एकांतिक वार्तालाप एवं दर्शन #132 · 17 मार्च 2023
श्री हित राधा केलि कुंज, वृन्दावन में पूज्य श्री हित प्रेमानंद गोविंद शरण जी महाराज के साथ एकांतिक वार्तालाप। साधक अपने जीवन और साधना के प्रश्न रखते हैं और महाराज जी उनका समाधान करते हैं।
पूरा प्रवचन
मीनू जी हरियाणा से राधा वल्लभ श्री हरिवंश गुरुदेव आपके चरणों में कोटी कोटी प्रणाम जिसे अपने के लिए आप तुल्य महापुरुष अपना जीवन अर्पित कर देते इसमें संसार बिल्कुल पसंद नहीं तो मार गए सुविधा भोगी है तो उसको भी चेस दिया पत्नी दे दी परिवार दे दिया और उसमें आसक्त हो गया तो दुर्गति हो जाएगी अनशक्ति वैसे होना पड़ेगा जैसे बैरागी पर बैरागी व्यवहार में भी है ना ए सकता है पर वो व्यवहार में आसक्त होते हुए अंतरात्मा सी सकते और प्रभु से भजन में चित जोड़कर के अपनापन कर लिया है उसको वही गति प्राप्त होगी जो अब इसमें स्वभाव के अनुसार रचना रची गई हमसे प्रश्न किया था वहां रामकृष्ण मिशन में जब गए आपका मन तो बहुत ग्रेजुएट ग रहा है यहां के झाड़ू पूछा लगाने वाले चपरासी क्यों नहीं आप बने भगवान ने बना दिया तुमको उत्तर समझ गए ना भगवान ने बाबाजी बना दिया भागवत प्रताप के लिए जरूरी नहीं है बेस परिवर्तन जरूरी है उद्देश्य परिवर्तन आपका उद्देश्य भगवान से मिलन तो आप गृहस्ट में रहते हुए परिवार का व्यवहार करते हुए खूब भजन
करें भगवान की प्रताप हो जाएगी दुर्गेश साहू जी छत्तीसगढ़ से महाराष्ट्र पिछली बार मैं गोवर्धन से एक छोटी सी शीला हमारे घर बिलासपुर लेकर गया था उसको तुरंत जितनी जल्दी हो सके वापस लाकर की राज्य में विराजमान कर दो शास्त्र निषेध करता बिल्कुल नहीं बिल्कुल नहीं गिरिराज जी की शीला ब्रिज चौरासी को उसके बाहर नहीं जानी चाहिए और नहीं तो फिर वो मतलब अपराध लगता है गिरिराज जी का मतलब असंतुष्ट हो जाना होगा ऐसा मतलब बिल्कुल सिद्धांत नहीं और यह गर्ग संहिता में लिखित बात है ऐसा गिरिराज जी की शीला को ले जान का अधिकार नहीं ब्रिज चौरासी कोश के अंतर्गत ले मतलब जितनी जल्दी हो सके लाकर विराजमान करें महर्षि अगस्त जी को पीड़ा पहुंच दी गिरिराज जी ने बाहर यहां से नहीं ले जा पे गिरिराज जी को इसलिए गिरिराज जी की इच्छा है रचित शर्मा जी लंदन से आपके चरणों में कोटि-कोटि नमन महाराज जी मैं पिछले 13 वर्षों से लंदन में निवास कर रहा हूं पिछले 4 वर्षों से युटुब से आपका नियमित सत्संग सुन रहा हूं एवं आपके बताए गए मार्ग पर
चलने का प्रयास कर रहा हूं महाराज जी पाश्चात्य जगत में वास करते हुए क्या वृंदावन की राज एवं नाम जाप के द्वारा हमें शिवा वृंदावन वास के तुल्य लाभ एवं भागवत प्रताप मिल पाएगी क्या अगर आप चिंतन में रहेंगे तो अब देखो मां जैसी इसमें तो अंतर हो ही जाता है तुलना में वृंदावन जैसी मां और मां जैसी ऐसे तो बात कर सकते वृंदावन ही है किशोरी किशोर के समाज तो सिर्फ किशोरी किशोरी करके जाना चरणामृत लेना नाम जाप करना वृंदावन का चिंतन करना सत्संग सुना तो शरीर वहां छूटेगा ए शक्ति वृंदावन से इस लीला मिल जाएगा वृंदावन का ऐसा भाव रख के और कोशिश अंदर से इच्छा की हमें कभी वृंदावन वास मिले जीवन में र पे पर इच्छा करने में क्या जाता है की कभी ऐसा हो की हम वृंदावन जैन और वहीं भजन करें हमारा शरीर में छठ जाए गाना गुरुदेव आपके चरणों में कोटि-कोटि नमन गुरुजी मां बुद्धि आत्मा का क्या संबंध है हमारे विचार और उनकी प्रेरणा आत्मा द्वारा संचालित होती है यह हमारे मां द्वारा कृपया कर मार्गदर्शन आत्मा निष्क्रिय उसके द्वारा कोई
क्रिया नहीं होती ना सर जैसे लोहे का चुंबक होना हम ऐसे रख दे और ऐसे लोहा हो उसके अनुपात के अनुसार तो हम जैसे चुंबक करेंगे वैसे नाचेगा पर चुंबक की इच्छा नहीं की लोहा नाच चुंबक की इच्छा नहीं की लोहा आकर्षित हो ऐसे आत्मा स्वरूप अचार है निष्काम पर भारी पावर है भारी पवन उसके पावर से मां बुद्धि चित अहंकार चेतन हो रहा है पावरफुल हो रहा है उसका प्रयोग कहां हो इंद्रियों के भोगो में उसे पावर को तो वही मां गांधी बात सीखना है वही बुद्धि गंदा निश्चय करती वही चित गंदा चिंतन करता अहंकार गांधी वासुदेव मैंने भोग मैंने कमाया मैं भिगूंगा मैं भूख सकता हूं ये सब अंतकरण में हो रहा है आत्म तत्व का इससे कोई मतलब नहीं तेरे लोग कहते हैं यार आत्मा प्रश्न हो गए वह ज्ञानी जान है आत्मा तो हर समय अखंड प्रसंग रहती है आत्मा को कोई मार नहीं सकता नैनम चंदन अष्ट शरीर को भेज सकते हैं कोई भी गली आत्म तत्व को आज तक कोई भी एक श्रद्धा तत्व को नहीं पकड़ पाया आत्म तत्व क्या मां को नहीं पकड़ के देखो ये मां जा रहा है ऐसा तो सबका
प्रकाशक है इस के प्रकाश में अब आप क्या करते हैं इस के सुधार के लिए सत्संग है शास्त्र स्वाध्याय की आप अपने बाल से मां को रुकिए गलत आदतों में ना जाए अच्छी याद तो आपको आनंद आने लगेगा और इसका आंतरिक रहस्य की जी समय आप सही मेन में धर्म से चलेंगे और भगवान का नाम जाप करेंगे से आत्मा और परमात्मा में क्या अंतर है पैसा से मेहनत कर होता है जहां अपने को जानोगे तो फिर और किसी को जानना बाकी नहीं र गया क्योंकि जो अपना है वही प्रभु है जो आत्मा है वही परमात्मा है
उसको जीवात्मा शरीर के करण आत्मा को गली दी जा रही समझो अगर जीवात्मा कहा गया जैसे किसी रिक्शा खड़ा हो गया कितना बड़ा अपमान वो रिक्शा है पर वह भी खड़ा हो जाता है क्योंकि रिक्शा वो चालक ना बैंड करके रिक्शा में तादात में हो गया है तो रिक्शा तो एक सवारी को कहते हैं ना जिसमें सवारियां बैठने हैं पर वो अपने को मां के खड़ा हो जहां जी बोलिए बोले तुम रिक्शा क्या अगर उसे तू रिक्शा हमारा जीवन यापन करने का है अब रिक्शा बोला तो इसी लिए खड़े हो गए परमात्मा तत्व को मानो बहुत गंदा बोला जा रहा है जीवात्मा क्योंकि डे भाव को स्वीकार करने के करण वो जीव कहा गया नहीं है कौन हूं वही है वही दूसरा नहीं है जैसे 1000 खड़े रख दो उनमें सूर्य का प्रतिबिंब पद रहा है तो हजार खड़े दिखाई दे रहे हैं हजार सूर्य दिखाई दे रहे हैं एक ही आत्म तत्व अनंत रूपन में भास रहा है ये ग दे है एक ही परमात्मा है दूसरा नहीं एक ओ ब्रह्म द्वितीय नास्ति दूसरा नहीं है पर ये थोड़ा भजन करके ऊंचाई पर अध्यात्म में चले तब में आएगा समझ नहीं साकी जी
महाराज क्या है या श्री कृष्णा के दास हैं स्कूल में हमें पटाया गया था की जैसे सवाल हाल करना है तो मनी संख्या मक और फिर उससे सवाल हाल हो जाता तो माननीय संख्या गुरुदेव हम क्या है तुम क्या छोड़ो मान्य संख्या गुरु साक्षात परम ब्रह्म अब वह जो बोले अब चलो जब चलोगे जहां पहुंचोगे वह और आप खत्म हो जाएंगे एक ही र जाएगा भगवान को मित्र मां लो भगवान को स्वामी मां लो प्रीतम मां लो जो उनको केला मां लो बेटा मां लो वो तो इतने कृपालु कुछ भी मां लो तैयार है जिसका नाम सुनने से परम मंगल होता है भगवान मेरे यहां बेटा बन करके आए क्यों बेटा रूप से उनको प्राप्त करने के लिए उपवास है मेरा प्रभु कितना करोड़ में जगत का आप हो करके बेटा बन करके आया है जो जगत का कल को भी भयभीत करता है वो काजल मिस्त्री ऐसे डर पर रहे कितना प्यार प्रभु है जो भाव रखें वह भाव प्रभु चाहिए मेडिकल स्टोर में सब दवा है उसे हमारा कम नहीं बनेगा हमें डॉक्टर की जरूर है की हमको कौन सी दवा सूट करेगी तो लिख देगा परचम मेडिकल स्टोर से ले आओ का लो ठीक हो
तो जितने ग्रंथ हैं जितने पंत हैं ये सब मेडिकल स्टोर है गुरु है भाई ये चलो ऐसे करो ये खाओ ये पो ये जपो ये ध्यान करो बहुपद से मुक्त हो गए सद्गुरु वैद्य बच्चन विश्वास संजय भैया एन विषय गया सा अब मनमानी मेडिकल स्टोर में खाओगे तो हो सकता है मा भी जो क्योंकि वो कौन सी दवा कहां चली गई क्या रिजेक्शन कर जाए इसलिए जैसे डॉक्टर की अत्यंत अनिवार्यता है रोग निवृत्ति के लिए ऐसे भाव रोग की नियुक्ति के लिए गुरु के अनिवार्य आवश्यकता है तो किसी महापुरुष को किसी ग्रंथ को किसी वाणी को गुरु मानकर उसके अनुसार चल दो अपना कम बन जाएगा हम जो है वही पता चल जाएगा अच्छा ये ऐसी चीज तो है नहीं की यह देखो प्राकृतिक चीज तो है नहीं जो वास्तु है वो मां बुद्धि के भी पैर है हर चीज मां बुद्धि से जानते हैं तो मां बुद्धि प्रकृति जन तो दिखा शक्ति है लेकिन परमात्मा तत्व को क्योंकि इस से उसको प्रकाश मिल रहा है वो अपने प्रकाशक को कैसे दिखा दे इसलिए राम अवतार के बुद्धिमान बनी वहां मां बुद्धि का भी प्रवेश नहीं ये अनुभव कैसे होता
है जब हम उनसे याचना करते भजन करते हैं तो हमारे मां बुद्धि में वो आकर के अनुभव कर मां बुद्धिमान नहीं जा सकते लेकिन मां बुद्धि में तो ए सकते हैं उनकी ऑफिस में वो आकर बैठ जाएंगे वो हमारा मां कृष्णा में हो गया हमारी बुद्धि भगवान में हो गई सब बात बन गया कोलकाता से महाराज जी यदि कोई गुरुदेव भगवान का नाम पूछे हमसे तो हम गुरुदेव भगवान का नाम ले सकते हैं क्या हां बहुत कठिनता से लेते हैं जैसे अब हमसे लगता है की कभी ऐसे उच्चारण किया दो कर बार वो भी बहुत हुए
की जैसे आप जबरदस्ती हमसे निकलवा रहे तो प्रातः स्मरणीय परम पूज्य श्री महाराज मतलब एक ऐसा ग रहा है की जबरदस्ती बुलवाया जा रहा है नहीं तो हृदय में नाम लेने की समर्थ नहीं र जाएगा की परम पूज्य प्रातः स्मरणीय हमारे जीवन पूज्य मतलब ऐसा लगे बोलो बोलो नचकते हुए अंदर तो उन्हें के हम दिए हुए नाम को जाप रहे हैं वही जीवन पर बाहर उनका नाम उच्चारण करने के लिए एक हिचक सी हनी चाहिए और ये होना ही चाहिए समझ रहे हैं आपकी छवि देगी थोड़ा सम्मानित शब्द लगाकर के और किसी
को बता दे कोई इसमें अज नहीं है आप जैसे हमें लगता है की हमसे किसी ने पूछा ही नहीं आज तक तुम्हारे गुरु का ख्याल रखना चाहिए अब जैसे कोई पूछता है तो बढ़िया है फोटो दिखा दीजिए हमारे गुरुदेव
यह पाठ वीडियो के स्वचालित (auto-generated) उपशीर्षकों से लिया गया है — इसमें शब्दों की त्रुटियाँ हो सकती हैं। प्रामाणिक वचन के लिए वीडियो अवश्य सुनें।
मूल वीडियो: Bhajan Marg (YouTube)
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