूर्वक विचार पूर्वक नाम जप करो और यह तो सबके साथ होगा सबके साथ होगा नहीं होगा हम सबको जाना है भैया कोई आगे जा रहा है कोई पीछे से कोई तैयारी कर रहा है और जो बिना तैयार थे वो पछता पछता के जा रहे जाना तो है ही सबको हमें लगता है तैयारी कर ले तो अच्छा रहता है जैसे तैयारी कर ले ना कि अपने लोग है तो मरने की तैयारी करके बैठे हैं कभी भी बुलावा आवे फिर तुरंत ब भाग चलो प्रियाज के पास जाना है
तैयारी किए बैठे अब अगर यहां हम तैयारी कर रहे हैं तो फिर जब बुलावा आएगा तो बस यही ध्यान आएगा कि यार य लाखों कमाया सब छूट रहा है अब क्या होगा जहां जाना वहां तो कुछ परिचय नहीं है तो घबरा जाता है जीव फिर यमदूत फिर उनका हिसाब किताब करते हैं इसलिए अपने को राधा राधा राधा और देखो सच्ची मान लो ना मानो तो भी देख लो तुम्हारा कोई बस नहीं है तु अपने ना बच्चे पैदा कर सकते हो ना बचा सकते हो ना उनको भेज सकते हो कोई बस नहीं है जहां देखो ना स्वस्थ स्त्री पुरुष एक भी बच्चा नहीं उनके बाक कर्म में नहीं है तो नहीं है और गरीब आदमी है कई बच्चे हैं वो नहीं चाहता फिर भी बच्चे और सब स्वस्थ है जुकाम भी नहीं हो रहा खाने की व्यवस्था नहीं पर वो घूम रहे और एक हुआ लाखों रुपया खर्चा हुए पधार गया पूरे जीवन का शोक अब यह सब कर्मों का खेल चल रहा है कोई अपला नहीं कोई पराया नहीं ये बाजार है खेल चल रहा है माया का चल रहा है
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मूल वीडियो: Bhajan Marg (YouTube)
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