MS Bitta ने देश की सुरक्षा के लिए क्या प्रश्न किया ? और महाराज जी ने उन्हे क्या आशीर्वाद दिया ?
श्री हित राधा केलि कुंज, वृन्दावन में पूज्य श्री हित प्रेमानंद गोविंद शरण जी महाराज के साथ एकांतिक वार्तालाप। साधक अपने जीवन और साधना के प्रश्न रखते हैं और महाराज जी उनका समाधान करते हैं।
पूरा प्रवचन
जैसे हम भगवान के भक्ति महापुरुषों को प्रणाम करते हैं ऐसे हम अपने देश के भक्तों को प्रणाम करते हैं जो हमारे देश का मंगल सोच हमारे देशवासियों का मंगल सोच वह हमारा हृदय है एक व्यक्ति से अगर पूरा गांव नष्ट हो रहा हो अगर एक जिला एक गांव से नष्ट हो रहा हो अगर एक जिला से पूरा देश नष्ट हो रहा हो उसको शासन में ले लेना चाहिए बस आपका चिंतन सही होना चाहिए धर्म युक्त होना चाहिए कोई परस्त नहीं कर सकता ये तो बाहरी सुरक्षा है आंतरिक सुरक्षा भगवान की होती है जिसमें वो दिव्या शक्तियां तुम्हारे साथ रहेंगे की यह चक हो जाए तो हो जाए लेकिन वो चुप करने वाली नहीं एस बिट्टा जी राधे राधे महाराज जी श्री हरिवंश आपके चरणों में कोटि-कोटि प्रणाम है गुरुदेव मेरे ऊपर 14 बार हमले हो चुके हैं मर्जी आप आगे लिख रहे हैं की इन्होंने जब भी प्रभु से कुछ मांगा मंत्र भूमि के लिए तो इनका दर्द भी गायब हुआ है एक शक्ति ने इनको संभाल है और 20 साल पहले मेहंदीपुर बालाजी महाराज जी से आपने देश के लिए मांगा था उनको मिला भी और ग्रामसेतु
तोड़ने की जब बड़ी आई तो उन्होंने कसम खाई थी की राम से तू नहीं टूटे तो वो भी सफल हुई महाराज जी जिसने मुझे आज तक इस देश की सेवा करने के लिए बचाएं रखा ऐसी कृपा की प्रभु ने क्या हम देश के लिए और दूसरों के प्राणों की रक्षा के लिए कुछ भी मांगते हैं तो भगवान पहले सुनते हैं और अगर ऐसा है गुरुदेव तो सर विश्व अपने देश की सुरक्षा और उन्नति के लिए मांगे तो भगवान सुनेंगे भगवान का एक स्वभाव है बहुत करुणा में स्वभाव है जब हम अपने भोग की सामग्री अपने सुख के लिए मांगते हैं तो यह पुकार थोड़ा विलंब से जाति है प्रभु के कान में उसके लिए फिर आपको योग्यता दिखानी पड़ेगी अगर दूसरे सुख के लिए दूसरों के हिट के लिए देश के लिए विश्व के लिए या किसी व्यक्ति के लिए पशु पक्षी के लिए भी वो तत्काल बात होती प्रभु से इसमें इसमें बिल्कुल संसाय ने जब हम अपनी वासनाओं की पूर्ति की मांग रखते हैं तो थोड़ा विलंब से बात होती क्योंकि इसमें आज्ञा से इस जीव का पाटन है जो अपने बहू के लिए मां लेकिन जो देश के लिए और दूसरों के उसको अलग से
भक्ति करने की जरूर नहीं है जैसे की ऋषि मनी को परपम पद मिलता है ऐसे इस देश भक्ति को भी जो अपने देश को भगवान का स्वरूप मानकर और देश की प्रजा को भगवान की सेवा मां कर करता उसको अलग से कोई साधना करने की जरूर नहीं उसकी वही गति होगी जो एक महात्मा की गति होती है क्योंकि जैसे अर्जुन जी का रहे मैं सन्यास लूंगा और भगवान करें तुम्हें युद्ध करना है आतंकी दोस्तो को विनाश करो जो धर्म में चल रहे हैं सन्यास लेने की जरूर नहीं इन अधर्मियों का विनाश करो और जो हमारे धर्म से चलने वाले असहाय जन्म है उनकी सहायता करो अगर उनकी सहायता में प्राण भी चले जाते हैं तुम्हें भागवत प्रताप होगी पर हिट श्रेष्ठ धर्म नहीं भाई पर पीड़ा सम नए युग भाई जो दूसरों के हिट के लिए कोई भी पीड़ा उसे परस्त करें कर सकते गरुड़ जी से का रहे की मैं दूसरे की बात नहीं मैं अपने अनुभव की बात का रहा हूं की यदि दूसरों के हिट के लिए तुम्हारे मां में बात है तो कोई भी परस्त नहीं कर सकता रोग शोक सांप दारुण धारी कोई भी तुम्हें सांप देकर नष्ट नहीं कर
सकता कोई रॉक तुम्हें परस्त नहीं कर पाएगा कोई भी वादा तुम्हें गिरा नहीं शक्ति क्योंकि तुम्हारा पर हिट की भावना है अगर पारित की भावना है देखो इन दोनों किडनी फेल है तेरे दिन डायलिसिस होता है और डायलिसिस मां की हालात क्या होती है वह तो जो उनके ऊपर बिताता है लेकिन अगर यह कुछ भीम देखें 1:30 बजे रात्रि से यहां के दिनचर्या शुरू होती है यह केवल इसी से है की हमारे देश के प्राणी ये समझे की विषय भोग धर्म पूर्वक करने से तुम्हें कभी शांति नहीं मिलेगी धर्म पूरक
विष्णु का सेवन करो दूसरों को सुख पहुंचाओ मेरे अंदर उत्साह ए रहा है मेरे अंदर बाल ए रहा है मैं आपसे बात करने की लायक समर्थ का रहा हूं कौन दे रहा है प्रभु दे रहे हैं ने हालात तो जिसे आप इतने बार शरीर की ऐसी व्यवस्था और इस पर भी आपका जोश हमारा देश सुखी रहे हमारा देश ऐसे निर्विकार भाव से रहे की परस्पर श्वेता बढ़ मित्रता बढ़ भाईचारा बड़े यह छोटी-छोटी जो मेरे बीच में बन रहे हैं ये सब है जैन हम एक घर के जैसे परिवार के अलग-अलग करों में रहते हैं ऐसे क्यों
नहीं र सकते एक बहुत बड़ा घर है उसका नाम भारत है यह जो अलग-अलग प्रदेश और ये जिला बने हुए हैं ये हमारे अलग-अलग इस बड़े घर के छोटे-छोटे घर हैं हम कोई भी कपड़ा धरण करें कोई भी बीच धरण करें हम एक ही के बच्चे हैं दूसरे के नहीं हैं हम सब भाई-भाई हैं अलग-अलग करों में र रहे हैं एक ही पिता की संतान ऐसा क्यों नहीं समझते कौन सा ऐसा धर्म है जो दूसरे का अहित करके पुष्प होता हो वो धर्म नहीं हुआ धर्म है इसलिए जैसे अपने शरीर का एक अंक कोई खराब होकर पूरे शरीर को नष्ट करना चाहे तो उसे हम कटवा देते हैं अपने शरीर का अंग अभी पता चल जाए यहां कैंसर है आपको कटवाने से कैंसर से आप बैक जाएंगे नहीं तो पूरा फेल जाएगा तो राजीव होकर पैसा डीके कटवा देंगे आप इसे कैट दीजिए एक व्यक्ति से अगर पूरा गांव नष्ट हो रहा हो अगर एक जिला एक गांव से नष्ट हो रहा हो अगर एक जिला से पूरा देश नस्त हो रहा हो उसको शासन में ले लेना चाहिए क्योंकि पूरे जीव बैक रहे हैं तो ऐसे ही जो मालिन स्वभाव के राक्षसी स्वभाव के और ये समझते हैं की मैं धर्म
कर रहा हूं दूसरों की हत्या करना दूसरों को पीला देना दूसरों का विनाश करना ये राक्षसी स्वभाव कभी धर्म नहीं हो सकता है इनको शासन में लेना ही धर्म है इनको शासित करना इनको दंड देना यही धर्म है अगर उसकी हिंसा नहीं होगी तो लाखों को मार देगा वो हम देश और प्रजा और विश्व शांति के लिए ऐसे अधर्मियों प्रशासन करें जो अपनी बात को समझते नहीं है केवल अपनी मनमानी को धर्म मां करके दूसरों के हिंसा दूसरों को दुख पहुंच रहा दूसरों को विनाश करना वो किसी भी हो कहानी का भी हो किसी भी धर्म का हो जो पापी होते हैं हिंसक होते हैं राक्षसी होते हैं वो किसी धर्म के नहीं होते उनका केवल दूसरों को दुख देना भयभीत करना आतंक मचान स्वभाव होता है वो किसी धर्म अल्लम भी नहीं कोई भी आज तक आचार्य कोई भी महापुरुष ऐसा किसी भी धर्म की रचना नहीं की जिसमें जो असहाय है निर्बल है या जो निरपराधी है उनका विनाश किया जाए नहीं इनकी बुद्धि भ्रष्ट है ये शासन के द्वारा ही काबू में किया जा सकते हैं एक आदमी लाखों को लाखों को पीड़ित कर रहा है एक
आदमी प्रदेश के देश को भयभीत कर रहा है ऐसा नहीं और जो ऐसा सोचता है की इनका तो मानते हैं जैसे आपने कहा की कई बार अटैक हुआ है मानते हैं ऐसा हो सकता है पर वह विधान में ही होगा आपके लिए आपके अनंत जनों के कर्मों का हिसाब नष्ट हो रहा है ऐसे बलमा का नहीं हो सकता ध्यान रखना धर्म करने से जो पीड़ा प्राप्त होती है धर्मात्माओं को सदा पीड़ा झेलनी पड़ी इतिहास साक्षी आप देख लो गुरुजनों को देख लो गुरुवाणी में जो वर्णन देखो गुर्जनों को कैसा अधर्मियों को के प्रति और अपने धर्म के प्रति दोनों भाव को देखिए भारी कष्ट को सते हुए महापुरुषों ने धर्म की रक्षा की है उनके शरीरों को भी कष्ट दिया गया है और उन शरीरों के कासन को सहायसते हस्ते सहाय तो जिसे आप चल रहे हैं फिर ये का दे अगर तुम ठीक कर रहे तो तुम्हें कष्ट क्यों है जैसे कोई का देना की आप समझते हो की मैं धर्म कर रहा हूं तो फिर आपका शरीर क्यों ठीक नहीं तो बचपन से बाबा जी हैं कभी चींटी को जानकारी से मारा और ऐसा मुझे याद नहीं दोनों किडनी खराब है क्यों अनंत जनों
का हिसाब है उसको पवन करके प्रभु हमें बुला रहे हैं पूरा कपड़ा मालिन था धुलाई हो रही है तो ऐसे जैसे धर्मात्मा पुरुष देश रक्षक पुरुष है उसके प्रति सोच ना ये देखो ऐसा तो ऐसा मत समझो मलिक वह पद देने जा रहा है उनको जहां तक तुम्हारी दृष्टि भी नहीं पहुंच शक्ति बल्लू यहां का जितना पुरस्कार है वो यही र जाएगा ना एक पुरस्कार ऐसा है जो हमें पर कर देगा वो वो गुरु वाणी वो गुरु कृपा वो भागवत कृपा हमारा हृदय आपके साथ है शरीर भले साथ में हो हम अपने देश से बहुत प्यार करते हैं देश के लिए प्राण थे अज्ञेय की अब भी उत्साह रखते हैं हमारा देश हमारे लिए भगवान है जब हम किसी भी आर्मी के जवान को देखते तो अंदर से हम उसे सलूट करते हैं अंदर से उसे सर झुकते हैं प्यार हम बाबा जी बनकर के धर्म के मार्ग में चल रहे हैं तुम्हें वीर बहादुर होकर कष्ट सते हुए हमारे देश के लिए हमारे लिए हमारे लिए उसकी छुट्टी छुट्टी बच्चे हैं उसकी पत्नी है कौन चाहता है ऐसा की कम से कम एक बार एक दिन में सेवा लोट के अपने परिवार तो ए गए ये आएगा की
नहीं आएगा उसको खुद भी विश्वास नहीं है की पता नहीं किधर से गली ए के कहां से पर हो जाए और वो रात दिन कैसी भी स्थिति हो ऐसा नहीं बहुत सुंदर इनकी साधना है हम इनको प्रणाम करते हैं ऐसे ही मुझे कोई देशभक्ति मिलता है जब आपको बताया की देशभक्ति है तो हमारा हृदय हम ब्लैक खड़े नहीं हो पे रोग के करण लेकिन हृदय से खड़े होके स्वागत किया है यहां हम अपने देश भक्ति को प्रणाम करते हैं जैसे हम भगवान के भक्ति महापुरुषों को प्रणाम करते हैं ऐसे हम अपने देश के भक्तों को
प्रणाम करते हैं जो हमारे देश का मंगल सोच हमारे देशवासियों का मंगलसूत्र वो हमारा हृदय है और उसे आशीर्वाद मांगने की जरूर नहीं जब का रहे हैं की हृदय ही साथ है तो आशीर्वाद क्या चीज होता है हृदय ही साथ है बिल्कुल आप निर्भय रहिए निश्चित रहिए और जीत जब तक श्वास है तब तक देश सेवा में बस अंतिम तो फतेहपुर हमें बहुत ही प्रसंग हृदय में आनंद प्रधान करता है भगवान के पिता का सौभाग्य दशरथ जी को मिला राम जी के पिता का सौभाग्य जटायू को मिला जटायू जी भगवान की गॉड में ऐसे शरीर त्याग रहे हैं भगवान की गॉड में और का रहे हैं मैं कृपा नहीं कर रहा ये आपके कर्म की गति है क्योंकि आपने दूसरे की रक्षा के लिए अपने जीवन को समर्पित कर दिया तप जो परमधाम को मेरे तो ये जो दूसरों के हिट की बात है ये सबसे बड़ा धर्म है भगवान उसको बहुत प्यार करते हैं अगर हम तपस्या भी अपने लिए कर रहे हैं ना तो कोई खास बात नहीं है ध्यान रखना भजन भी अपने सुख के लिए करें कोई खास बात तो लाइए जब हमारी तपस्या हमारा भजन हमारे देश के लिए और हमारी देश
के समाज के लिए हो वही सार्थक है तो वही तो आप भी कर रहे हैं आपकी सोच आपका चिंतन आपका प्रयास हमारा देश है हमारे देश इन आतंकी हमले से बच्चा रहे हमारे देश में कोई ऐसे कुमार के गाने प्रवेश ना करें जो हमारी भोली प्रजा को नष्ट करें कष्ट करें बात एक ही है हम यहां बैठे भजन बाल से सोच रहे हैं आप बाहुबली ऐश्वर्या कानून बाल इनके द्वारा सुरक्षा कर रहे तो बात तो दोनों ही हम दोनों एक पिता की संतान उन दोनों का एक ही कार्य है बेस अलग-अलग है उद्देश्य एक ही है हमारी तपस्या हमारी श्वास हमारा अनुभव हमारा ज्ञान हमारे देश के लिए है विश्व के लिए है जो हमारी बात मैन जो हमारी बात सुन ले निहाल हो जाएगा उसके पकड़ लो केवल तो ऐसी आपका है ना की जो हमारे प्रधान है जो हमारे पास योग्यता है जो हमारे पास बाल है जो हमारे पास शासन है हमारी राज्य की रक्षा हमारे देश की रक्षा हो हमारी प्रजा सुखी हो यही भागवत मार्ग है बहुत अच्छा लगा तो नहीं पहने है लेकिन हृदय की बात का रहे हैं हम बहुत आजाद कर रहे हैं हां आप बिल्कुल निश्चित
रहिए जो बिल्कुल आप निश्चित रहे आप खुद अनुभव करेंगे जैसे आप अनुभव किया हैं पीछे ऐसे आप खुद अनुभव करेंगे की हरि और गुरु की कृपा क्या होती संतो की कृपा क्या होती है वैसे थोड़ी होता है मात्रक दिया था दृष्टि और संकल्प हो जाए तो मुकाम करो टी वॉच आलम पोंगम लंगटे गिरी याद कृपा तम वंदे परमानंद माधवम मुख भी वेद बोल दे लंगड़ा भी पहाड़ चढ़ जाए छोटा सा सांप का बच्चा गरुड़ को का जाए यह कृपा जो है जो गुरु कृपा इस कृपा छोटा सा सांप का बच्चा जो हजार फैन वाले को भी एक क्षण में क्या देंगे अरुण जी और गरुड़ को खाजा छोटा बच्चा इसे भगवान की कृपा करके कुछ दुर्लभ नहीं बस आपका चिंतन सही होना चाहिए धर्म युक्त होना चाहिए कोई परस्त नहीं कर सकता ये तो बाहरी सुरक्षा है आंतरिक सुरक्षा भगवान की होती है जिसमें वो दिव्या शक्तियां तुम्हारे साथ रहेंगे की यह चक हो जाए तो हो जाए लेकिन हो चुप करने वाली नहीं क्योंकि पहले से जान को क्या सोच के द्वारा इनको तो क्रिया दिखाई देगी और वो सोच देख रही सोच जब दुर्वासा जी ने अपना मंत्र
बाल प्रगति करके अमरीश जी को दंड देना चाहा निरप्रयाग हमरीष जी को तो अंबरीश जी को भी पता नहीं था की सुदर्शन चक्र हमारे पीछे हैं तत्काल सुदर्शन चक्र प्रगति हुआ कृपया को नष्ट किया और दुर्वासा को त्रिभुवन में दौड़ा क्योंकि वो भी तपस्वी थे ना तो मारा इसलिए नहीं की तुम भी भगवान के मंत्र से सुरक्षित हो पर देखो हम तुम्हें जलाएंगे कहानी और नहीं मिलेगी तेरी वन में था और नहीं मिली लोट के अंग्रेजी के पर में पड़ा आगे तभी वह सुदर्शन चक्र शांत हुआ तो ये कोई भूल एन करें की मां लो आप गेस्ट में और धर्म से चल रहे हो अरे ये क्या नहीं नहीं यही भूल हो गई थी दुर्वासा जी को की मैं तो बालकल की लंगोटी लगता हूं धूप का रस पिता हूं ये चक्रवर्ती सम्राट राजा रानियां के बीच में राहत है यह मेरी बराबरी का नई-नई उद्देश्य खास बात उद्देश्य नहीं उद्देश्य अगर दोनों का उद्देश्य है तो एक पेंट शर्ट में कुर्ता पजामा में भी महात्मा है और एक विरक्त में बीमा और देश बिगड़ जाए तो भेज में भी उद्देश्य ना होने पर सब पाखंड नाटक हो जाएगा
यह पाठ वीडियो के स्वचालित (auto-generated) उपशीर्षकों से लिया गया है — इसमें शब्दों की त्रुटियाँ हो सकती हैं। प्रामाणिक वचन के लिए वीडियो अवश्य सुनें।
मूल वीडियो: Bhajan Marg (YouTube)
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