॥ श्री राधावल्लभो जयति ॥ श्री हित हरिवंश चन्द्रो जयति ॥
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एकांतिक वार्तालाप एवं दर्शन #312 · 18 सितंबर 2023

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श्री हित राधा केलि कुंज, वृन्दावन में पूज्य श्री हित प्रेमानंद गोविंद शरण जी महाराज के साथ एकांतिक वार्तालाप। साधक अपने जीवन और साधना के प्रश्न रखते हैं और महाराज जी उनका समाधान करते हैं।

पूरा प्रवचन

आकाश मिश्रा जी राधे राधे कृष्णा बार-बार उठाता है की जो लोग अपने बच्चों का नाम ईश्वर के नाम से रखते वचन देते हैं तो इससे ईश्वर की अमृत स्वरूप नाम की निंदा होती है या नहीं होती गोविंदा यह पूरे संबोधन तो हम व्यक्ति को कर रहे हैं लेकिन उसमें जो गोविंद नाम निकाल रहा है वो सच्चिदानंद है वो हमारा मंगल करेगा मंगल नहीं कर सकता भाव कुभव अगर हम गली देते हैं ना भाव को भाव अनक आलसू नाम जपत मंगल देसी दशरहू किसी भी भाव से कैसे भी नाम उच्चारण हो जाए मंगल हो जाता

है हमें गन देखना है हां आपको ज्ञान है तो अब आप जिसका गोविंद नाम हो कृष्णा नाम हो कृष्णा नाम हो तो अभद्र वाणी आप मत बोलिए अगर कोई बोल रहा है उसकी अभद्रता पर ध्यान ना देकर उसे नाम की महिमा पर ए जाइए नाम महान पवन समर्थ जैसे अनजाने में भी विश्व पीला दिया जाए या गुस्सा करके पीले या श्रद्धा से पी ले तो मारेंगे ही अमर रहे होंगे क्योंकि उसका प्रभाव है महाराज अग्नि का स्वभाव है उसमें डिका शक्ति है प्यार से जो वो गुस्सा से चौहान को कोई धोखे से छुआ दे जल देगी ऐसे नाम में तरण शक्ति है पाप नाशक शक्ति है शुभ प्रधान करने वाले सत्य कैसे भी उच्चारण करो परम मंगल हो जाए हमको दोष नहीं देखना है अजय से कुछ संख्यात्मक जान होते ना बहुत बुरी तरह संचयन को पकड़ लेट है नाम जपने वाले को 10 नाम अपराध से बचाना चाहिए अब नाम जो अपने में कहानी नाम पर ए जाना अपराध इसलिए बताया जाता है की आप जो स्वाद लेने चले हो यह ना करो तो और आपको आनंद मिलेगा अगर अपराध हो जाता है तो वही जो भगवती कर रहे हो वही समाज कर देगा वही आपके

अपराधों को नष्ट कर देगा अगला अपराध ना बने ऐसी आपको बुद्धि प्रधान करेगा ऐसे बुद्धि को थोड़ा सन मिलाओ कैसे भी जान जान कैसे भी उपहास में बोले तो मंगल हो जाएगा भगवान का नाम ऐसा है जब ठाकुर हरिदास जी के कोड चल रहे थे और उन्होंने कहा हांजी बोल हरि बोल कहता है तो घूम के देखो मुस्कुरा दे की अब तुम्हारा भी कल्याण हो जाएगा की दो बार तुम्हारी हरि बोले मेरे भगवान नाम में इतनी अपार सवर्त है आपका भी हमें गुड दे अगर वो राधा राधा का रहे हैं मांग रहे हैं आपको मने

देव ना देव लेकिन उनकी निंदा मत करो वो कहां बैठे हैं बिहार जी के द्वारा पे राधावल्लभ जी के द्वारा पे और वहां आपको क्या पता कितनी कठिनता से वास करते हुए जीवन व्यतीत कर रहे हो चंद्र रुपए आपने दे दिए वह खरीदे एन खाए और वृंदावन बस के बिजली आदि आप यह तो नहीं देख का रहे हैं ना राधा राधा बोला तो चरणों में झुका कर के मां प्रणाम करना चाहिए वो हो श्री जी का नाम तुलसी जा के मुख से धोखे अनक्शतराम ताकि पद की पतली मोरी तक सावधान हम अपने लक्ष्य को देखें बुरे आचरण बुरी वार्ता बड़ा व्यवहार माया कृति बुद्धि में होता ही रहेगा हम क्या करना है माया कृत्रिम बुद्धि के ऊपर उठ और यही देखना है बिल्कुल सत्य समझ लो बिजली एक ही है यंत्र के प्रभाव से गम फेंकते हीटर यंत्र के प्रभाव से शीतलता बिजली का स्वभाव में गम है उसका प्रभाव बन जाता है ऐसे ही भगवान का स्वभाव नए निदानी ना बंदिनी स्तुति निंदा दोनों से पैर उनका स्वभाव और प्रभाव है जवाब दोनों से पैर उठोगे तब आप उनको जान जाओगे ये रजोगुण तमोगुण के जो यंत्र बने है ना

अब तमोगुण की ज्यादा विशेषता हुई गली दे रहा परमिट कर रहा हिंसा कर राक्षसी पर पावर उसमें वही है सच्चिदानंद पावर है हम क्या देखने चलें पावर प्रभु को विद्वान विज्ञान संपन्न आदमी देख रहा है सब में बिजली एक बिजली लाइट कर रहे एक बिजली गर्मी पैदा कर रही एक बिजली जल रहे हैं एक बिजली शीतलता पैदा करें एक बिजली हमें सुख प्रधान एक बिजली हमारी मृत्यु का करण बन गई पर बिजली इन सबसे आसन है अगर हम पावर को देखें एकदम आसन जहां जैसा उसका प्रयोग हुआ वैसा अर्थ का संयुक्त कीजिए बिजली को स्पर्श कीजिए मा जाओगे तुम्हारे शरीर को भस्म कर देगा देखो कैसा सुखद वही सुखद वही दुखद किस यंत्र कर्म के प्रभाव से ये है खोपड़ी अंत है रजोगुण सतोगुण एक राक्षसी लीला कर रहा है एक राजसी लीला कर रहा है एक साथ लेकिन पावर तीनों में एक का है जो उसे करण तत्व को देखा है वही महात्मा है और जो क्रियो को देखकर के विकसित हो जाता है वही संसारी पुरुष है हमें भगवान नाम देखना है अगर कोई गली डीके भी बोलना है राधा तो सिर्फ राधा हमारी बुद्धि गई

गली पे नहीं गई और अगर गली देखने वाले हो तो वही वही स्थिति जो उसकी बुद्धि में वही आपकी बुद्धि में आपको नाम नहीं दिखाई दिया राधा राधा राधा हमें दोष दर्शनीय में भागवत भाव लाना है हमें अच्छा ही लाने अब अगर ये सिद्धांत लागू कर दे तो कोई अपने बेटे परिवार का भगवान नाम ना रखें हुए ऐसे नहीं जपते तो ऐसे कम से कम भगवान नाम पहले गांव में था ना राम राम जी बोलते थे ना बोले है कैसे मिलन होता है नौजवानों की जय है बहादुर भाग्य है कप कहा जाता था जब कोई बहुत बड़ी घटना घाट जाति थी पढ़ा लिखा अरे भाई राम राम कृष्णा राधे श्याम बोलो तुम्हारी भी जवान मंगल उसके कान भी मंगल हुए तो हम तो चाहेंगे की सब अब ऐसे नाम रखें जाते हैं कैसे उनको उच्चारण करें भागवत विमुख ना कोई अर्थ है ही नहीं है पहले ब्राह्मण से आचार्य से विचार करके नाम रखें जाते थे नहीं तो भगवान नाम संबंधी नाम रखें है तो उससे आनंद का अनुभव हो रहा है उच्चारण कर जान जान कैसे भी नाम उच्चारण करें जैसे गांव में निकालो ना एक दूसरे से मिलने गए थे राम राम दो बार

तुमने लिया दो बार उसे ले लिया राम राम भैया राम राम कर वर्ष ले लिया कितना बढ़िया बात है संतो को देखते ही राधेश्याम राधे राधे अब क्या नया जमाना चला है और नए बच्चे देखो कैसे मिलते हैं कैसा व्यवहार बदलते चला जा रहा है तो हमें लगता है की इस बात को और हमें पुष्ट करना है की आप किसी भी तरह से अपने परिवार की किसी सदस्य का भगवती के नाम रखेंगे तो इनके प्रकारण उच्चारण होगा अजामिल को यही सूत्र तो मंगल कर दिया बेटे का नाम रखा जा नारायण और अंतिम समय उच्चारण कर दिया कम बन गया तुम मां लो की हम अपने बेटा परिवार किसी में ए शक्ति है वो पास नहीं हो जोर से पुकार चोर रमेश ओ केशव ओ मधु की कथा है एक आदमी की पत्नी का नाम था किशोरी वो बहुत प्यार करता था अपनी पत्नी से पराया लोग गृहस्ती वैसा होता है अब वो काल मृत्यु से शरीर का पूरा हो गया अब तो पागल सा हो गया क्योंकि ए शक्ति थी वो आपकी स्टोरी आपकी स्टोरी अब गांव में तो कुछ लोग बरसाने ए रहे थे दर्शन के लिए उसको कोई लक्ष्य नहीं है की हम राधा रानी के दर्शन विक्षिप्त

साउंड अब वह तो सब सीरीज के दर्शन के लिए गए हो जो पहाड़ है ना एकांत में जाकर चिल्ला करोड़ों लगा किशोरी हां किशोरी जिया नहीं जा रहा तेरे बिना जिया नहीं जा रहा शाम हुई रात्रि हुई उसका वही रोना हाथ किशोरी जी ने जा रहा है कोई मेरे लिए रो रहा है तो उनका किशोरी जी वह आपके लिए ले रहा है उसकी पत्नी का नाम किशोरी बोले आदि मैन प्रथम नाम किशोरी तो मेरा है ना वो का रहा हाथ की छोरी जिया ले जा उसको लो मेरे पास इतनी करुणा में अब ललिता जो तो सिद्ध पुरुष सच्चिदानंद जी सामने प्रकाशित हुई तो कोटि-कोटि लक्ष्मियों के भी सौंदर्य को परस्त करने वाला सौंदर्य श्री जी की प्रधान सखी श्री ललिता सकें सर ज्ञान साड़ी विद्या उसकी नष्ट हो गई दर्शनों किशोरी जी बुला रहे हैं जीव ही सामने पर महारानी जी के दर्शन वो बहुत बड़े संत थे क्या नाम उनका हुआ अली किशोरी जी बहुत बड़े महान पुरुष हुए आप देखो पत्नी का नाम किशोरी तो बाजी जीता दिया हमें लगता है घर में किसी एन किसी का भागवत संबंध नाम रखना चाहिए हमको ऐसी तार्किक बुद्धि

करके इसलिए ऐसी बुद्धि ना रखें हम भगवती की जान हैं हमारी बुद्धिकारें कैसे भी भगवान का नाम ले तो परम पद प्राप्त होता है समझ रहे हो विद्या राधे राधे एक बार प्रवचन में श्रवण किया था की जब भाग्य जोरदार होता है तो कर्म बिगड़ जाता है और जब कर्म जोरदार होता है तो भाग्य बिगड़ जाता है महाराज जी कृपा करके मार्गदर्शन करें जैसे हम बहुत प्रयास कर रहे हैं सफलता के लिए हमारा पूर्व का जो कर्म है उसका प्रारंभ में दुख देने के लिए राजी हो चुका है लागू हो चुका है अब हम जो भी लौकिक उपाय करेंगे परस्त करता रहेगा उसको नष्ट करने के लिए जो प्रबल उपाय कर्म हुआ उसका जो फल दुख देने ए रहा है उसको नष्ट कर देगा दूसरा कोई उपाय नहीं है जब भक्तजन नाम जब प्रारंभ करते हैं भगवान की कृपा से बात समझ में आई तो प्रभु से मानते मुझे सहने की समर्थ नष्ट मत करो इसका फल आप जो अपने चरणों की प्रताप अपने चरणों का प्रेम हमारे हृदय में अपने चरणों की भक्ति प्रधान कर दो उसका भाव बादल जाता है नाम में अपार समर्थ है नाम के शिवा और जितने कर्म शुभ

कर्म होंगे तो शुभ कर्म का एक अलग हिस्सा होता है अशुभ कर्म का लव जैसे कोई अभी पाप कर्म कर रहा है लेकिन उसको कोई बात नहीं मिल रही क्यों क्योंकि उसका पूर्ण कर्म उसको सुख देने में लागू हो चुका है अब जब तक वो पूर्ण कर्म चलेगा और उसका पाप हो रहा है उसका बाल भी मां का नहीं होगा उसका आपको दिखाई देगा बहुत गंदा आचरण बहुत मालिन बड़ी हिंसा कर रहा है और बड़े मौत से ज्यादा कोई जुखाम नहीं कोई बुखार नहीं कोई परेशानी नहीं हर बंधन से बचत चला जाए क्योंकि उन्होंने उसका कम कर रहा है अब जहां वो पूर्ण खत्म हुआ और पूर्व पाप वर्तमान का पाप मिला उसको नष्ट कर देगा ऐसा है किसका होगा वही जाएगा हम ऐसा कार्य करें जो पूर्व संचित पाप है जो हमें बहुत भोगना है जो अभी हमसे गलतियां हुई हैं उनको सबको मित दे वो उपाय से है वह भगवान का भगवान का नाम जाप करना नाम में बड़े समर्थ नाम के बिना तो हमारे दिमाग में एक ही बात गंज रही है सबसे एक कहते हैं बस अपने आचरण सुधरो शराब पीना मांस खाना बी विचार करना हिंसा करना चोरी करना इससे कभी

तुम सुख प्राप्त नहीं कर पाओगे और कुछ बने बने ना बने ना बने राम राम कृष्णा राधा राधा हरि हरि शिशु जो नाम तुम्हें परी लगे सब हमारे प्रभु के नाम हम तो वृंदावन वास श्री राधा उपाशी हम तो राधा राधा एक पर तुम्हें जो नाम प्रिया लगे वो नाम जबना शुरू कर दो कोई तुम्हें जन की जरूर नहीं की इसका फल क्या होता है इसकी महिमा के और सब आगे जान जाओगे पर नाम जब शुरू कर दो और नाम जब तभी होगा जब ये आचरण नहीं होंगे आप पुरुष शरीर हो आप धर्म विरुद्ध व्यवहार करोगे गंदे आचरण करोगे आप आप कर्म करोगे कभी भजन नहीं बनेगा पाप मंत्र कर सहज भजन मूर्ति भावना का जीवन इन्हीं कर्म भोग में वितरित करने के लिए नहीं मिला है इस दलदल से उठने के लिए मिला है और वो एक समर्थ भगवान का नाम दूसरा कोई नहीं है बहुत शास्त्रों का स्वाध्याय बहुत संतो का समागम अपने जीवन का अनुभव तीनों मिलकर का रहे हैं सबका सर है भगवान का नाम और भगवान का है हरि मैं जैसा हूं आपका हूं अब आप संभल लेना प्रभु और नाम जब सब ठीक हो जाएगा कष्ट रहेगा भोगनी के समक्ष मिल

जाएगी और शरीर छूटेगा भगवान को प्राप्त हो जाओगे ये नाना प्रकार के दुख नाना प्रकार का चल कपाट नाना प्रकार की जो समस्याएं कब तक हम जूझते रहेंगे आज थोड़ी सफलता हुई तो हर्षित हो गए कल असफलता विश्वजीत हो गए ये कब तक चला रहेगा एक ऐसी स्थिति आवेदन दुख नहीं है जहां शांति नहीं है जहां मृत्यु नहीं है जहां कोई छल-कपट नहीं वह भगवान का धाम भगवान का नाम भगवान की लीला भगवान का रूप कब तक हम भगते रहेंगे कुलविंदर कौर जी राधे राधे गुरुदेव आपके चरणों में कोटि-कोटि प्रणाम गुरुदेव जब हम गुरु मंत्र का जाप करते हैं आंखें बैंड होती हैं आंखों के सामने की तस्वीर आई हैं क्या उन तस्वीरें को हटाकर गुरु मंत्र पर ही ध्यान रखना चाहिए कभी-कभी हम यदि हमें संतो के दर्शन हो रहे मंत्र जब कर रहे हैं बिल्कुल कोई हरकत करने की जरूर नहीं बहुत बढ़िया है अब ये देखना है की वो कहानी संतो के बहाने से गन दोष के दर्शन में तो नहीं ग गया कहानी किसी का दोस्त दर्शन तो नहीं कर रहा है हमारा भागवत भाव है ना तो सब संत भगवान के स्वरूप हैं वो ए

रहे हैं ध्यान में मंत्र जब फिर बहुत ठीक चल रहा है आगे जहां संत हैं वही उनके स्वामी ए जाएंगे प्रभु ए जाएंगे संत और भगवान में कोई भेद नहीं है मोर मां प्रभु विश्वास रामदेव की दृष्टि में भगवान और भगवान के प्रेमी महात्मा इतना भी अंतर नहीं है उसमें कोई परेशानी नहीं मंत्र जाप करते हुए अगर गांधी बटन का चिंतन हो रहा है गंदे भाव तो हटाने की जरूर है अब मंत्र जाप करें आप वृंदावन का चिंतन कर रहे हैं आप यमुना जी का गंगा जी का तीर्थ तो बढ़िया है मां गलत जगह ना जाए हमारा कार्य उद्देश्य केवल इतना है और किसी संत के किसी प्रवचन में लगा हुआ है मनचला मां कोई बात नहीं वो गलत जगह नहीं है देखो जंगली घोड़े को जैसे एक चतुर स्वर दुलार करता है उसको खुशलता है कभी-कभी चाबी मारता है फिर ऐसे बस में कर लेट है की अपनी सारे से उसको चलने लगता है ऐसे ही मां एक जंगली घोड़ा जैसा है जो मनाया शुरू करता र अभी तक उसको अपने दिन करना है तो केवल कूड़े से ही कम नहीं चलेगा दुलार भी करना पड़ेगा इसको सपोर्ट भी करना पड़ेगा एकदम गलत तो

फिर हमको थोड़ा सावधान रहना अगर शाहिद ढंग से जा रहा है मतलब मंत्र में नहीं ग रहा है वो वृंदावन की गलियों में घूम भैया घूम चल बिहार जी की इधर दर्शन कर राधाबल्ला जी के दर्शन कर मने में हां ए गई परिक्रमा लगा रहे हैं संत सभा में बैठे हैं असली बात ये उसको गलत हमें नहीं सोने देना गलत नहीं जान देना तो संत दर्शन ही गलत नहीं ये भगवान का ही शुरू है इसलिए हमें कोई इसमें परेशानी नहीं हनी चाहिए समझ रहे हैं ना और वैसे तो जब और आगे बढ़ोगे तो कोई भी वास्तु आवे हर

जगह भगवान देखना है कोई वास्तु आए तो इसमें भी तो भगवान है तो आपका वो भी भजन होता चला जाएगा भगवान से विलग जो भी हम देखते सुनते हैं वही हमें बंधता है और उससे भागवत समर्पित मांग ले भागवत भाव से तो फिर वो परेशान और आगे चलकर आएगा अभी तो दोस्त लगता है अच्छा अच्छा लगता है बड़ा बड़ा लगता है अभी ऊंचाई तो है नहीं जब वो चाहिए की अच्छा और बड़ा दोनों में एक ही दिखाई दे मेरा प्रभु है प्रभु के शिवा हां यह माया का प्रभाव है वह नई समझ करके बुरे आचरणों में लगा है लेकिन पावर उसमें तो भगवान ही है उसमें चैतन्य सत्ता तो भगवान ही प्रिया आगे चलकर आता है अभी अच्छा है खूब जाप करते रहो एक लाइन सामाजिक और आज जाके अधीन सदा ही सांवरो जा के अधीन सदा ही सांवरो या ब्रज को सरताज हमारी मैं श्यामपुरा जय किशोरी अयोध्या राम करने के लिए मिल गया प्रभु जो है अजीत हैं परम स्वतंत्र है लेकिन वह नाम जापक के अधीन हो जाते हैं यह जो चौपाई है ना समीर पवन सूट पवन नाम अपने बस करीब बहुत विचारणीय ब्रह्मा जी स्तुति करते हैं जब हमारे बाल

गोविंद की तब कहते हमने देखा है ऊपर चढ़ के भ्रष्ट होते देखा है बिना भागवत आश्चर्य के पुराण या थोड़ा कर लाइन वेदांत पढ़ ली तो भगवान के नाम रूप का खानदान करने की सोचते और ज्ञान समुद्र भगवान शिवा निरंतर नाम रिक्ति उनकी लीला ज्ञान करते हैं यही समझ में नहीं ए रही की आप समझो की जो आपके आचार्य हैं समस्त नन के आचार्य भगवान शंकराचार्य जी की प्रभु हमें आप में भेद नहीं है पक्की बात है सत्य विभेद आप गेमन नाथ तवा हम नमकीन स्तंभ पर प्रभु समुद्र से अनंत तरंगे होती एक भी तरंग में सामर्थ्य के समुद्र पैदा कर सके उच्चारे में क्या बता रहे समझ जो वह अद्वैत सिद्धांत के आचार्य स्वयं वर्णन कर रहे हैं की हमने आप में अवैध जैसे समुद्र और तरंग में वही व्यू विकार से समुद्र तिरंगा मां हो गया पर नाथ समुद्र में अनंत तरंगे उठाती है पर एक भी तरंग की सामथनी के समुद्र प्रकट कर सके डा सत्र प्रकट हो रहा है या नहीं प्रगति हो रहा स्वामी भाव प्रगति हो रहा है की नहीं प्रकट हो रहा है जब भगवान शिवा की ही कृपा सब ब्रह्म मिट्टी जाए

गिरजा श्री कृपा बिना उनकी कृपा करके इस दुरंत माया पर कोई विजय प्राप्त कर लेने ना हुआ है ना आए और ना कोई होगा देवी हेशानते माया मेहता परण से नाम जापक के हृदय में समस्त शास्त्रों का सुज्ञ वो भले सूत्र एन बोल सके संस्कृत से लेकिन उसकी वाणी आप लिख लो और कहानी भी वेद में छान लेना वही निकलेगी क्योंकि वेद शास्त्र पुराण समस्त साधनों की सिद्धियां समस्त तीर्थ की पवित्रता नाम में समय हुई है जिसकी जब व्यापम चल रहा है अब उसको किसी भी ग्रंथ और पेंट का कोई ज्ञान ऐसा नहीं बन गया रहेगा जो दिशा में ना ए जाए वो भले बोले ना पाव मतलब आखरी विद्या का ज्ञान ना होने पर वो संस्कृत से ना बोल पाव वो बस शब्दों के लच्छेदार भाषण एन दे पाव पर उसकी सरल भाषा नोट कर लो और आप देख लेना शास्त्रों में वही निकलेगा जो उसकी भाषा में क्योंकि नाम चल रहा है एकमात्र केवल नाम एकमात्र नाम सब कुछ बना देगा आपको अखंड ब्रह्मचारी बना देगा आपको परम सिद्ध बना देगा भागवत प्रेमी बना देगा मोक्ष पद देवी जो चाहिए नाम और नाम जाप नहीं है है तो

खुद देख लीजिए आप देख लीजिए आप अपने हृदय को देख लीजिए आप दूसरे कार्ड को देख लीजिए केवल बातें बनाने से ब्रह्म साक्षात्कार नहीं होता है वही आत्मस्वरूप प्रभु ही हमारे रामकृष्ण रूप में प्रकाशित हो रहे अगर उनके नाम उनके रूप की अभिलाना की तो हमें तो नहीं लगता किसी को ज्ञान हो जाएगा ज्ञान का मतलब क्या है वो स्वामी जी से बड़ा कोई ज्ञान प्रगति हो रहा है क्या जो वहां लिखा हुआ वेदों के सूत्रों में लिखा हुआ है जड़ चेतन जगत जीव जगत सकल राम में सर्वम नैना नाथ किन-किन सियाराम में सब जग जानी कल का बहुत विकराल दाल फेल रहा है भगवान के घरेलू उपासना भगवान के नाम भगवान की लीला की ऐसी ज्ञानी पैदा हो रहे हैं और हिलाना कर रहे हैं और शंकाजी हरीश शरण 18000 भगवान की लीला रूप के गायन कर रहे जो जन्म से निरपेक्ष परमहंस है और आज की ज्ञान की क्या दशा हो रही उसे स्वामी जी ने लिखा ब्रह्मज्ञान विन्नर करेला दूसरी बात कौड़ी लगी लोग बस करें भगवान का श्री लिए बिना गरुड़ जी के आगे लिखा जाता है मा ज्ञानी गरुण मा ज्ञानी गुंडा

ऐसे महा ज्ञानी को एक लीला ने भगवान को नागपाल कहां गया और भागवत स्वरूप हैं और भगवान अपनी ध्वज में ऊपर लगाते हैं जो मार्ग गुरुजनों ने दिया है भक्ति का इसमें भ्रष्ट होने के चेस नहीं गिर जान पर भी गिरा हुआ नहीं होता जानू गन प्रभु मां नाकू दिन हम क्यों बात नहीं समझ का रहे हैं हम इतने बलवान हैं की समुद्र को टायर कर पर कर जाएंगे एक से एक मगरमच्छ झटका में पूरा मिल जाएगा हाथ पर सहित जींस तुम चला रहे हो कम क्रोध लाभ मो मैड मत सर इस बहुत समुद्र के ऐसे मगरमच्छ है की ले गए अनंत जन्म हमारे हो गए और आज तक उबर नहीं पे आज और सर मिला है भगवान की शरण में हो जो और भगवान का नाम जब करो सब ज्ञान अपने आप प्रकट हो जागे हृदय की बात कहते संत महापुरुष आप सब जान रहे नाम जपे बिना बड़ी मेट घृत हुए वर्षिकता तेवर तेल बीनू हरि भजन नहीं खाली जानी चाहिए हमारा श्वास खाली नहीं जाना चाहिए सब ज्ञानो का ज्ञान यही है सब साधनों का फल यही है सब साधन कर यह पाल सुंदर प्रभु पद पंकज अपने स्वामी के चरणारविंद का निरंतर नाम रूप

हमारे हृदय में बस रहे यही जीवन का सर शास्त्र भी जंगल है अगर उसमें गाइड करने वाले गुरु वचनों का सहारा नहीं है तो आप ऐसी भूल भुलैया में फस जाएगी निकाल ही नहीं सकते यह शास्त्र अरण्य है गुरु गुरु की कृपा गुरु का वचन गुरु का उपदेश यही हमारे लिए तो हमें जो गुरुदेव कोई और साधन बाल नहीं किसी का आज तक वहां तक पहुंच पाया है साधन बाल असाधनों का त्याग करने के लिए जो हमारे असाधारण है जो माना खस्तान इंद्राणी प्रकृति स्थान कर सती उससे बचाने के लिए साधन है लेकिन

स्वरूप वो दिया साक्षात्कार के लिए कृपा है सिर्फ कृपा सदा मोक्ष मुलायम गुरु कृपा तुम्हारी कृपा तुम्हारी रघुनंदन जा नहीं भगत वह कृपा करके नाम मंत्र ता होगी जड़ता होगी जो हम नाम को छोड़कर और किसी साधन का बाल रखें परम ज्ञानी हनुमान जी महाराज आगरा भगवान को अधीन कर लिया सेवा और नाम जबसे सेवा इतनी जोर की प्रति उपकार कण का दौरा सम्मुख कितने करुणा में प्रभु है सेवा और नाम जाप यह दो वस्तुएं ऐसे जो अजीत को जीत लेने भगवान को इससे बढ़कर कोई ज्ञान नहीं है और इससे बढ़कर कोई योग नहीं है की अश्रु प्रवाह करते हुए हमारा हृदय उनके चरणों के ध्यान में मुख में नाम चल रहा है इससे बढ़कर कोई स्थिति नहीं है उनका स्मरण करके उनकी करुणा में या उनके रूप दर्शन के विभाग में या उनके रूप का स्वाद करते आनंद सुबह रहे हैं और दिव्या में नाम है और हृदय में ऐसी प्रबल ममता प्रकट हो गई करोड़ प्राण होते तो निछावर कर देते इनके रूप माधुरी पर इनके स्वभाव पर बस इससे बड़ी कोई स्थिति नहीं भगवान बरबस ब्रह्म सुख है वह रूप है हमारे

आराध्या देव का वह रूप है की सहज विराग रूप मां जनक जी स्थिति बता रहे तो यह रूप ब्रह्मानंद से भी आकर्षित करके रूपानंद में फंसा देने वाला रूप अब कौन सा में सुख चाहिए और वो नाम जो ऐसे रूप को घसीट कर बंदी बना दे हमारे हृदय में भगवान की रूप का कोई चित्रण कर सके ऐसी की पैदा नहीं हुई है ही नहीं सृष्टि में जो श्यामंता है ना हमारे ठाकुर जी की सृष्टि में नहीं है कोई ऐसी प्राकृतिक रूप सौंदर्य ही रचना ही नहीं है इससे उदाहरण अरे जहां मां बुद्धि की पहुंच रहे हैं वहां चित्रकार कैसे हो शक्ति तो फिर आप उपासना क्यों करते हैं क्योंकि सर्वत्र है इसलिए हैं यहां भी हैं पर जो रू उनका है वह नाम केवल दर्शन कराएगा दूसरे किसी के समर्थन सेवक सुयश सुधा वसुधा ताल और यत्न सब दूर समझ सजनी आशिक बड़ा सुंदर बनाने का गुरु पादराज की राशि सब ताजी हुई हो और आपको देखकर की अभाव प्रदर्शन अब आशिक होना कठिन है देखो सब हो जाता है आशिक होना आशिक का स्वरूप जो हमारे प्रेम मार्ग का स्वरूप है की जिससे हम प्यार करते हैं वो पग पग पर

प्रतिकूलता और रोशबारी से देख कर दृष्टि से हमारा तिरस्कार करें और हमारा पग पग प्यार उसके प्रति बड़े उसे आशिक कहते हैं आशिक अनुकूलता का नहीं होता आशिक का तात्पर्य होता है की जिससे हम प्यार करते हो भारी सभा में हमारा तिरस्कार करें और हमें तत्काल कर हटा दे हमारी तरफ कभी ना देखें पर हम उससे प्यार करते हैं गोस्वामी जी जैसे चटक का उदाहरण दिया ना चटक का वो आशिक है अपने को ऐसे आशिक बन्ना है नरक स्वर्ग आप नहीं ट्राई है जहां रखो मां शुक्र से है जो-जो लखत हो

क्यों क्यों रैयत हो हरि आपको सराहनीय आपको ही चाहेंगे आप जैसा मां हो वैसा करके देख लो आपको सर आएंगे और आपको चाहेंगे कभी हा भरकर हम शिकायत नहीं करेंगे आपसे कोई चेस हम आपको अपनी तरफ से प्यार करते हैं आप कभी हमारी तरफ मत देखना आप कभी हमको जो हम चाहे वो पूर्ण ना करना पर हम आपकी चक को निरंतर बढ़ते चले जाएंगे इसी आशिक की स्थिति ऐसी होती है तन मां के बिछड़े नहीं हुए छह बड़े दिन रहे और कबू संजोग नमन हैं देखें वेरी-भरी लहर ऐसी तन मां के बिछड़े नहीं पर छह बड़े दिन रहे और कहो संजोग नमन है देखें भरी-भरी में और बारात मिलने को नी दिन नी दिन मिले ही रहे थे देखो टेढ़ी खीर आशिकों की अरबारात मिलवे को नी दिन जी दिन मिले ही रहे भागवत रसिक रस्सी की बातें रसिक प्रेम देश में प्रवेश होता है ना फिर कुछ नहीं सुने देता परमार्थ व्यवहार बानो की ना बानो अब मुझे परमार्थ से भी कोई संबंध नहीं और व्यवहार की तो बात ही क्या बस हमारे युगल सरकार का नाम हमारी दिव्या में हृदय में उनकी लीला चिंतन नेत्रों में रूप समय बस पमूर्ति

नैन में तेरा सर समाज ये लक्षण सनी प्रेम के और एन कछु स आए और उन्होंने कछु शी फायर अपने मदमा तो कुटुम दहते जाए छठ सभी विधि ना तो जहां-जहां पीर की बात सुन खोजने दिन गैनान आईटी दिउ छन छन ले जल रहना और नेत्री से सुप्रभावी रहा है हृदय आनंद मगर प्रभु का दर्शन अपने लोगों में ऐसा नहीं की एक झलक दिखाई और चले गए ऐसे दर्शन क्या कम है निर्गत प्रेम भारी चिन्ना जैसे कहता भांग यह जो कृपा एक क्षण के लिए भी हमारे प्रभु हम से भी ग नहीं होते जब ये देह शक्ति छूटेगा ना स्कूल सूक्ष्म करण और जो गुरुदेव ने भाव दिया और जब भाव का स्वरूप प्रगति होगा तो एक क्षण भी नहीं चिन- चिन्ह भी हरात संघ वो चल रहा है तो अपने प्रीतम के सॉन्ग चल रहा है उसकी साड़ी चेस्ट टाइम प्रीतम में होती है उसके हृदय में उसके मां में उसके बुद्धि में जैसे गोपीचंद कहते थे ना कानो है प्राण में प्राण भाई कानों में ही में ना जानी पड़े कान है की प्राण है अब हृदय में यह पता नहीं चल रहा की कम है या प्राण है कान में प्राण में मां बुद्धि चित हम सब राम

में हो जाता है अब मां मां नहीं रहा रामजी मां हो गए बुद्धि बुद्धि नहीं राम जी हो गए अपना अस्तित्व नहीं रहा जब प्रभु का अनुभव होता है जब मैं था तब हरि नहीं अब हरे बस नाम जाप नाम जाप यह जीवन की सरवत बड़े-बड़े महापुरुषों के सरवत नाम जब छोटा था जैसे श्वास छुटने पर हमारे प्राण व्याकुल होते हैं अगर रॉक दिया ना इससे स्वास्थ्य लेना स्वास्थ्य जैसे जल में डुबोया जाए और फिर हम श्वास लेने के लिए व्याख्यूल तद्धित स्मरण परम व्याकुल के नाराजने का तड़पीता अखिल चरित टड दुश्मन परम ये हमारे लिए बहुत मंगलमय सूत्र है हर आचरण प्रभु को समर्पित और उनका नाम चलना चाहिए हम लोग जो है थोड़ा कहानी ना कहानी चक करते हैं की नाम पर उतना महत्व नहीं देते इसलिए हमें कोई ₹5 लाख रखें 5 मिनट उसका मनोरंजन करने के लिए नाम भूल गए तो मंत्र किसका बड़ा मात्रक किसका बड़ा पैसे को बढ़ाना और त्रिभुवन की राज्य लक्ष्मी देने पर जो आधे पाल के लिए हरि का विषमरण नहीं करता उसे मां भागवत कहते हैं उसे आशिक कहते हैं भगवान के नाम का आशिक कहते हैं

हम अपने हृदय को सदैव जांचते रहे की नाम शून्य मिनट नाम शून्य सेकंड वो अमृत सेकंड है वो अमृत मिनट है वो अमृत समय है वो अमृत जीवन है जिसमें नाम सबका सर नाम नाम और हमारे दिमाग में एक ही बात केवल गंज रही है यह कलिकाल मलाटन मां कर देख विचार श्री रघुनाथ नाम भी ना ही ना आना कोई आधार यज्ञ करने की पवित्रता नहीं र गए ध्यान बहुत बड़ी एकाग्रता सिद्ध होने पर होता है वो मां चंचल का ध्यान हो सकता पूजा सामग्री अपवित्र हो रहे हैं सामग्रियां पवित्र हो रहे हैं वो अच्छे जो भगवती पूजा में आने वाले सामग्रीय उनको दुष्ट किया जा रहा है जैसे गी है घृत है दुग्ध है ये सब दुष्ट हो रहे हैं मतलब अगर अपनी गे बंदी हुई तो ही बात है नहीं अगर आप दूध लो तो पता नहीं क्या है क्या नहीं है तो हर सा अब एक बात केवल र गई है जैसे शास्त्र ज्ञान है बुद्धि की पकड़ खराब हो गई है वो नहीं पकड़ पाएगी सूक्ष्मबाद को उसके लिए बहुत प्रज्ञा बहुत प्रवीण बुद्धि चाहिए एक बात र गई हम आधा में हम नीचे है जैसे भी हैं रामकृष्ण हरि जो नाम मिला है राधा

राधा पक्का परमपद मिल जाएगा पक्का एक की वल्लभ र गया उपाय ना ही ना ना अपने जो आसपास जितना जहां कुछ वातावरण में मिले तो हरि स्वरूप मानकर नाम की महिमा विस्तार की जाए नाम को अगर जीव धोखे से भी नाम लिया खूब आउटस भी नाम जाप लिया उसका मंगल हो जाएगा नाम में बहुत बड़ी समर्थ विराजमान है दूसरा कोई उपाय नहीं र गया ध्यान धरना और समाधि सब खाने सुनने की बात र गई आज संयम ही नहीं है जब आपने अंदर इंद्रियों का संयम नहीं तो ध्यान धरना और समाधि तो बहुत दूर नाम सब कुछ प्रधान कर देगा बिना प्राणायाम के नाम प्राण संयमित कर देगा बिना कुंडली जागरण की क्रिया के नाम कुंडली जागरण जोश चक्र का भेदन कर देगा नाम ब्रह्म भूत प्रधान कर देगा नाम प्रेम प्रधान कर देगा समस्त तीर्थ के आव्हान से जो पाप निवृत्ति होती है उससे अनंत गुना बढ़कर समर्थ नाम में विराजमान है क्योंकि जो पापा चरण का नाम तो तीर्थ करते हैं जो हो गए लेकिन जहां से पापा चरण होते हैं उसे दुर्वासना का नाम वो तो भगवान नाम करता है समस्त दुर्वासा सुनो हम सबको भगवान नाम

जपे और जो भी सानिध्य में आए नाम की घोष करें उनको नाम जपने की प्रेरणा दे क्योंकि अब हमारे समाज में जो जितेन्द्रता पवित्रता धर्म सात मार्ग यह सब गुप्त और लुप्त होता चला जा रहा है केवल इंद्रियों का विलास केवल मनोरंजन मनुष्य जीवन का यही लाभ माना जा रहा है इसलिए हम सब भागवत पार्षद हैं भागवत दास हैं और हमारा एक कर्तव्य है जो हमारे सानिध्य में आवे उसको नाम स्वाद में लगे भाई दिखाकर लाभ दिखाकर कैसे भी अगर वो नाम जब कुछ करने लगे तो बात बन जाए समस्त शास्त्रों का ज्ञान है और नाम जाप नहीं तो हमारी श्रद्धा में बात नहीं बनेगी कुछ नहीं ज्ञान है जो विषय इंद्रियां बस हुए कर्मठ कू जितेंद्र ले लिया और जिज्ञ से श्याम श्याम बोल रहा है तो उसकी बराबरी करोड़ जितेंद्र तो नामी तो कृपा करेगा ही करेगा हम इंद्री मां और साधन का स्त्रीलिंग पता नहीं किस क्षण कौन सी बुद्धि ऐसे असाधारण में फंसा दे की साड़ी साधना नष्ट हो जाए ऐसे बड़े अपराध में अगर भगवान के आश्रित हैं वैसे संभल लेते हैं वो गिरने में देते हैं भगवान के

चरणों का और नाम जब यही साफ-साफ का सर है हमारे तो श्री रामदुलारी शरण जी महाराज श्री राम सहाय की यही मनोरथ परी फकीरी बिरहा ले सबका मिलन एक तरफ यह हमारे भाग्य जो मिल रहे हैं चार-पांच अब लोगों से मिलन एक अलग एक संत से मिलने ना ये जीवन का हमारे लाभ होगा यह हां करके आए ए

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मूल वीडियो: Bhajan Marg (YouTube)

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