मेरे से बहुत बड़ा पाप हो गया है, मैं अब क्या करूँ ?
श्री हित राधा केलि कुंज, वृन्दावन में पूज्य श्री हित प्रेमानंद गोविंद शरण जी महाराज के साथ एकांतिक वार्तालाप। साधक अपने जीवन और साधना के प्रश्न रखते हैं और महाराज जी उनका समाधान करते हैं।
पूरा प्रवचन
राधा वल्लभ श्री हरिवंश गुरुदेव भगवान आपके चरणों में दंडवत प्रणाम गुरुजी मुझ आदम से पापी से पाप कर्म बन गए हैं जिसकी माफी भी नहीं हो सकती आप श्री के सामने आने की हिम्मत भी नहीं थी पता नहीं कैसे आपकी कृपा से आपके समीप आ गया हूं हम ये तो नहीं जानना चाहेंगे कि आपने क्या पाप किया पर हम यह जानना चाहते हैं कि जो पाप एक बार आपसे हो गया वो पुनरावृत्ति तो नहीं कर रहे हैं एक बार गलती हो जाए तो वह क्षमा के काबिल होता है कोई जान के भी हो जाए तो कह रहा है जरूर
जान के हो गई पर अज्ञानी है नहीं वास्तविक जानता अब अगर वह गलती पुनरावृत्ति हो रही है अब अछम में हो जाती है तो हमें देखना कि अगर कोई भी हमसे ऐसी गलती हो गई जिसका हमें हृदय में पश्चाताप है कि नहीं होना चाहिए कोई भी गलती हो फिर हम दोबारा नहीं होने चाहिए अगर दोबारा नहीं होगी तो भगवान कहते हम तो हम सर पापे मोक्ष अगर आप जान गए हो कि हमसे पाप हो गया है तो दोबारा बात ध्यान रखना दोबारा ना हो तो पहले वाला जो हो गया है कुछ और करने की जरूरत नहीं प्रश्चित करने
की जरूरत नहीं प्रभु का नाम जप करो उनके आश्रित रहो व सब क्षमा कर देंगे बड़े कृपालु है वो पर अगर बार-बार वही करते रहो कहते र क्षमा करो क्षमा करो तो फिर दंड से नहीं बच सकते यह पक्की बात समझ लो आज सत्संग में सुना कि यह सब बुरा जो मैं अभी तक कर रहा था गलत है और आज निश्चय किया कि अबलो नशा नी अनान और भगवान का भजन करने लगे तो भगवान कृपा करके सब वो नष्ट कर देंगे सब माफ कर देंगे लेकिन आज कहने के बाद फिर आप वही बार-बार करेंगे तो प्लस हो जाएगा फिर झेलना मुश्किल हो जाएगा यह जो भगवत शरणागति से बचाव पक्ष है वह य कि अवलव निशानी आज तक होता रहा हे नाथ आप ऐसा बल दीजिए कि दोबारा हमसे गलती ना हो कोई भी गलती खानपान व्यवहार कुछ भी गलतियां किसी से भी हो सकती है आगे से गलती ना करो प्रायश्चित अंदर यही जो जलन हो रही है आपको पछतावा हो रहा है यही प्रायश्चित हो नाम जप करो प्रभु के आश्रित रहो नाम जप नहीं हो रहा नाम कीर्तन करो कीर्तन राधा राधा राधा राधा राधा इसके लिए थोड़ी मन की जरूरत है होता है ना कि हमारा मन
प्रभु में नहीं लग रहा वो तो बहुत अच्छे साधक है जो मन को लगाना चाहते हैं मन नहीं लगा पर जवान राधा राधा राधा राधा राधारा अहो ब पतो गरिया य भग वर्तते नाम तुभ्यं अहो माने आश्चर्य की बात है वो चांडाल भी परम पूजनीय हो जाता है जिसकी जि ब्या प हरि नाम हो तो आपको तो राधा नाम मिला जो स्वयं हरि जपते हैं तो राधा राधा जबान से बोलो हमारा भजन नहीं होता व सिद्धों का भजन होता है भजन के लिए प्रयत्न करना होता है हम प्रयत्न करते करते अभ्यास करते करते जब ऐसी स्थिति को होते तब भजन होने लगता है जब होने लगता है तो फिर रुकता नहीं जैसे दिल की धड़कन नहीं रुकती ऐसे भजन नहीं रुकता अभी तो हम शुरुआत कर रहे हैं ना तो हमारा प्रयत्न होगा इसमें राधा राधा राधा राधा रा अब कह हमसे होता नहीं नहीं वैसी बात नहीं देखो इसको प्रमाद में मत डालिए आप में वाणी में सामर्थ्य है आप वाणी जी गाइए आप नाम कीर्तन कीजिए माना जप में मन नहीं लगता लेकिन राधा राधा बोलने में राधा राधा राधा राधा राधा राधा रा राधा राधा हो रहा है भजन तो हो ना राधा उल
श्री ह राधा हो रहा है भजन जरूरी माला से करें जरूरी में बंद करके करें भाई मंत्र का कीर्तन नहीं कर सकते नाम का तो कर इसको बहुत धीरे से भी गुनगुना सकते हो कोसी भी ध्वनि में फसा लो हमको भजन करना है किसी भी ध्वनि में फसा ले और अंदर ही अंदर गुनगुना र अंदर अभी आनंद आए पर हम लोग क्या प्रमाद है कुछ लोगों को ब्रम रहता है कि साधु महात्माओं को भेट दे देंगे फल दे देंगे वह आशीर्वाद दे देंगे कुछ नहीं सब नाटक है बिना भजन के भव से तरना असंभव बिल्कुल प्योर बात समझ
लो वि निश्चित बदा मिते न अन्यथा वचा से में बार मथे होए ब सिकता तेल बिनु हरि भजन स संतो की यही कृपा होती है कि हम उनके सामने बैठकर अपने मन के संश की निवृत्ति करें और उनकी आज्ञा का पालन करें बका सब नाटक बात समझ लेना फल फूल यह वह सब यह तो एक व्यवहार है इसमें कुछ नहीं है पक्की बात समझ लेना हाथ रवाना पैर छूना य सब एक व्यवहार है कुछ नहीं आज्ञा का पालन ना करो कुछ नहीं होने वाला आज्ञा का पालन करो तो सामने जाते ही उनकी दृष्टि पड़ेगी और आपको देखेंगे और अंदर से जो उनका प्यार आपके प्रति उदय होगा वह आशीर्वाद हो वो जबान से नहीं कहा जाता वह तुम्हारी आई हुई बाधाओं को ऐसे मिस के रख देगा नष्ट करके रख देगा आशीर्वाद मांगने की थोड़ी जरूरत है आप चलो जैसे बेटा है ना मां उसको कहती है कि भोजन पाले देख ये हलवा ये पाले और जब पा लेते तो मां का हृदय शीतल होता है क्योंकि वो मां है पाया आपने सुख मां को हो रहा है ऐसे ही गुरु को सुख होता है जब शिष्य उनकी आज्ञा पर भजन करता कल्याण उसका होगा पर गुरु को आत्म शांति मिलती
कि मेरे वचनों का आदर करने के कारण इस जीव का मंगल हो गया अब जो उसके बाधाएं पड़ रही हैं वो अपने पावर से हटाएगा क्योंकि आप चलना चाहते हैं ना आप चल के जब आप चल ही नहीं रहे प्र आप विपरीत दिशा को जा रहे हैं तो उनको चिढ़ लगेगी कि हम लाख बार समझाए आप ऐसा ना करो कर जाओ अ भोग हो जा भोग ऐसा माया फसा देगी कि सामने नहीं आ पाओगे ऐसा फसा दे कि एक बार राधा नहीं बोल पाओगे माया का प्रचंड रूप है एक बार राम कृष्ण हरि नहीं बोल सकते वह अपने पर आ जाए एक बार भगवान का चिंतन नहीं करने देगी गुरु कृपा हो जाए तो भगवान का चिंतन क्या भगवान स्वरूप हो जाओ भगवान में हो जाओ तो कृपा का मतलब जैसे लोगों कहना होता है ना जैसे यह सब नौटंकी नाटक है इसमें कुछ नहीं है अगर इस से हो तो लाइन से लग कर के सब हाथ रखवा लो परम पद में चले जाओ तो अभी हम बु तैयार है जब हम घंटों बैठ कर के रोगी शरीर कष्ट सहते हुए आपको उपदेश दे सकते हैं तो एक मिनट में यदि कल्याण हो तो हाथ रखने में क्या जाता है भैया हम तो तैयार है आपके जीवन के लिए तैयार अब
हमारा जीवन आपके लिए ही तो है जो शास्त्रों का स्वाध्याय जो संत गुरुजनों से सुना उस बात को शोध के अनुभव करके आपको बताए तो हम बताए कि भैया ऐसे सीधे रख दे जब आपका मंगल करना है तो हम आपको दौड़ भाग करो ऐसे मंगल होता है ऐसे कुछ नहीं होता ऐसे आज तक सब वो जो है व अलग बात है व्यवहार की आज्ञा पालन करो अभी इसी क्षण से आपका मंगल प्रारंभ हो गया आज्ञा पालन करो तो सब इससे नाटक कहते हैं माया का कुछ नहीं होता नाम जप से संतो ने कहा राम बोलो हरि बोलो कृष्ण अब तुम्हें कुछ किसी के आशीर्वाद की जरूरत नहीं बस उसमें लग जाओ जो कुछ चाहिए अपने आप सब विधान कर देंगे भगवान आप केवल लग जाओ अब लगो ना तो य सब नाटक बाजी इससे इस पर हमें विश्वास नहीं बचपन से हम इस पर चलना आपको पड़ेगा बड़े-बड़े सिद्धों के पास दर्शन किए बातचीत चलना आपको पड़ेगा उन हमें उनसे क्या लाभ मिला जो हम दसव वर्ष नहीं समझ सकते थे व एक सेकंड में समझा दिया बात हमारी समझ में आ गई और हमारे चलने के लिए अंदर उत्साह आ गया पर चलना आपको पड़ेगा आप ना चले तो
कोई ऐसे नहीं पहुंचा पाएगा पक्की बात है नहीं तो भगवान सामने खड़े और अर्जुन को उपदेश कर रहे हैं अपनी प्राप्ति का सामने खड़े कह रहे हैं कि अनन्य चेता सततम यो माम स्मृति नित्य सा तसम सुलभा पार्थ सामने खड़े हैं ये नहीं कह मेरा दर्शन कर लो सुलभ हो गया दर मुझे तुम देखते हुए भी नहीं देख पाओगे मेरा अनन्य चिंतन करो उसके लिए मैं सुलभ हो जाता हूं सामने खड़े बातचीत कर रहे हैं आए हुए विकारों को सहो माता स्प सातु कौते शीतोषण सुख दुखदा इनको सहो य नाशवान है तुम मेरा साक्षात्कार कर लोगे मतलब समझो भगवान सामने खड़े होक चिंतन करो तो संत जन कहते भगवान का चिंतन करो अगर नहीं करोगे तो नहीं समझ पाओगे इसलिए सावधान च
यह पाठ वीडियो के स्वचालित (auto-generated) उपशीर्षकों से लिया गया है — इसमें शब्दों की त्रुटियाँ हो सकती हैं। प्रामाणिक वचन के लिए वीडियो अवश्य सुनें।
मूल वीडियो: Bhajan Marg (YouTube)
संबंधित
- संत भगवान के प्रश्न पर महाराज जी ने साधना जीवन के लिए क्या उपदेश दिया? — महाराज जी कुछ हम लोगों को आप बता दें कि जैसे साधना जीवन में क्या कैसे कुछ भी आप अपने मुखारविंद से कुछ सब बातों की केवल एक ही बात है ना विषय चिंतन होने पावे ना विषय क्रिया बस…
- परिवार में नकारात्मकता व कलह हो तो क्या करें? — एसवी चतुर्वेदी जी दिल्ली से राधे-राधे राधे-राधे महाराज जी महाराज जी परिवार में नकारात्मकता हो घर में कलह हो रही हो गृह युद्ध जैसी परिस्थिति बन रही हो तो अध्यात्म के रास्ते पर…
- एकांतिक वार्तालाप एवं दर्शन #1400 — संजीव मुखर्जी शेयर इवें राधे-राधे महाराज आईआईटी धनबाद से महाराज जी कृपया मुझे बताइए कि मैं कैसे कम बोलूं अधिक सुनूं बोलते समय नरम रहूं दूसरों को अपनी बात रखने का मौका दूं फिर…
- भगवत् मार्ग पर चलना चाहते हैं, पर हर दिन असफल हो रहे हैं। — आस्था बोरा जी जयपुर से श्री हरिवंश महाराज राधे-राधे महाराज जी 2 साल पहले जब आपको सुनना शुरू किया तो जानना हुआ कि हम कितना अज्ञानता और अंधकार में जीवन जी रहे हैं। आपको सुनने से यह…
- भगवान मिलेंगे या नहीं कैसे पता चलेगा? — भगवत दर्शन का सर्वोत्तम उपाय क्या है? भगवान के दर्शन करने का सर्वोत्तम उपाय क्या है? भगवत दर्शन का सरल और सर्वोत्तम उपाय दिन रात उनके नाम का जप करो और एकांत में रो भगवान मिल जाओ।…
- अगर एक नाम का इतना बड़ा फल है, तो निरंतर नाम क्यों जपें? — निखिल जी मुंबई से राधा वल्लभ श्री हरिव श्री हरिवंश महाराज जी महाराज जी एक नाम का फल पूरा त्रिभुवन से भी बड़ा है तो फिर निरंतर नाम जप क्यों कहा जाता है क्योंकि एक नाम जिसको कहा…