एकांतिक वार्तालाप एवं दर्शन #345 · 21 अक्टूबर 2023
श्री हित राधा केलि कुंज, वृन्दावन में पूज्य श्री हित प्रेमानंद गोविंद शरण जी महाराज के साथ एकांतिक वार्तालाप। साधक अपने जीवन और साधना के प्रश्न रखते हैं और महाराज जी उनका समाधान करते हैं।
पूरा प्रवचन
महाराज जी मैं जब किसी स्त्री को देखता हूं तो दिमाग में कई बार गलत सवाल आते हैं फिर राधा नाम का जाप करता हूं फिर मन में बहुत जलन होती है फिर भी कई बार मन गलत दृष्टि से देख ही लेता है महाराज जी मन को इस समय कैसे निरंत किया जाए आप अपनी बहन को देखते हो कैसा भाव रहता है अगर व गले लग जाती है तो भी कैसा भाव रहता है बहन का रहता है तो वो भी किसी की बहन है अगर आप गृहस्थ में पाणी ग्रह संस्कार हो गया है तो पत्नी के सिवा और किसी भी स्त्री की तरफ नहीं कोई बड़ी
है तो मां है बराबर की है तो बहन है छोटी है तो बेटी है आप अपनी बेटी को गोद में जरूरत पड़े तो स्नान भी आप करवाओ तो आपका गलत भाव थोड़ी आ जाएगा वो तो राक्षस है जो ऐसे भाव रखते हैं अनुजा तनुजा में गलत भाव रखते हैं वह तो राक्षस हैं वह मनुष्य क आने योग्य थोड़ी है इसलिए देखो बच्चा जब हम अपनी बहन के भाव से अपनी मां के भाव से बेटी के भाव से दर्शन करें बहुत लौकिक बात है यह हम कोई अध्यात्म में नहीं बता रहे अध्यात्म में तो केवल स्त्री पुरुष की पोशाक है बैठा हुआ तो भगवान ही सबके हृदय में तो गंदी भावना से नहीं देखना चाहिए हमारा मन गंदी भावना करता है जब तक गंदा रहता है तो जैसे पागल आदमी बक करता है तो हम ध्यान नहीं देते ऐसे अभी आप क्या है मन में तदा आत्म है आपको लग रहा मैं देख रहा हूं आपको लग रहा मैंने गंदी भावना की और उसके बाद आपको जो जलन हो रही लग रहा मेरे को जलन हो रही है तीनों बातें गलत है तुम्हारा मन मलिन हो गया है और उस मन में तुम तदात्मानं क्या उसका वो रिक्शा है क्या पर खड़ा हो गया ना ऐसे मन में
तदा आत्म हो गए उसने गंदी विचारधारा की तो मुझे लगता है मेरी मांग है ये मैंने किया इसी का नाम अज्ञान अहंकार विमु आत्मा करता हमति मन्य ते इस मन को अलग करके देखो आप मन नहीं हो आप यह थोड़ी बोलते हो मैं मन हूं आप कहते हो मेरा मन तो जैसे मेरा टेबल मेरी घड़ी तो मेरे से दूर है ना ऐसे मेरा हाथ मतलब मैं तो नहीं हूं ना हाथ ऐसे ही मेरा मन बुद्धि तो मैं तो नहीं हूं ना मन बुद्धि हां अब सलाहकार है हमारे मन बुद्धि और यह पागल हो गए पागल आदमी कुछ भी बोलता है कुछ भी
करता है कुछ तो हम उसकी उपेक्षा करते हैं पागल है उ गाली बके वो आपको ऊपर कुछ मार भी दे तो अगर आप बुद्धिमान तो आप लौट के मारोगे नहीं उसे यार पागल इसको क्या मारे ऐसे मेरा मन पागल है इस समय में कोवा मदांध हो मदनाचा अंधो में अंधा कौन है मदांध कौन है बोले जीसे काम सताता है काम चढ़ गया है अब वो पागल आदमी है वो कुछ भी कर सकता है तो मन में तदा आत्म होने के कारण य दुर्दशा होती है आप उस समय सोचिए मैं मन नहीं हूं ये मन गंदा है इसलिए गंदी बात सोच रहा है लेकिन ये मेरी बात नहीं राधा राधा राधा राधा वो बार-बार घसीटे का राधा राधा राधा राधा अब वो जलेगा जो आपको अनुभव में आता है वो जल कर के निष्पाप होगा जैसे स्वर्ण जब जहरी के हाथ में जाता है तो तपा आता है तपाने से उसका मल अलग हो जाता है असली स्वर्ण अलग हो जाता है तो मन को निर्मल करने के लिए जलन पैदा होगी अब उस जलन को सहना होगा अगर उस जलन को मिटाने के लिए चले तो जलन की क्या आग में घुस जाओगे और जल जाओगे इतनी वासना कामना प्रबल होती चली जाएगी कि फिर आप इस प्रश्न
ही नहीं कर पाओगे जो आप प्रश्न कर रहे हो ना अभी थोड़ा पवित्र है बुद्धि तो आपको वोह अवसर मिल रहा है जिससे आप ऐसी ऊंचाई पर पहुंचो कि काम क्रोध नहीं तो पहली बात हम ऐसी भावना करें जैसे अपने घर में करते हैं ना कर पावे दोष दृष्टि हो गई तो उसके चरणों की तरफ देखो प्रणाम करो और प्रभु से प्रार्थना करो प्रभु यद्यपि आप ही हो सुना है ऐसा मुझे तो नहीं दिखाई दे रहा पर मेरी गंदी वृत्ति आपकी तरफ गंदी भावनाथ मुझे सामर्थ दो कि मैं इन सब रूपों में आपको देख सकूं चरणों
में प्रणाम कुछ नहीं बिगड़ पाएगा तो अगर आपने उसको दृश्य देखकर या रूप देखकर गलत भा तो मलिन होता चला जाएगा मन और इतना गंदा हो जाएगा कि फिर आप जो घटनाएं सुनते हैं नहीं सुनते कि ऐसा हुआ इतने लोग मिलकर फिर ऐसा आग लगा दी मार ये राक्षस देखो कहां पहुंचा दिया अपना बच्चा तुम्हे अपनी बहन इतनी प्यारी लगी कि कोई देख ले तो बर्दाश्त नहीं होगा और दूसरे बहन को ऐसे तो फिर राक्षसों की दुर्गति होती वह भी सुन लो कि क्या दुर्गति होती होती तो बहुत सावधान बहुत सावधान इसमें मन को आप ऐसा मान कर के यह अलग है दृष्टा भाव इससे कहते हैं और निरीक्षण करो जब गलत बात कहे तो आप स्वीकृति मत करना बस कुछ नहीं बिगाड़ पाएगा आप अभी भूले हुए हो मन में तदा आत में हो स्वीकृति की क्या बात जो व कहता वही आप मान रहे हो नहीं मैं बहुत गलत हूं मैंने बहुत गलत सोचा मैंने बहुत गलत किया यही माया है यद्यपि इनके द्वारा सलाह दी गई थी आपकी केवल स्वीकृति हुई थी इसलिए दुर्गति आपकी हो गई अगर आप इस बात को समझ जाएं और इसके दृष्टा बने नहीं नहीं नहीं
जो गलत है वो नहीं अब मन बार-बार आपको प्रेरित करेगा और जलाए अपने को और आप समझ रहे कि मैं जल मन जल रहा है वह पवित्र होने ल पर इतनी ताकत है नहीं इतनी ताकत नहीं है कि आप उस जलन को अपनी ना माने और होने दे अच्छे-अच्छे उसी जलन में डूब जाते हैं तो बचना है तो राधा राधा राधा राधा राधा राधा वह घसीट रहा है विषक राधा राधा राधा और जिस पर दृष्टि गई उसके चरणों में प्रणाम किया राधा राधा अगर जीत ना जाना तो हमें बताना पर मन बहुत बलवान है अगर भोजन अशु हो गया संग गलत
हो गया गिरा देगा तुम्हारा नहीं चलेगा दृष्टा भाव नाम जप और कुसंग का त्याग और आहार शुद्ध तब जाक इस पर विजय पाई जा सकती है आहार शुद्ध नहीं है अशुद्ध आहार है नहीं रुक पाओगे कुसंग है कुसंग से सब कुछ है मोबाइल है दृश्य है बातें हैं ऐसे साथियों का संग फिर नहीं रुख पाओगे आहार शुद्ध कुसंग का त्याग और नाम जप और विवेक पूर्वक यह देखना कि यह मन की चाल है मेरी नहीं नहीं नहीं मैं सा नहीं राधा राधा राधा नहीं राधा राधा राधा राधा वो बार-बार आपको सलाह देगा सुखी कर दूंगा उसकी सलाह में हम लोग यही फस जाते हैं बड़ा सुख मिलेगा बड़ी मस्ती मिलेगी बस फिर जो आगे दुख है वह जानता नहीं वह चलता तो सुख के लिए पर मिलती फिर फांसी है आजीवन कारावास मिलता है नहीं बो बहुत से लोग हैं कि जिनको कोई नहीं जानता व कर गए हां तो नरक में जाकर जो दुर्दशा होगी ना वहां थोड़ी किसी गवाही वकील घोष किसी की जरूरत नहीं एक सेकंड के कम हिस्से में पूरा न्याय हो गया जीवन का इस बहुत सावधान रहो डरो भाव से चलो और ऐसा भाव करो कि जैसे हमारी बहन साथ हो
तो क्या ऐसे ही किसी की बहन है किसी की मां है किसी की बेटी है ऐसे भाव रखो भगवान की प्राप्ति के लिए भाव आवश्यक है जननी शम जानो पर नारी धन पराय बसते विस भारी बहुत ही बड़ा अपराध है जिसे आज लोग मनोरंजन समझ रहे हैं इसीलिए इस विषय पर बोलने की इच्छा नहीं होती अभी जो चला है ना गर्ल फ्रेंड और बॉय फ्रेंड का व्यवहार भगवान बचावे हमारी इस नई पीढ़ी को बहुत य गंदी भावना है और इसमें सब कुछ नष्ट हो जाता है उनका जीवन जो उज्जवल भविष्य किशोर अवस्था ई पर चढ़ने की थी सब खाली हो जाते हैं उनकी बुद्धि क्षीण हो जाती है उनका बल क्षीण हो जाता है उनके पुण्य नष्ट हो जाते हैं उनके आचार विचार नष्ट हो जाते हैं गए थे पढ़ने कि बहुत अच्छे विनयशील और उन्नति शल हम बनेंगे और गिर कर के ऐसी दशा को प्राप्त हो जाते हैं आजकल यह माना ही नहीं जाता कि अधर्म है मनोरंजन माना जाता है नहीं नहीं ऐसा मनोरंजन ना करो जो तुम्हारा सर्वनाश कर दे आगे आके यह बा सना यह मन कहां पहुंचा दिया लोक परलोक सब नष्ट कर दिया इनकी चक्कर में मत पड़ो यही
दुर्गति करते हैं मन बुद्धि इनको शासन में लो शास्त्र आज्ञा सत्संग सत्वचन नहीं नहीं नहीं तुम्हारे दशक के बिना कुछ नहीं हो सकता अंदर यह बात समझ लेला जब तक आप स्वीकृति नहीं देंगे ना बुद्धि कुछ कर सकती है ना मन कुछ कर सकता है बस आप होश में रहे यह गलत है तो गलत नहीं करूंगा सब कुछ कर सकते हैं आप नारायण बन सकते हैं आप शिव बन सकते हैं आप भूत बन सकते हैं आप कुत्ता बन सकते हैं आप नाली का कीड़ा बन सकते हैं अब क्या बनना है वह करके दिखाओ यह मनुष्य जन्म दिव्य बनने के लिए तुम्हें देख के चार लोग सुखी हो जाए तुम्हारे आचरण देख के तुम्हारे नगर के तुम्हारे देश के लोग सुखी हो जाए ऐसा भीय जीवन है और गिराते चले जाओ तो इतने गंदे हो जाओगे कि लोग देखकर जलेंगे वही है नीच वही है ऐसे देख नहीं नहीं नहीं ये मन बुद्धि की चाल कितना गिरा देती है अगर इसे शास्त्र सम्मत और संतों की वाणी के अनुसार नहीं चलाओगे तो दुर्गति कर ही देता है कोई भी हो कोई भी हो ये बहुत चलायमान है बहुत चला एक मिनट अच्छे रहेंगे दूसरे मिनट गंदे हो
जाएंगे इनका ऐसा है नाम चल रहा है इसलिए सबसे प्रार्थना करते हैं नाम चलाओ कम से कम तुम्हारी बुद्धि तो ठीक रहे तो निर्णय ठीक होगा नहीं तो ऐसी जगह फसा देंगे फिर कुछ नहीं हो पाता कुछ नहीं हो पाता इतना अपराध करवा देते हैं फिर जलता अगर कोई ना जाने भी तो हृदय जलता रहेगा मन अशांत रहे दुख ही दुख मिलेगा इसलिए यह दैवी शक्ति है नारी नव दुर्गा जानते हो हां वही है दूसरी कोई नहीं है अगर इनको भाव से देखोगे तो इनका आशीर्वाद मिलेगा कुदृष्टि से देखोगे तो खुद जल जाओगे रावण में कोई कमी नहीं थी पुलस जी का नाती था बहुत बड़े ब्रह्म ऋषि का ब्रह्म ऋषि कोई साधारण नहीं उत्तम कुल पुलत कर नाती और बल ऐसा था जहां जाकर भुजा बजा देता ना लोक के लोग उसके सामने झुक जाते थे चलत दशानन डोल तवनी धरती मारता तो नाव की तरह डगमगाने लगती ऐसा बलशाली और विद्वान इतना बड़ा कि जहां भी रुद्राभिषेक आज भी होगा तो उसका रचा हुआ स्तोत्र गाया जाएगा जटा टवी गल जवल प्रवाह पावितस्थले गले ल लंबित भुजंग तुंग मालिका य उसी का रचा हुआ है बड़ा भारी
ज्ञानी मतलब शास्त्र ज्ञानी भी था कमी क्या थी कमी चरित्रहीन हो गया बस एक कमी थी उसमें दूसरी बात नहीं थी वो सर्वनाश हुआ चरित्रहीन होने से एक ही जगह ने बहुत जगह उसके के जो ग्रंथों को पढ़ो तो मिलता है वो चरित्रहीन हो गया था पराई माता बहनों की तरफ ऐसा वो अपने बड़े भ्राता कुबेर के लड़के की बहू के साथ ही ऐसा गलत व्यवहार कर दिया तब भगवान ब्रह्मा जी ने कहा था आज के बाद जब तुम कही ऐसा बिना उसकी रुचि के अनुसार तो तुम्हारी खोपड़ी फट जाएगी उसी समय तुम नष्ट हो
जाओगे बहुत मारा गया कुल सहित कोई पिंड दान देने वाला नहीं बचा रावण के मंदोदरी खुद कह रहे राम विमुख हाल तुम्हारा रहा न को कुल रो केवल चरित्रहीन होने पर हां हम लोग राम चरित्र गाते हैं भारतीय है धर्म के मार्ग पर चलने वाला यह देश है भले पीछे वाले देशों की बातें अनुकरण कर रहे हो लेकिन पीछे वाले हमारी बातें अनुकरण कर रहे हैं और हम लोग अपने महामहिम धर्म को छोड़कर इधर-उधर भटक रहे हैं तो यह बात पक्की समझ लो कि जो चरित्रहीन है वह कभी सुखी नहीं रह सकता चाहे जहां चाहे जो कुछ पक्का रावण सुखी नहीं रह पाया जलने लगा और देखो पूरी लंका जल गई और उसके संग के कारण सब परिवार मारा गया तो आप समझ लो कोई भी चरित्रहीन रहेगा तीन चार बातें हर एकांतिक में कहते भैया हाथ जोड़ केर प्रार्थना है कोई नशा मत सीखो यह तुम्हारे जीवन को बर्बाद कर देगा पराई माता बहनों की तरफ विचार दृष्टि मत रखो नहीं तो नष्ट हो जाओगे और ये मांस खाना हिंसा करना यह तुम्हें नाश कर देगा तुम्हारे शरीर को भी तुम्हारी बुद्धि को भी अब कोई माने ना माने हम
तो प्रार्थना ही कर सकते हैं अगर तुम्हें सुख चाहिए शांति चाहिए तो कम से कम चार चीजें छोड़ दो कभी किसी पराई मां बहन के साथ हम ऐसा भाव नहीं करेंगे व विचार का मांस नहीं खाएंगे शराब नहीं पिएंगे और हिंसा नहीं करेंगे अभी अभी आनंद आ जाए राधा राधा राधा राधा मान लो तो आनंद है अब अगर ऐसा कुछ लगता है कि नहीं सुख है तो देख लो फिर संसार क्या दुर्दशा में जा रहा है व आपकी स्थिति क्या होगी मान लोगे तो अभी अभी आज से सुखी हो जाओगे नहीं मानोगे तो परिणाम देख कर के फिर समझ लेना हमारी बात फिर याद कर लेना पक्का हमें बहुत अच्छा लगा बोले तो सबके लिए हैं पर आपको बात ये प्रश्न सुनक अच्छा लगा कि तुम बहादुर आदमी हो अपने हृदय की कमी को समाज में रखना ये बहादुरों का कार्य होता नहीं होता नहीं तो गा कि चार आदमी क्या कहेंगे यार माताओं की तरफ गंदी दृष्टि रखता है ये बहादुर आदमी के लक्षण और भगवान की कृपा है नाम जप करो कभी मन के अनुसार गंदे आचरण मत करना फिर आप देखना आपको कैसा अनुभव होता है रूपे पैसे मकान बाहर अगर होता तो
बड़े-बड़े लोग आनंदित नहीं हो जाते आनंद तो आनंद सिंधु भगवान हृदय में बैठे हैं जब अच्छे आचरण करोगे नाम जप करोगे ना एकदम आनंद की उफान आएगी एक मस्ती आती है जैसे लोग कहते हैं ना अरे मौज ले अभी मौज जानते कहां हो तुम मौत को मौज समझ रहे हो आओ मौज की मस्ती जिसे कहते हैं बादशाह हो जाओगे बादशाह जब काम क्रोध पर विजय प्राप्त हो जाएगी ना अरे वो मस्ती मिलती परमानंद की हम भगवान के अंश है आज अब दुर्गति नहीं अब आगे बढ़ो माधव जी दिल्ली से श पूज्य गुरुदेव आपके चरणों
में कोटि कोटि प्रणाम गुरुदेव मैं शास्त्रीय संगीत का छात्र हूं भगवत मार्ग में प्रवेश पाना चाहता हूं तो क्या मैं प्रिया प्रीतम को राग गायन वादन के द्वारा रिझा सकता हूं और इसी वादन से संतो की कृपा प्राप्त कर सकता बहुत जल्दी बहुत जल्दी स्वामी जी महाराज तो इसी से बिहारी जी को मुस्कुराते थे बिहारी जब स्वामी जी महाराज गाते थे तो अगर नारद जी को देखो वीणा लिए हुए बहुत से ऐसे महापुरुष नरसीह की करताल प्रसिद्ध है बड़े-बड़े महापुरुष प्रभु के लिए जो संगीत बजता
है वो भजन ब बन जाता है और विषय पुरुषों को अल्लादी करने के लिए जो बनता है वो बंधन कारक है प्रभु के लिए संगीत सीख के श्यामा श्याम के लिए बहुत अच्छी बात है हां स्वामी जी के पद गाव बड़े-बड़े महापुरुषों के पद और संगीत में उन्हीं पदों को गाकर सुनाओ बिहारी बिहारी मुस्कुरा देंगे जहां उनका नाम वाणी का कीर्तन होता है नाम वाणी सुनत श्याम श्यामा सुब नाम वाणी निकट श्याम श्यामा प्रगट प्रभु वहीं प्रकट रहते हैं ना हम बसाम बैकुंठ योगी नाम हृदय में भगवान कहते मद भक्ता यत्र गायति तत तृषा म नारद जहा मेरे भक्त मेरा गुणगान करते वही में विराज नाम कीर्तन गुण कीर्तन लीला कीर्तन तो संगीत तो और सरस हो जाता है अरे राधा राधा राधा राधा ऐसे गा रहे और इसको कई संगी तों में गाए और अल्लाद मिलता है तो संगीत सीखो पर प्रभु के लिए प्रभु के लिए जो कुछ किया जा जाता है वो बहुत दिव्य हो जाता है अब जैसे 100 ग्राम मिठाई ली और हम खा गए वो मल बन गया और 100 ग्राम मिठाई ली प्रभु को अर्पित करके पाए व प्रसाद है वह तुम्हारे पाप का नाश
करेगा और भगवत प्रसन्नता क हेतु होगा हमें सबको चाहिए जो भी हमें हमारे पास है वो अपने घर में ठाकुर विराजमान करें और पहले उनको अर्पित करें जैसे नौकरी जा रहे हैं प्रणाम किया महाराज जा रहे हैं आठ घंटा के लिए अब जो बने जैसे बने आप देखना संभालना और आठ घंटे में 10 पांच बार आपने राधा राधा कह लिया 10 पाच बार केवल और आठ घंटे मेहनत करने के बाद फिर आए और प्रभु आठ घंटे की सेवा करके आ गया अब ये आठ घंटे का समय आपके चरणों में समर्पित पक्का वो भगवत प्राप्ति कराने वाला परम सुख देने वाला होगा ये तो सर्वानी कर्माणि में सनस मत परा जो सारे कर्म मेरे को अर्पित करते हैं वो भगवत प्राप्ति हो जाती है तेशाम समुद धरता उसका उद्धार मैं कर देता हूं कोई भी ऐसा ना समझे कि अगरबत्ती लगाने से भगवान प्रसन्न होते हैं अगर आपकी शान है फल जोतना फावड़ा चल ये सब भजन है राधा राधा राधा राधा हल जोत रहे फावड़ा चला रहे और भगवान एक महान भक्त हुए है केवल राम जी उनका केवल राम जी नाम था उनका तो या पहले जैसे खेती है ना तो ज्यादा धनी नहीं
होते थे क्योंकि पानी की व्यवस्था नहीं होती थी सींचने के लिए आकाश से जो गिरे हमने खुद देखा है व एक इतना बड़ा पुर होता था गांव में और बैल से खींचा जा आय राम रुक बड़े तो ऐसे छोटी छोटी क्यारिया सिच पाती थी उनके पास तो बहुत कम खेती थी तो फिर वो मेहनत करते थे और मेहनत करने में उन्हें खाने भर को मिलता था पर उनकी श्रद्धा ऐसी थी नाम जप करते थे वो राम नाम के बहुत प्रेमी थे राम राम राम राम ऐसा और अगर संत दिखाई दे जाए तो पैर पकड़ कर के घर जरूर लाते थे चरण धोना और जो भोजन है वो उनको पवा अ संतों को स्वभाव श्रद्धा देख ले तो आपस में चर्चा करने लगते हैं भाई अगर उस क्षेत्र में जाना बहुत बढ़िया वो भगत है भाई बहुत प्यार श्रद्धा से पवा आता है तो दो चार छह ऐसे आने लगे धन तो था ले उल के पास एक दिन 10 12 संत आ गए नाम उच्चारण किए आज हम रात्रि यही रुके अब मन में सोचे कि कुछ और मिट्टी की दीवाल और ऊपर से त्रण का छप्पर कुछ ऐसा नहीं कि बेच भी सके तो बड़े-बड़े जो धनी मानी पुरुष थे उनके यहां गए और कहा मुझे कुछ उधार
दे दो आज हम अपने अतिथि संतों को पवा दे फिर जो आप सेवा कहो तो गरीब जान के कोई उदार भी नहीं देता है एक बहुत चतुर था उसने कहा हमें कुआ खुदवा है तुम जो चाहो संतों के लिए ले जाओ पर कुआ तुम खोद देना अब कुआ खोदने में कितनी मेहनत की उन्होंने स्वीकार कर लिया हां आज हमारे अतिथ संतों का उदर पोषण करने के लिए आप दे दो फिर हम ख देंगे तो घी चावल दाल उसने सब दिया खूब अच्छे से बनाया भगवान को भोग लगाया और सब संतों को कवाया अब कुवा खोदने के लिए पति पत्नी ही थे जो फावड़ा मारते तो राम तसला भरता राम राम हर चेष्टा में नाम जब 60 हाथ में वहां पानी निकलता था 40 हाथ खोद चुका था तो कुछ बीच में बालू वाली परतई और वह नीचे थे पत्नी ऊपर थी और रस्सी से ऐसे रज तो रस्सी से रज निकाल ही चुके थे कि अचानक फट गया कुआ क्योंकि बालू थी ना और दब गए अब उसमें हजारों कुंतल मिट्टी मतलब ऊपर ऐसे बस पुर गया मानो पूरा थोड़ा र अब पत्नी खड़े चिल्लाए रोए की सेठ से कहा सेठ ने कहा इसकी तो हमारी कोई जिम्मेवारी नहीं थी वो कह रहे थे खोद के देंगे
हां तुम्हें कभी दो चार दिन के लिए भोजन की जरूरत हो तो ले जाना अब गरीब आदमी की अ उस समय कोई ये वो सुण वाली क्या कहते जै जै वो तो थी बुला लो और जल्दी अब व तो ऐसे अब किसी ने कोई ध्यान नहीं दिया कुआ पाट दिया गया कि वो तो मर ही गए होंगे पधार गए होंगे अब उसकी पत्नी को लोगों ने डांड ब कुछ खाने पने दिया एक महीना हो गया वहां से राजा की सवारी निकल रही थी तो उनके कान में सुनाई दिया राम राम राम इतना मधुर आनंद में नाम कि उनको लगा कि यह कौन महात्मा की आवाज है तो आज आस सैनिकों को दौड़ा कोई संत नहीं बोले य कोई महापुरुष की आवाज है राम तो धीरे धीरे उसके समीप गए वो कुआ जहां खुदा वहां आवाज आ रही थी कुआ तो था नहीं बराबर कर दिया गया था तो उन्होंने वहां के लोगों से पूछा कि यहां आवाज आ रही यहां क्या है बोले अभी एक ही महीना पहले कुवा तैयार होने वाला था क् केवल राम जी थे मिट्टी फट गई तो अच्छा नीचे एक महीना हो गया तुरंत खुदवा अब तो राजा आदेश मिला बड़े सब सैनिक लग करके खुद वाया गया तो देखो वह जहां बैठे थे तो दो हाथ
ऊपर मिट्टी रुक चुकी थी रुकी थी जैसे किसी ने रोक दिया हो और एक गुफा सी बनी थी जब सारी मिट्टी हटाई गई तो वहां देखा थाल कई पाई हुई रखी थी और एक भरी हुई अच्छे अच्छे पदार्थ शीतल जल कौन पहुंचा रहा था राम जी प्रभु और ऐसे बैठे राम राम सुंदर वायु पहुंच रही थी खाना पना मिल रहा था और आश्चर्य की बात वो भोजन सोच भी नहीं बना रहा था क्योंकि दिव्य थाला कहां जाते सच सोच भी नहीं बना रहा था पानी लघुशंका नहीं बना रहा क्योंकि दिव्य है ना आश्चर्य चकित हो गए उनको निकाला गया राजा ने उनके चरणों में प्रणाम करके कहा आप एक महीना से ऐसे मिट्टी में आप जीवित कैसे हैं बोले हमें कुछ भी कष्ट लेगा अच्छी श्वास लेने को ऑक्सीजन मिल रहा था भोजन मिल रहा कौन दे रहा था का भगवान दे राम राम देखो गृहस्थ और इतने बड़े महापुरुष कि उनका चरित्र लिखा गया है ग्रंथ भक्त माल जी में उनका चरित्र लिखा हुआ तो ये वही थोड़ी कर सकते हैं अपने भी कर सकते हैं नहीं कर सकते हर काम में अगर राधा राधा राधा राधा वही बात आ जाएगी भगवान का नाम प्रभु का
नाम लेते हुए जो कार्य किया जाता है वो सब पूजन बन जाता है और ये सर्वा शचर मय घटनाएं उसी के जीवन में में घटती है जो भगवान के भरोसे होता है भगवन नाम जापक होता है जीवन में हम सब एक बात चाहते हैं कि हम सुखी हो जाए और प्रसन्न रहे अंदर से देखो एक शांति और ऐसा सुख जिसमें दुख देखने को ना मिले ढूंढने पर भी दुख ना दिखाई दे पर करते हम सब सुख के लिए लेकिन ना तो शांति है और ना वास्तविक प्रसन्नता है आप देखो पद भी है संपत्ति भी है जो चाहा संसार का लगभग लगभग उतना
मिल भी गया लेकिन ना चाह मिटी ना शांति मिली ना ऐसा सुख मिला जिसमें दुख ना हो ना अखंड प्रसन्नता मि इसका मतलब है कि हमारी चाह यहां से पूर्ण नहीं होने वाली पक्का ब्रह्म भूता प्रसन्न आत्मा सोचन का यह तो करो ही जो जहां आपको सेवा मिली है भगवान की सृष्टि के जो पद में हो जो आपको सेवाएं मिली वह तो भगवान की सेवा लेकिन नाम जप नाम जप जरूर करते रहिए यह मान कर के कि औषधि है यह दुख मिटाने के पुराना रोग है जल्दी लाभ अनुभव में नहीं आएगा पर अमोघ दवा है जो भगवान का नाम प्रिय हो वही अधर्म आचरण यदि करेंगे तो नाम जप नहीं हो पाएगा पाप वंत कर सहज स्वभाव भजन मोर्ते भाव अधर्म का पैसा ऐसा समझना जैसे कोई खीर में जहर मिलाकर दे दे जैसे बढ़िया खीर मेवा पड़ी हो और आपके सामने कोई कान में आपके बता दे इसमें जहर पड़ा है फिर आप अगर थोड़ी भी बुद्धि रखते हैं तो चेंगे भी नहीं ऐसे ही हम तुम्हें शास्त्र और संत और भगवत प्राप्त महात्माओं की बात कहते हैं अधर्म का धन खीर की तरह प्रिय लगता है कि हमको सुख मिलेगा भोग सामाग्री एकत्रित
करके लेकिन व मीठा ऐसा जहर है जो ना आपको सुख मिलेगा ना आपके परिवार को परिणाम में क्लेश और दुख तो धर्म पूर्वक आचरण करते हुए प्रभु का नाम जप करते क्योंकि कहीं ना कहीं कृपा तो है ही ना प्रभु ने मानव दे दिए ये सेवाएं दी पद दिए तो अब इतने में हम संतुष्ट ना हो जाए हम इससे ऊपर भी उठे ऊपर भी है नाम जप अधर्म के धन का त्याग और जो पद मिला है उसे भारत की सरकार के द्वारा जो मिला वह सेवा भगवान की सेवा जैसे आपके वचनों से जो वकील पद होते हैं उनके वचनों से बहुत बड़ा जो धर्म में चलने वाला है उसका बचाव हो सकता है अधर्म में चलने वाले को दंड मिलकर पवित्रता हो सकती है अगर हम कहीं धर्म को छोड़ दे तो उल्टा हो सकता है अधर्मी छूट सकता है और धर्मात्मा को फांसी हो सकती है नहीं हो सकते क्योंकि प्रमाण और सूत्र हम जैसे पेश करेंगे वैसे ही न्याय होगा बस यहां सावधानी रख ली वह देख रहा है कोई जगह ऐसी नहीं जहां उसकी दृष्टि ना हो हम उसको देखकर बात करें कहीं भी हो यह ना समझना कि आप अकेले हैं एकांत में वो बैठा है जो सबको
देखता है कोई ऐसी जगह नहीं जहां कस कहां जहां प्रभु नाही वो जब देख रहा है तो किससे डरने की बात है वो तो जिससे डरना चाहिए वो तो देख रहा है कि हम गलत कर रहे हैं फाइनल वो करेगा फिर हम कभी सुखी नहीं हो पाएंगे अशांत रहेंगे लान युक्त रहेगी अगर किसी भी धर्मात्मा को कष्ट पहुंच जाए तो वोह वापस हमारे ब्याज सहित बहुत कष्ट देता है यही संबोधन करने के लिए धर्म से चलना नाम जप करना और यह विचार करते रहना कि हमारे द्वारा हमारा परिवार हमारी समाज जो पद मिला कहीं त्रुटि ना हो जाए यही साधना हो जाएगी यही भगवत प्राप्ति कराने वाली बन जाएगी रेण जी गुरुदेव राधे राधे आपके चरणों में कोटि कोटि प्रणाम महाराज जी आपकी कृपा से हमें राधा नाम मिला राधा नाम ने जीवन में खुशियां भर दी माता पिता होने के ना थोड़ थोड़ा रुक फिर आगे प्रश्न किसका प्रश्न है हा खुशियों को केवल राधा नाम की कृपा मत समझ लेना क्योंकि दिन है तो रात्रि आती ही है और रात्रि है तो दिन आता ही है ऐसे सुख और दुख यह प्रारब्ध के अधीन है नाम जापक सुख और दुख को
समान भाव से सहता हुआ अध्यात्म की दिव्यता की ऊंचाई पर पहुंचता अगर आपने भगवान की कृपा या राधा नाम का फल मानी हुई अनुकूलता की हुई कामना की पूर्ति तो फिर जब प्रतिकूल विधान होगा तो तुम्हारी श्रद्धा हट जाएगी तुम्हारी आस्तिक की नीव हिल जाएगी कि अब शायद राधा नाम का वह प्रभाव नहीं पड़ रहा है इसलिए हम प्रार्थना करते हैं कि अनुकूलता कामना की पूर्ति सकति है सुख और दुख पूर्व से निर्धारित हैं समय-समय पर वह प्रकाशित होते रहेंगे चाहे आप दुरात्मा हो और चाहे महात्मा हो इस शरीर को बनाने के समय पहले दो विभाग करके डाल दिए गए इतने वर्ष में घटना घटेगी य दुख मिलेगा इतने वर्ष में इतने समय तक ऐसी परिस्थिति उच्च कोटि की बन जाएगी कि आपको सुख मिलेगा ऐसे व्यक्ति मिल जाएंगे ऐसी वस्तु मिल जाएगी ऐसा भाव बन जाएगा यह दुख और सुख हमारे भजन का फल नहीं है भजन का फल है दुख और सुख में समान भाव रखते हुए भगवान के मार्ग में चलना इसलिए हम पहले आपसे प्रार्थना करते हैं कि कभी ऐसी दुखद या विपत्ति की परिस्थिति आवे तो तुम्हारा नाम
प्रेम कम नहीं होना चाहिए तुम्हारा भगवत आश्रय कम नहीं होना चाहिए बड़े-बड़े महापुरुषों के चरित्र पढ़कर देख लीजिए दुख विपत्ति प्रतिकूलता अनुकूलता सुख संपत्ति दोनों में भगवान की दुलार और कृपा को देखते रहे अगर हम केवल अनुकूलता में और कामना की पूर्ति में ही अपने भजन का फल मानेंगे या भजन की सिद्धि मानेंगे तो धोखा हो जाएगा क्योंकि सब दिन होत ना एक समान एक जैसा सबद नहीं रहता भगवान भी यहां अवतार लिए हैं तो देखो अयोध्या से बारात सज के जाती है उधर भगवान धनुष
भंग करते हैं त्रिभुवन में विजय मिलती है महाराज विदेह राज ज्ञानियों के गुरु जनक जी भगवान का चरण प्रक्षालन करके जानकी जी का पाण ग्रहण संस्कार करवाते ऐसा अद्भुत सुख फिर चक्रवर्ती सम्राट के महल में अद्भुत उत्सव इसी उत्सव में भावना वंती की योराज पद दे दिया जाए प्रभु को शाम के यह निर्णय करते हैं सुमंत्र जी से मिलकर के कि मेरा राम अब योग्य हो गया है अब मैं इसे जो अभी तक युवराज भाव में अब चक्रवर्ती सम्राट पद के लिए यही च यह बात फैलती है मंथरा की बुद्धि बदलती है क के जी के हृदय में दो वरदान की इच्छा होती है 14 वर्ष का वनवास अब आप विचार करो जहां राजा राम बनने वाले हैं इतना सुख कि समुद्र की भाति जैसे लहरें आ रही ना बड़ी-बड़ी ऐसे सुख की लहरें अयोध्या में अभी तो राम लक्ष्मण भरत शत्रुगन अब इनकी परम दिव्य आत्म स्वरूप देवियां भी विराजमान हो गई आकर के सब सुखी सब आनंद अचानक ऐसी घटना घटी सुबह भगवान राम का वनवास तापस वेस विशेष उदासी 14 वरस राम सबके प्राण भगवान श्रीराम थे वो जिनको प्रेम है वो जानते कैसे
जिएंगे भाग पड़ी अयोध्या के सब नर नारी बाल भगवान के हम आपके बिना नहीं जी सते सियाराम लखनू मानो प्राण निकल गए भगवान रात्रि में किको दुख पड़ेगा छुप के ऐसे रथ चलवाई कि कोई जान ही नहीं पाया चिन्ह सब फिर अध्या में 14 वर्ष तक भारी रुदन और कष्ट पूर्वक देखो कहां यह सुख और कहां एकदम भयानक इतना दुख जब भगवान के अवतार में ऐसा हो सकता है तो हम लोग तो मनुष्य हैं हम तो भगवान का भजन करने वाले हैं वो तो भगवान है तो इस लोक का क्रम ऐसा है कि कभी बहुत बड़ा सुख तो कभी
बड़ा भयानक दुख लेकिन नाम जापक दुख और सुख में समान रहता है जैसे हमारे भगवान लाज तिलक होना है और मिल गया 14 वर्ष का बनवास तो भगवान वैसे ही प्रसन्न थे उदास नहीं हुए जिसमें हमारे पिता को सुख मिले अगर वो माता को वचन दिए हैं तो मेरे लिए अ जो ध्यान बन ही परम सुखदाई नंगे पैर भगवान 14 वर्ष घोर कंक पथरीली काटों से युक्त भूमियों में विचरण सम रहे ना प्रसन्न रहे हमें भगवान अवतार लेकर के शिक्षा देते हैं हम कैसे रहे यह भजन यह अध्यात्म आपको शम बनाता है यह भूल लोगों की है कि संत महात्माओं के पास जाएं हमारी कामनाओं की पूर्ति हो सकता है क्योंकि भगवान का भजन करते हैं भगवान की आश्र तो आप भावना लेकर आए हो लेकिन उस कामना की पूर्ति के बाद क्या आपकी कामनाए नहीं रह जाएंगे क्या बहुत सी कामनाएं बहुत सी चिंताएं बहुत सी आवश्यकताएं एक मिल जाए तो फिर कुछ नहीं र वो है भगवान जिनके प्राप्त करने के बाद कुछ प्राप्त करना बाकी नहीं रहता जिनके जान लेने के बाद कुछ जानना बाकी नहीं रहता वो प्रभु है उनके सिवा आपके हदय में कामना
तृष्णा वासना इच्छाएं यह भारी जलन पैदा करती रहेंगी अगर शीतलता प्राप्त करने तो एक मात्र सुखी मीन जाहा नीर गाधा तिम हरि शरण न एक को बाधा भगवान का आश्रय नाम जप और इन खुशियों में खुश मत होना बो कैसे यार बाबा जी उपदेश कर रहे खुशी आए तो उसकी मौज ना ले अगर उसकी लोगे तो जब दुख आएगा तो तुम दुखी हो जाओ खुश में अनुकूलता में गंभीर रहे और प्रतिकूलता में सावधान रहे अनुकूलता में कोई जान ना पावे कि ऐसी अनुकूलता आए हां ठीक है भगवान की कृपा है उनका दुलार है विपत्ति
आई तो सावधान ऐसा धैर्य रखना टूटने ना पाना कोई जान ना पाए कि तुम्हें विपत्ति ने रद दिया है हर स्थिति ये भक्तों की हम तुम कितना नाम जप करते हो सुदामा जी देखो खाने को भी नहीं था पर निष्ठा देखो कृष्ण के सिवा कोई आश्रय नहीं तो बन गई जैसे द्वारिका पुरी वैसे सुदामा पुरी उससे भी उनको कोई ऐसा थोड़ी कि हर सोकर राजा महाराजा के कपड़े पहन के पत्नी से कहा तुम्हारी इच्छा थी तुम भी राजो हम तो मांग के ही खाएंगे और अपने कृष्ण कृष्ण कृष्ण कहते हुए भूमि में ही शयन करेंगे यह मिलता है भजन से माया का आकर्षण हट जाता है हम माया के चाहे हुए पदार्थों के मिल जाने पर भगवान की कृपा मनाते हैं और वह नाशवान नहीं जानते नहीं जब नष्ट हो जाते हैं तो लगता है कि अब भगवान की कृपा कम हो गई नहीं लग जब किसी का जवान बेटा 20 वर्ष के लिए आया है उसकी आयु ही इतनी है और खूब भजन दान पुण्य कर रहा अकेला लड़का है और 20 वर्ष में चला जाएगा क्योंकि सरकारी आदमी है इतने के लिए भेजा गया था अब आपको अगर आप सुलझा हुआ व्यक्तित्व नहीं तो आपकी
श्रद्धा खत्म हो जाएगी या जब भजन करते इतनी सेवा करते हैं और एक था उसको भी भगवान ने अब पूरा चिंतन खत्म हो गया पूरा जीवन मतलब बर्बाद हो गया अगर भजन ना हुआ तो बर्बाद हो जाएगा ऋतु और निकेश जी थाईलैंड से राधे राधे गुरुदेव भगवान आपके श्री चरणों में कोटि कोटि प्रणाम महाराज जी आप जी का अतिशय धन्यवाद कि आप ध्य से हमारे घर और हृदय में विराजमान है जिसका आनंद प्रतिदिन महसूस होता है गुरुदेव भगवान कई बार हमारे शरीर के संबंधी परेशान होकर अपने परिवार के सदस्यों के प्रति रोष प्रकट करते हैं ऐसी स्थिति में हमें क्या करना चाहिए हम भगवत मार्ग में है ई है सई जो राम रच राखा को कर तर्क बढ़ाव शाखा अकही जपन लगे हरि नामा राधा राधा राधा प्रभु का जो विधान है वो होगा सुनो भरत भावी प्रबल बलख कहो मुनि नाथ मुनि नाथ भगवान वशिष्ठ जी सर्व सामर्थ्य शली त्रिकाल ज्ञ महात्मा ब्रह्म बोध संपन्न वो कह सुनहु भरत भावी प्रबल विलक कयो मुनि नाथ हान लाभ जीवन मरण जस अपजस विधि हात क्या चिंता करनी अगर व समझाने समझते नहीं समझे समय समझा
देगा प्रकृति समझा दिया अपने को नहीं अगर अपना कोई निजन है तो घाटा सेह लो गाली सेह लो आप बलवान बन जाओगे आपके पास ऐसा धन आ जाएगा जो कभी नष्ट नहीं होगा पक्का पर यह ना तो क्षमाशील होता रह गई है ना विवेक रह गया है छोटी-छोटी बातों में पूज्य जनों का अपराध कर देते हैं माता-पिता का अपमान कर देना उनको दंड दे देना पीट देना निष्कासित कर देना पूज्य जनों के प्रति अभद्र व्यवहार करना नहीं नहीं गृहस्थ धर्म बहुत बढ़िया भगवान की प्राप्ति के लिए है विरक्त धर्म इसलिए कठोर है कि इसमें हर विषय से लड़ना त्यागना है और आपका क्या किले की लड़ाई है जैसे किले के अंदर से सुरक्षित रहकर शत्रु पर वार करना और य रक्तो की क्या है चौड़े मैदान की लड़ाई है ललकार करके शत्रु को परास्त करना थोड़ा कठिन है जो मन मांगे उसके विरुद्ध रोक कर के उसको भगवान में लगाना बहुत कठिन बात होती है ऐसे करके खाना पीना बात अलग है लेकिन भगवत प्राप्ति मन को रोक करके और भगवान में लगा साव मन कृष्ण पदार विंद एक एक वृति आपका आपके अंदर अगर कोई विकार आता है
तो आपका परिवार वो है वैसा सिस्टम है वो पाप नहीं माना जाएगा आप भजन करते भगवान को ही प्राप्त होंगे लेकिन विरक्त अगर तो पाप माना जाएगा उसके लिए अपराध हो जाएगा वो चौड़े मैदान में खुले ललकार करके विकारों का नाश करके भगवान को प्राप्त करता है इसीलिए हम वि रक्तो को प्रणाम करते हैं देखो आप लोग जिसे प्रणाम करते हैं आप नमस्कार करते क्यों करते हैं क्या बात है वही शरीर तो ये है वही अंश भगवान के आप हो बस प्रणाम इस बात का कि जहां हम फिसल गए वहां आप आगे बढ़ गए इसलिए प्रणाम आपको आप भगवान में अपने समस्त सुखों का त्याग करके आंतरिक क्लेश सहते हुए चले तो हे महात्मा गृहस्थ का गुरु पद यह चौथा आश्रम त्याग आश्रम है कहीं भी हो चौथे आश्रम को ही गुरु बनाया जाता है कि जो विरक्त भाव से भगवत अनुरागी व इसीलिए सब संतों को प्रणाम करते हैं खास बात है कि जहां लगन ना चाहिए वहां हम लग नहीं पाए जहां से हटना चाहिए वहां हट नहीं पाए जहां से हटना चाहिए वहां लग गए और जहां से लगना चाहिए वहां से हट गए और आपने सही किया तो इसलिए आपको
देखो सब संतों को नहीं क्या बात है यहां कुछ मिलता तो है नहीं प्रकट में वचन मिलते हैं और वो वचन अगर मान लो तो जो कहीं शांति नहीं मिलेगी आपको वो आपके हृदय में मिल जाएगी आपको कहीं ढूंढना नहीं पड़ेगा जो आशीर्वाद आप मांगते घूमते हैं वो आपके अंदर स्फर हो जाएगा केवल मान लो बात बात मान लो बात अगर मान ली तो ऐसे करना वैसे करना यह देना और लेना जिसे ना जंतु पंतु कुछ नहीं तुम जाओ शरवण को कोई तुम्हें परास्त नहीं कर पाएगा सत्संग का मतलब क्या होता है असत का त्याग
करने का उत्साह और भगवत प्राप्ति की लगन और ऐसी लगन ऐसी अगन सब भस्म कर दे निकल जाए यह आग की ज्वाला पर चलना है संसार उपहास करता है मन जलाता है यह क्योंकि व भोगी मन रहा है वो तो चाहता है भोग अब उसको दोगे नहीं तो जलाए हर समय विक्षिप्त करेगा आप उसको अगर रोक कर के आप शांत है तो इनाम लीजिए परम पद भगवान का परम पद इसलिए अपने को अगर कट वचन कहते हैं तो सह जाए सहना बलवान का लक्षण है क्रोध कर लेना यह निर्बल का लक्षण है बलवान सहता है निर्बल गाली भक्ता है तो यह भगवान का आश्रय लियो महा बलवान भगवान है सह जाओ चुप शांत हो जाओ शांत होने में भगवान की कृपा मिलेगी गाली देने में अपराध बन जाएगा लड़ाई करने में अपराध बन जाएगा च और भ
यह पाठ वीडियो के स्वचालित (auto-generated) उपशीर्षकों से लिया गया है — इसमें शब्दों की त्रुटियाँ हो सकती हैं। प्रामाणिक वचन के लिए वीडियो अवश्य सुनें।
मूल वीडियो: Bhajan Marg (YouTube)
संबंधित
- संत भगवान के प्रश्न पर महाराज जी ने साधना जीवन के लिए क्या उपदेश दिया? — महाराज जी कुछ हम लोगों को आप बता दें कि जैसे साधना जीवन में क्या कैसे कुछ भी आप अपने मुखारविंद से कुछ सब बातों की केवल एक ही बात है ना विषय चिंतन होने पावे ना विषय क्रिया बस…
- परिवार में नकारात्मकता व कलह हो तो क्या करें? — एसवी चतुर्वेदी जी दिल्ली से राधे-राधे राधे-राधे महाराज जी महाराज जी परिवार में नकारात्मकता हो घर में कलह हो रही हो गृह युद्ध जैसी परिस्थिति बन रही हो तो अध्यात्म के रास्ते पर…
- एकांतिक वार्तालाप एवं दर्शन #1400 — संजीव मुखर्जी शेयर इवें राधे-राधे महाराज आईआईटी धनबाद से महाराज जी कृपया मुझे बताइए कि मैं कैसे कम बोलूं अधिक सुनूं बोलते समय नरम रहूं दूसरों को अपनी बात रखने का मौका दूं फिर…
- भगवत् मार्ग पर चलना चाहते हैं, पर हर दिन असफल हो रहे हैं। — आस्था बोरा जी जयपुर से श्री हरिवंश महाराज राधे-राधे महाराज जी 2 साल पहले जब आपको सुनना शुरू किया तो जानना हुआ कि हम कितना अज्ञानता और अंधकार में जीवन जी रहे हैं। आपको सुनने से यह…
- भगवान मिलेंगे या नहीं कैसे पता चलेगा? — भगवत दर्शन का सर्वोत्तम उपाय क्या है? भगवान के दर्शन करने का सर्वोत्तम उपाय क्या है? भगवत दर्शन का सरल और सर्वोत्तम उपाय दिन रात उनके नाम का जप करो और एकांत में रो भगवान मिल जाओ।…
- अगर एक नाम का इतना बड़ा फल है, तो निरंतर नाम क्यों जपें? — निखिल जी मुंबई से राधा वल्लभ श्री हरिव श्री हरिवंश महाराज जी महाराज जी एक नाम का फल पूरा त्रिभुवन से भी बड़ा है तो फिर निरंतर नाम जप क्यों कहा जाता है क्योंकि एक नाम जिसको कहा…