Saar Ki Baat / #05 / 27-09-23
श्री हित राधा केलि कुंज, वृन्दावन में पूज्य श्री हित प्रेमानंद गोविंद शरण जी महाराज के साथ एकांतिक वार्तालाप। साधक अपने जीवन और साधना के प्रश्न रखते हैं और महाराज जी उनका समाधान करते हैं।
पूरा प्रवचन
कई बार देखा जाता है की ज्यादा ज्ञान भी नहीं है और ज्यादा मतलब लेकिन अर्बन रुपया का हिसाब किताब उसके पास है और तुम बहुत पढ़े लिखे हो बहुत सब ज्ञान है इंजीनियर सब गोबर डालने को मिल रहा है ना कोई कम मिल रहा है लो कोई मिल यह उसका पूर्व संचित पल्य है की किसी कम का आदमी नहीं दो कौड़ी का दिमाग है पर वो अर्बन पर खेल रहा है अलेक्स और हम बहुत विवेक वन बहुत बुद्धिमान लेकिन ठीक से रोटी खाने की व्यवस्था नहीं हो का रही ये पूर्व कर्मों का हिसाब चल रहा है बहुत मेहनत कर रहा है धर्म से चल रहा है लेकिन कुछ नहीं बन का रहा शराब पी रहा है गंदे आचरण कर रहा है भाई वो मारा घूम रहा है तो इसी में लुक चक्र ए जाते हैं की गंदा आचरण कर रहा फिर भी मौत से हम सही चल रहे हैं फिर भी दुख से आज की खेती कल कम आई है नहीं आज तुम्हारी खेती अच्छी है ना कल मौज से तुम जीवन भर अच्छा खाओगे वह बड़ा जो अभी कर रहा है वो अच्छी खेती का भोग रहा है और जब इसकी बुरी फसल तैयार होगी तब तुम देखना फिर ये इसकी दशा बिगड़ जाएगी भगवान की सत्ता के
बिना पत्ता नहीं ये दिया अभिमान नष्ट करने के लिए बी विचार करने के लिए नहीं की हमारे अंदर वासना और भगवान की इच्छा है की भाई बहन तो भगवान की छुपी जूता भी भगवान की इच्छा फिर नरक भी जो फिर कहे को तुम रो रहे हो सब भगवान की इच्छा है ना तो पर प्रश्न कहे का हो रहा है या पूजो चल रहा है फिर क्या है अगर प्रश्न है और फिर समझो विवेक हैं होकर के दया भिमानी बनकर भोगो को भिगोगे तो तुम्हें दुख क्लेश अशांति जन्म मरण न ये सब भोगना पड़ेगा ये भी भागवत स्वरूप है बहुत सावधान इसलिए 10वां शास्त्रम प्रमाणन के कार्यकारी उसको भगवान के आदेश है ना उन्होंने रचा तुम्हें बुद्धि दी तुम्हें बाल दिया है भगवान की आजा के अनुसार चलो गुरु की आजा के अनुसार चलो भागवत स्वरूप हो जाओगे तुम में और तुम्हारे आराध्या में अवैध स्थिति हो जाएगा तीन बार हरे हो हमारा अविनाशी स्वरूप हम जीवन भर प्राय और एक दिन सफल हो जाएंगे की हमारे पर्यटन को सफल करने वाला हमारा ही कोई पूर्व कर्म है जो हमको नष्ट कर रहा है अगर हम भजन करें ये ऐसा भजन कर्म है जो
पूर्व के कर्मों का विनाश कर देता है भजन केवल और दानपुर ने नहीं दानकुनी एक नया सत्कर्म हुआ और पाप एक नया कुकर्म हुआ सुबह-सुब के द्वारा ही आज जन्म मरण होता है लेकिन भजन ये सत्कर्म कुकर्म दोनों से ऊपर है यह भगवान का जो नाम है भगवान का स्मरण है ये दोनों को खत्म करता है कोई भी सदैव सुखी नहीं र सकता शरीर धनी यहां का कम है सिर्फ टीका कोई भी सदैव सफल नहीं हो सकता यहां का कम है पर्यटन पूरा करना है अगर फल हमें उसकी नहीं प्रताप होती तो हमें निरसा नहीं होना उदासीनी व्रत में करना है या तो हमारी कोई त्रुटि होती है या हमारा पूर्व का कोई पाप होता है जो हमें निर्णय ठीक नहीं मिलने दिया अपने में अगर योग्यता और दूसरे में घृणा यही मार्ग पाटन को ले जाए देखो क्या होता है जैसे हम आपसे कहे की आपको है आपका जी अहंकार नहीं है कहां से रहे हो की अहंकार नहीं चुवा क्यों आपको श्रेष्ठ का भाव अपने में है अभी सावधान हो जो इसको हटा डॉग तो श्रेष्ठ बन जाओगे आप किसी योग्य नहीं है गुरु कृपा भागवत कृपा आपको योग्यता प्रधान कर रहे
हैं कृपा शब्द से परिचय करो आम शब्द को छोड़ो अब आप ऊपर उठाते चले जाएंगे जहां हम अपनी योग्यता रखेंगे पूरा नीचे गिरना पड़ेगा हम और कृपा इसमें बड़ा अंतरराय है कोई भी पुरस्कार मिल जाए कोई खास बात थोड़ी पुरस्कार मिलन खास बात है आपकी स्थिति हृदय की होना पुरस्कार मिला और सहित नहीं हुए और तिरस्कार मिला उसको कितने हुए आप सच्चा पुरस्कार मिला है आपको अब हम लोग क्या होते हैं पुरस्कार में राजी हो जाते हैं तो तिरस्कार में अब जीना बेकार है ऐसी स्थिति ए जाति है जब हम कोई सत्य चेष्टा करते हैं तो इसको बाल मिलने लगता है और ये बढ़ाने लगता है ये बढ़ाना हमारे लिए हानिकारक है सब दगाबाज है सब दगाबाज भूख लगा बाजी कर रहे आज भिगो कल फिर उनकी इच्छा नष्ट हो गए शरीर दगाबाजी कर रहा है हवा पिलाओ डी करो बीमा है वो बुध होता जा रहा है वो मा जाएगा वो भी छोड़ देगा लोगों के से व्यवहार करो जहां उनके स्वार्थ में बड़ा पड़ी तो देखें भी नहीं है हम किसी के काबिल नहीं र गए किसी को हमसे अब मतलब नहीं रहेगा कोई हमसे बात नहीं करता तो
धोखा ही धोखा है ना सर संसार धोखे में है एक सत्य दोस्त है यार है सब का वो है श्री कृष्णा वो है प्रभु अगर उसका भजन करो तो सब समस्याओं का समाधान है अगर भजन नहीं करोगे तो समस्या ही समस्या है जैसे लगता है ना वो पाप कर रहे हैं बड़े आनंद से बड़े सुखी हैं पूर्व का शुक्र तो उनका नष्ट हो रहा है जो उनके कुकर्म को बचाओ पक्ष में ले जा सकता था पहले वो नष्ट होने दो फिर ये कुकर्म और पीछे का जो दुष्कृत जमा है उसको मिलने तो फिर आप देख लेना मिट्टी अमित हो जाएगा धर्म से चल रहा है पीछे का दुष्ट नष्ट हो रहा है आज आपको ग रहा है बहुत परेशानियां हैं लेकिन पीछे का सुकृत वर्तमान का शुक्र मिलने दो प्रकाशित हो जाएगा 10वां शास्त्र प्रमानांते कार्यकार्यो व्यवस्थित हो शास्त्र के अनुसार ही करकर करना चाहिए धर्म के अनुसार करना रुपया कोई बाल नहीं होता धर्म बाल होता है धर्म से चलोगे तो भगवान कर्म को ये रचना करने वाले तो भगवान ही धर्मात्माओं की रक्षा भी करते हैं कोई भी गंदे आचरण मत करो वही आचरण तुम्हें दुख देंगे आके अगर
तुमने किसी को दुख दिया है एक रूप में तुमने दुख दिया तो ₹100 धरेगा वो बास सहित और तुम्हें कष्ट देगा अगर तुमने किसी को बचाया है सुख दिया है दया की है विपत्ति में सहयोग किया है वही तुम्हें शुभ प्रधान या एक कर्म भूमि है जैसा आप करोगे वैसा आपको भोगनी अब करो गंदे आचरण पाप करो देखावे अब का सकते हो इस जन्म में नहीं किया मां सकते हैं लेकिन आपका ये पहले बार थोड़ी जन्म हुआ है बहुत ही जन्म हो गए हैं इसलिए हमें लगता है ना हम जब करो गंदा भजन मत करो गंदे नशा मत
करो गंदे आचरण मत करो भगवान कृपा करेंगे पीछे के सब कर्मों को क्षमा कर देंगे और आगे हमारे अच्छे कर्म होने लगेंगे तो हमें भगवान आनंद प्रधान करेंगे हम लोग सुख शांति समझते हैं बी विचार में सुख शांति समझते हैं मदिरा मांस में दूसरी की हिंसा में चोरी में दुखी दुख है इसलिए भाई शांत रहो इंद्रियों का दमन करो मां का निग्रह करो तुम नाम जाप करो अच्छे बानो तो कान के लाडले बनोगे सुख मिलेगा धन का उपभोग करके वासना की पूर्ति करना चाहते हैं हमें लगता है की अगर मैं संपत्ति होगी तो क्या करेंगे मानो इच्छित भोग-भोगेंगे| भोगनी से तुम्हारी दुर्गति हुई है सुभाष नगर तुम्हारे को हटाना है हम हटाना शुरू करते हैं जहां-जहां तुम्हारे ए सकते हो की मैं मित दूंगा जहां-जहां तुम जो छह करोगे उसको पूर्ण ना करके तुम्हें वो मार्ग दिखाऊंगा जिसमें परमानंद की प्रताप होगी भगवान की इस भाव को ना जान के करण संसारी आदमी कोष्टा है वो माया पटिए उनके लिए धन संपत्ति दे देना कोई बड़ी बात है भोगनी से शांति प्राप्त करने की जो हमारे अंदर मां
बुद्धि प्रेरणा देता है गलत प्रेरणा देता है क्योंकि भगवान करें त्याग शांति अनंतराम भी मां में होता है की अगर ये वो व्यक्ति मिल जाए वास्तु मिल जाए मैं इसे प्राप्त कर लूं सुखी हो जाऊं अगर वो मिल जाए तो कुछ ही दिन बाद आप देखोगे की तीसरी पे नजर चली जाएगी फिर चौथ पे मतलब आप गंदे होते चले जाओगे गिरते चले जाओगे धन प्रताप से आपके अभाव की दूरी नहीं होगी भागवत इसे आपकी अभाव की पूर्ति है सांसारिक जान नहीं कहते हैप्पी बर्थडे ऐसे हैप्पी हो जाओगे जब तक तुम्हारे
पास नाम रूपी धन नहीं है अच्छे कर्म नहीं है बुजुर्गों की सेवा नहीं है तो तुम हैप्पी कैसे दे सकते हो खाने से हो जाएगा बोले हैप्पी बर्थडे तो ऐसे हो जाएगा हैप्पी जब भगवान की कृपा का अनुभव करोगे दूसरों की सेवा करोगे तब आप नाम जाप करो सब तभी जीवन सार्थक है हमारी प्रार्थना है भूल गए हो अपने प्रीतम को वास्तविक प्यार को भूल गए हो इसीलिए सब परेशान हो भूल मिटाना है ऐसा कोई ना समझे की हम धन केवल से पद के बाल से जो चाहे वो करें ओम सुखी हो जाए ऐसी भूल नहीं आप आनंदित रहोगे जो हैप्पी बर्थडे है जन्मदिन तुम्हारे बिना जी नहीं सकते तुम चले गए तो मेरा क्या होगा अब वो उसकी बात में ही समझो तुम्हें कितना प्यार कर रहा हूं क्या का रहा है तुम चले गए तो मेरा क्या होगा यह प्यार है क्या सोच रहा है वह मेरा क्या होगा बस पकड़ लो कोई तुम्हारा नहीं कोई तुम्हें जो बहुत प्यार करता हो उसकी बात सुन ना उसमें आप अगर विवेक जागृत है तो उसमें गढ़ मिलेगी केवल विश्वास की केवल कहानी किसी कोनी में तुम्हें प्यार नहीं मिलेगा पुरी प्यार
की जो सांग भारी मृत्यु है उसमें केवल स्वार्थ नृत्य कर रहा होगा केवल वासना नृत्य कर रही होगी केवल कामना का तांडव होगा बट विवेक से देखना अगर विवेक नहीं तो सब फैंस हुए तो इस में है यह मंदिर की बात आपको बताते हैं हमसे भूल क्या होती है अपने और परिवार के सुखी रहने के लिए हम दूसरों के दुख देने की बात सोच लेते हैं बस यही हमारा पाटन हो जाता है और सिद्धांत यह है जो दूसरों के सुख को सोचता है की हमारी क्रिया द्वारा किसी को दुख ना पहुंचे सुख पहुंचे निश्चित आपका मंगल होगा किसी को भी आप सुखद किसी भी जीव को तो उसका आशीर्वाद आपके जो आपके परिवार को सुखी करेगा लोग यह नहीं जानते ऐसा ही मानते हैं की दूसरे का सुख छन कर्म सुखी हो सकते हैं कम ऐसा नहीं हो सकता तो नाम जाप करो सत्संग सुनते रहो और अब जितना जीवन बच्चा है उसमें ऐसी कोई गलती ना हो तो भगवान कृपा करके आगे बड़ा देंगे कभी भी मृत्यु हो शक्ति है की किसी घबराना नहीं चाहिए देखो वैसे भी एक बार ही तो मारोगे ना और एक बार मरना सबको का एक डरो यार अब सब भजन कर लो
की बार-बार मरना पड़ेगा एक बार मारे हो अपने प्रभु के पास पहुंच जाए बड़ा झंझट है करने जीने में फिर पता नहीं कहां पैदा होंगे कौन मैं बनेगा कौन आप बनेगा कौन परिवार बनेगा आज कृपा करके निकाल दिया अपने मार्ग में कल पता नहीं अगर हम चक गए तो फिर फस जाएंगे इस में जो इतना भजन नदी महात्मा हिरण से प्रेम करके हिरण बन सकता है तो अपने तो सूअर कुत्ता बने में कितनी डर लगेगी हमें पता है आप ये ले जाओगे हम पहले ही अपना नाम कैट लेते हैं ये मेरी नहीं है घबराहट कब पैदा होती है जब ये मेरी हो कोई छन लगा अब हम पकड़े बैठे हैं कल बलवान छन लगा हम आज अभी इसी क्षण करने के लिए तैयार बिल्कुल राधा नाम बोले तो जा 100 वर्ष जियो बेकार है और एक सेकंड भी दिए तो काफी नहीं बोल पे प्राण गए ना हम पहले से छोड़ें तैयार परेशान
यह पाठ वीडियो के स्वचालित (auto-generated) उपशीर्षकों से लिया गया है — इसमें शब्दों की त्रुटियाँ हो सकती हैं। प्रामाणिक वचन के लिए वीडियो अवश्य सुनें।
मूल वीडियो: Bhajan Marg (YouTube)
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